मछलियों को पोषक आहार देने का उद्देश्य, उनके सर्वोत्तम विकास और बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना है, ताकि मुनाफा बढ़ाया जा सके। प्राकृतिक जल में मछलियों की विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक खाद्य पदार्थों तक पहुंच होती है, लेकिन उनका समग्र स्वास्थ्य उनके पसंदीदा भोजन की उपलब्धता पर निर्भर करता है। एक सीमित प्रणाली में प्राकृतिक या जीवित आहार की सीमित उपलब्धता के कारण पौष्टिक रूप से संतुलित पूरक आहार अनिवार्य है। आमतौर पर सजावटी मछलियों को विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक पैलेटेड चारा खिलाये जाते हैं, जो बाजार में उपलब्ध होते हैं। ये आहार सिंगापुर, हांगकांग, कोरिया, थाईलैंड और कई अन्य देशों से आयात किए जाते हैं। इन मत्स्य आहारों की उच्च लागत मत्स्यपालकों के स्तर पर उनके व्यावसायिक पैमाने को प्रभावित करती है। इसके अलावा, एक तालाब में खाद्य मछली को खिलाने की तुलना में, छोटी पालन इकाइयों में सजावटी मछली को खिलाने के लिए अधिक सटीकता की आवश्यकता होती है। इसलिए एक सजावटी मछली उत्पादक को मछलियों की पौष्टिक आवश्यकताओं, आहार-व्यवहार और विभिन्न प्रजातियों की फीडिंग हैबिट्स के बारे में तकनीकी जानकारी होनी चाहिए, जिससे वे स्थानीय रूप से उपलब्ध लागत और प्रभावी गुणवत्ता सामग्री का उपयोग करके अपने पफार्म पर ही चारा उत्पादन कर सकें। सजावटी मछलियों को परंपरागत रूप से पारंपरिक आहार और जीवित आहार (प्रकृति में उपलब्ध) खिलाया जाता है, जो इनकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता है। इसके अलावा दिए गए आहार की मात्राा और गुणवत्ता आवश्यकता के अनुसार नहीं होती है। मछली चारा प्रबंधन में सही आहार विधि का उपयोग करके सही चारा चुनना और चारा एवं पालने की लागत को अनुकूलित करना शामिल है, ताकि उद्यम लाभदायक हो सके। आहार के प्रकार सजावटी मछलियों के लिए प्रयुक्त तैयार आहार मुख्य रूप से नमी के आधार पर दो प्रकार के होते हैं: शुष्क आहार गैर-शुष्क (नम/गीले) आहार शुष्क आहारः ये सूखे अवयवों से बने होते हैं और इनमें नमी की मात्रा 6-10 प्रतिशत के बीच रहती है। शुष्क आहार के विभिन्न निम्न रूप हैं: मैश आहार यह शुष्क सामग्री का एक साधारण मिश्रण होता है और छोटे आकार की मछली (लार्वा/प्रफाई) के लिए उपयोग किया जा सकता है। पैलेटेड आहार यह एक प्रकार का सूखा आहार होता है, जिसे यांत्रिक माध्यमों द्वारा आवश्यकतानुसार आकार में संकलित किया जाता है। उत्पादन छोटे फर्मों में हाथ से संचालित या इलेक्ट्रिक, पेलेट्स बनाने की मशीन का उपयोग कर किया जा सकता है, जबकि बड़े फर्मों में आहार मिल स्थापित की जा सकती है। लाइव आहार लाइव आहार को जीवित ‘पौष्टिक कैप्सूल' भी कहा जाता है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और वसा) तथा सूक्ष्म पोषक तत्व (विटामिन और खनिज) होते