<p style="text-align: justify;">भारत की कृषि व्यवस्था में कृषक उत्पादक संगठन (FPO) को किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। छोटे और सीमांत किसानों को जब तक संगठित संस्थागत सहयोग नहीं मिलता, तब तक वे बाजार, पूंजी और तकनीक के क्षेत्र में पिछड़े रहते हैं। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने FPO को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ, सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रावधान किए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल संगठन बनाना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक टिकाऊ और व्यावसायिक बनाना है।</p> <p style="text-align: justify;">सरकार की भूमिका FPO के गठन से लेकर उसके संचालन और विस्तार तक फैली हुई है। सबसे महत्वपूर्ण पहल केंद्रीय क्षेत्र की 10,000 कृषक उत्पादक संगठन गठन एवं संवर्धन योजना है, जिसे वर्ष 2020 में प्रारंभ किया गया। इस योजना के अंतर्गत देशभर में 10,000 नए FPO बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक FPO को पाँच वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता मुख्य रूप से संगठन के पंजीकरण, कार्यालय संचालन, पेशेवर प्रबंधन, प्रशिक्षण और व्यवसाय योजना को लागू करने में उपयोगी होती है। इस योजना का क्रियान्वयन <strong>NABARD, SFAC </strong>और<strong> NCDC</strong> जैसी संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है, जो FPO को तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान करती हैं।</p> <p style="text-align: justify;">FPO की आर्थिक मजबूती के लिए इक्विटी ग्रांट और क्रेडिट गारंटी योजना को एक महत्वपूर्ण सहायक व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। <strong>स्मॉल फार्मर्स एग्री-बिजनेस कंसोर्टियम (SFAC)</strong> द्वारा संचालित इक्विटी ग्रांट योजना के अंतर्गत FPO को उसके सदस्यों द्वारा किए गए शेयर निवेश के अनुपात में अनुदान दिया जाता है। इससे संगठन की पूंजी बढ़ती है और वह बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थानों के सामने अधिक विश्वसनीय बनता है। इसके साथ ही, क्रेडिट गारंटी योजना के माध्यम से FPO को बिना अधिक जोखिम के बैंक ऋण प्राप्त करने में सहायता मिलती है। यह ऋण बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि उपकरणों की सामूहिक खरीद में विशेष रूप से उपयोगी होता है।</p> <p style="text-align: justify;">मशीनरी और अवसंरचना विकास के क्षेत्र में <strong>कृषि अवसंरचना निधि (Agriculture Infrastructure Fund – AIF)</strong> FPO के लिए अत्यंत लाभकारी योजना है। इस योजना के अंतर्गत FPO को गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग सुविधाओं के निर्माण हेतु रियायती ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाता है। साथ ही, इस ऋण पर ब्याज में छूट और क्रेडिट गारंटी की सुविधा भी मिलती है। इससे FPO किसानों के उत्पादों को सुरक्षित रखने और बेहतर मूल्य पर बेचने में सक्षम होते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा <strong>कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (Sub-Mission on Agricultural Mechanization – SMAM)</strong> चलाया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत FPO को ट्रैक्टर, पावर टिलर, कंबाइन हार्वेस्टर, सीड ड्रिल, स्प्रेयर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। कई राज्यों में यह सब्सिडी व्यक्तिगत किसानों की तुलना में FPO को अधिक प्रतिशत में दी जाती है, क्योंकि मशीनों का उपयोग सामूहिक रूप से किया जाता है। इससे छोटे किसान भी आधुनिक मशीनरी का लाभ उठा पाते हैं, जो अन्यथा उनके लिए संभव नहीं होता।</p> <p style="text-align: justify;">बीज उत्पादन और गुणवत्ता बीज की उपलब्धता के लिए FPO को <strong>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) </strong>और <strong>बीज ग्राम योजना </strong>के अंतर्गत सहायता प्रदान की जाती है। इन योजनाओं के माध्यम से FPO को प्रमाणित बीज उत्पादन, बीज प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग मिलता है। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाता है और उत्पादन में सुधार होता है।</p> <p style="text-align: justify;">उर्वरक और कृषि आदानों की उपलब्धता के क्षेत्र में FPO को सामूहिक खरीद की विशेष सुविधा दी जाती है। जब FPO थोक मात्रा में उर्वरक और कीटनाशक खरीदता है, तो उसे बाजार की तुलना में कम दर पर सामग्री मिलती है। कुछ राज्यों में FPO को अधिकृत उर्वरक वितरण केंद्र के रूप में भी मान्यता दी जाती है, जिससे वह किसानों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकता है। यह व्यवस्था किसानों को नकली या घटिया कृषि आदानों से भी बचाती है।</p> <p style="text-align: justify;">सरकार द्वारा FPO के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रबंधन, लेखा, विपणन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, जिससे FPO के पदाधिकारी और सदस्य संगठन को पेशेवर तरीके से चला सकें। यह प्रशिक्षण दीर्घकाल में FPO की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।</p> <p style="text-align: justify;">इस प्रकार, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न योजनाएँ और सब्सिडी FPO को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें एक मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ कृषि उद्यम के रूप में विकसित करने में सहायता करती हैं। मशीनरी, बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की खरीद में मिलने वाला यह सहयोग किसानों की लागत कम करता है और उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि सरकारी सहयोग और सब्सिडी के बिना FPO की अवधारणा को व्यापक स्तर पर सफल बनाना संभव नहीं है।</p>