हैं। लाइव आहार मछलियों में रंग विकास के लिए वर्णक प्रदान करने के अलावा मछलियों के अस्तित्व, विकास और प्रजनन दक्षता को भी बढ़ाने का कार्य करते हैं। लाइव आहार कई प्रकार के जल निकायों में बहुतायत में उपलब्ध होते हैं, लेकिन इन्हें इकट्ठा करना बहुत मुश्किल होता है। दूसरा प्राकृतिक परिस्थितियों में उपलब्ध चारे की गुणवत्ता भी अनिश्चित होती है। ये रोग संचरण के एक संभावित स्रोत भी हो सकते हैं, इसलिए जीवित खाद्य पालन इकाई को सजावटी मछली उत्पादन इकाई में एक अभिन्न अंग के रूप में शामिल करने करने की आवश्यकता होती है। पपड़ी आहार यह संरचना में चपटा होता है। यह पहले सतह पर तैरता है और फिर धीरे-धीरे डूब जाता है। यह आदर्श रूप से शीर्ष में निवास करने वाली मछली और मध्य-पानी कीस मछली के लिए अनुकूल है। कई नीचे रहने वाली प्रजातियां भी पपड़ी आहार नीचे गिरने के बाद उसका उपभोग करती हैं। ज्यादा और कम फीडिंग रोक उच्च उत्पादन और अच्छे फायदे के लिए पूरक आहार का उपयोग बहुत आवश्यक है। यह उत्पादन की लागत को बढ़ाता है इसलिए इसका विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए। ज्यादा फीडिंग कराने से इनपुट की लागत बढ़ जाती है और पानी की गुणवत्ता भी बिगड़ जाती है। यह बहुत ही सामान्य रूप से कहा जा सकता है कि मछलियां कम फीडिंग से नहीं मर सकतीं। कम फीडिंग भी उचित नहीं है, क्योंकि इसके कारण मछलियों की वृद्धि रुक जाती है। ग्रैनुलर आहार या आहार के टुकड़े ये बहुत छोटे और गोल आकार के अनाज के समान होते हैं। सारणी 1. मछली की विभिन्न अवस्थाओं में पोषक तत्वों की आवश्यकता (प्रतिशत में) पोषक तत्व युवा अवस्था ब्रूड स्टॉक' स्रोत प्रोटीन 40-50 30-40 मछली, स्क्विड, झींगा, सोयाबीन, सरसों, मूंगफली आदि का पिसान, गेहूं/मक्का का लस, क्लैम का मांस लिपिड 4-6 6-8 मछली का तेल, वनस्पति तले (सूरजमुखी, अलसी आदि) कार्बोहाइड्रेट 40-50 40-45 मक्के का आटा, चावल और गेहूं की भूसी विटामिन-खनिज 1-2 1-2 कृत्रिम रूप 'ब्रूड स्टॉक (अंडा देने वाले और बच्चा देने वाले दोनों) को लाइव आहार भी दिया जाना चाहिए। गैर-शुष्क (नम/गीले) आहार- ये दो प्रकार के हैं: नम आहारः ये दोनों गीले और सूखे अवयवों या मिश्रित नमी के साथ केवल सूखे अवयवों का मिश्रण होते हैं। नम आहार में नमी की मात्रा 18 से 40 प्रतिशत के बीच होती है। गीले या पेस्ट आहारः गीले आहार, गीले अवयवों से बने होते हैं और जाली या छलनी के माध्यम से खिलाए जाते हैं। इसमें आमतौर पर ट्रैश फिश, झींगा आदि जैसे गीले तत्व शामिल होते हैं या 45-70 प्रतिशत नमी वाले जीवित आहार शामिल होते हैं। गीले आहार मुख्य रूप से युवाओं, मांसाहारी प्रजातियों और ब्रूडर्स को खिलाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। सारणी 2. जीवित चारे का आकार और पसंदीदा अवस्था सूक्ष्मजीवों का नाम/लाइव आहार आकार उपयोग की अवस्था महत्वपूर्ण लक्षण इन्फोसोरिया 50-300 माइक्रो मी(0.05-0.3 मि.मी.) (0.05-0.3 मि.मी.) पहला इंस्टार चरण (ताजा अंडे से निकला हुआ) छोटे और एककोशिकीय, लार्वा के लिए आदर्श स्टार्टर आहार जूप्लैंकटन 200-3000 माइक्रॉन (0.2-3.0 मि.मी.) लार्वा चरण प्रारंभिक जीवन चरणों के लिए उच्चतम प्रोटीन (60-65 प्रतिशत) स्रोत आर्टेमिया नॉपली 400-500 माइक्रॉन लार्वा चरण फिल्टर आहार के लिए उपयोगी, पूफा (पीयूएफए), विटामिन-सी युक्त, 6-8 घंटे तक हैचिंग के बाद और मछली के लार्वा को दिए जाते हैं काईरोनोमिड लार्वा (ब्लड वर्म) 10-20 मि.मी. लार्वा चरण आयरन और पिग्मेंट का समृद्ध स्रोत (हीमोग्लोबिन युक्त ट्यूबिफेक्स वर्म (स्लज वर्म) 20 मि.मी. तक लंबा फ्राई आयरन और पिग्मेंट का समृद्ध स्रोत (हीमोग्लोबिन युक्त) केंचुआ आकार प्रजातियों के अनुसार बदलता रहता है। वयस्क (कटे हुए रूप में) प्रोटीन (60-65 प्रतिशत) और वसा (9-10 प्रतिशत) के प्रचुर स्त्रोत और ब्रूडस्टॉक एवं ग्रो आउट कल्चर के लिए उपयोगी मछली के जीवनस्तर और आकार के अनुसार आहार लार्वा या फ्राई के लिएः मैश आहार, गीले/पेस्ट आहार/जीवित आहार इत्यादि उपयोग किए जाते हैं। फिगरलिंग/बड़े/ब्रूडर्स के लिएः पैलेटेड आहार/जीवित आहार आदि उपयोग किए जाते हैं। महत्वपूर्ण सुझाव जिस सजावटी मछली की प्रजाति का आप पालन करना चाहते हैं, उसके पोषण की आवश्यकता को समझना। मछली के आहार और उसके खाने की आदत/उसके निवास के बारे में पता लगाएं। ऐसे आहार का चयन करें, जो मछली क ेनिवास स्थान तक पहचुंने में उपयुक्त हो। आहार फॉर्मुलेशन के लिए सही मछली आहार सामग्री का चयन करें। तैयार आहार की पोषक सामग्री के बारे में जानकारी पढ़ें। उपयुक्त आकार और जल स्थिरता वाले आहार का चयन करें। मछली की खाने की आदतों के अनुसार आहार शाकाहारी और सर्वाहारी मछलियों के लिएः सूखे/नम आहार (पौधे आधारित सामग्री/जीवित आहार) उपयोग किए जाते हैं। मांसाहारी मछलियों के लिएः सूखे आहार (पशु आधारित घटक जैसे पिफश मील)/नम आहार (ट्रैश पिफश), झींगा/जीवित आहार (ट्यूबिपफेक्स, केंचुआ, कीट लार्वा, रक्त कीड़े आदि) उपयोग किए जाते हैं। सही लाइव आहार का चुनाव मछली की आवश्यकता के अनुसार सही प्रकार का लाइव आहार चुनें प्राकृतिक परिस्थितियों में कई प्रकार के लाइव आहार उपलब्ध होते हैं जैसे कि इन्पफोसोरिया (प्रोटोजेन), कॉपपोड्स, क्लेडोसेरांस, रोटिफर, आर्टेमिया नाउप्ली आदि और अन्य जीव जैसे ट्यूबिपफेक्स, काईरोनोमिड लार्वा, केंचुआ आदि। विभिन्न प्रकार की मछलियां, भिन्न अवस्थाओं में लाइव आहार के आकार के साथ-साथ अपने मुंह के आकार के अनुसार अलग तरह के लाइव आहार पसंद करती हैं (सारणी-2)। इसलिए मछली की आवश्यकता के अनुसार सही प्रकार के लाइव आहार का चयन करना आवश्यक है। सारणी 3. विभिन्न विकासात्मक चरणों के लिए आहार की अनुमानित मात्रा अवधि कुल बायामोस (1000 नग) फीडिंग दर आहार की मात्रा 1 से 4 सप्ताह 1.5 ग्राम मछली शरीर के वजन का 4-6 गुना 6.0-9.0 ग्राम प्रतिदिन फ्राई 100 ग्राम मछली शरीर के वजन 5-10 प्रतिशत 5-10 ग्राम प्रतिदिन फिगरलिंग 1000 ग्राम मछली शरीर के वजन 3-5 प्रतिशत 30-50 ग्राम प्रतिदिन ग्रो आउट 10000 ग्राम मछली शरीर के वजन 2-3 प्रतिशत 200-300 ग्राम प्रतिदिन आहार के अन्य प्रकार सूखे आहार ये पोषाहार पोषक मान खराब हुए बिना लंबे समय तक जमे हुए रूप में रह सकते हैं। ये क्यूब्स रूप में उपलब्ध होते हैं, जो टैंक की दीवार पर चिपके रहते हैं। मछलियां इसे घुलने के साथ ही कुतरती हैं। औषधि मिला हुआ आहार मछली काो दवा देने के लिए मेडीकेटेड फिश फूड एक सुरक्षित आरै प्रभावी तरीका है। एक लाभ यह है कि औषधीय आहार जलीय वातावरण को दूषित नहीं करता है। स्नान उपचारों के विपरीत, मछलीघर में मछली, निस्पदंन और शैवाल के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करता है। परजीवी औषधीय आहार द्वारा स्पॉट पर ही मर जाते हैं, क्योंकि मछली इसका सवेन करती है। सारणी 4. सजावटी मछली को आहार खिलाने की आवृत्ति मछली की उम्र आहार खिलाने की आवृत्ति टिप्पणी 1 से 4 सप्ताह एक दिन में 3-4 बार मछली विकास एवं रंग में वृद्धि के लिए वैकल्पिक आहार (सूखे/ जीवित आहार) खिलाना आवश्य 3 महीने तक 4 महीने बाद दिन में तीन बार (बड़े होने के लिए और ब्रूडर्स के लिए) दिन में दो बार आहार खिलाने की विधियां हाथ से खिलाना यह विधि छोटे आकार के तालाबों /टंकियों/टैंकों में मछलियों को आहार खिलाने के लिए उपयोग की जाती है। इसमें प्रति दिन एक ही व्यक्ति द्वारा निर्धारित स्थान और निश्चित समय पर आवश्यक मात्रा में आहार वितरित किया जाना चाहिए। इस तरह के अभ्यास से आहार को अपव्यय होने से बचाया जा सकता है। आहार अपव्यय और प्रदूषण को रोकने के लिए बहुत जल्दी या बहुत ज्यादा न खिलाएं। ट्रे में खिलाना इस विधि में तालाबों/टैंकों में विभिन्न स्थानों पर जालीदार/प्लास्टिक ट्रे लगायी जाती है और इनमें आहार (सूखा/आटा/गैर-सूखा) रखा जाता है। ट्रे फीडिंग द्वारा मछली द्वारा खपत/छोड़ी गई मात्रा के बारे में सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है ताकि इसे अधिक सटीक तरीके से समायोजित किया जा सके। फीडिंग दर, समय और आवृत्ति फीडिंग दर, समय और आवृत्ति मछली की जीवन अवस्था पर और साथ ही मछली के शरीर के वजन पर निर्भर करती है। इसके अलावा, आहार की स्वीकृति और उपयोग तापमान, घुलित ऑक्सीजन आदि जैसे इष्टतम पर्यावरणीय परिस्थितियों पर भी आधरित होती है। मछली की चयापचय गतिविधियां इन स्थितियों से सीधे संबंधित होती हैं। आहार की कुल मात्रा = मछली का औसत आकार (शरीर का वजन) × आहार दर (प्रतिशत) × तालाब में मछलियों की कुल संख्या/100 स्वचालित आहार फीडर बड़े आकार की कल्चर प्रणालियों में बहुत अधिक अपव्यय के बिना एक स्वचालित या मांग आहार फीडर मछली को अधिक प्रभावी ढंग से खिलाने के लिए कुशल विकल्प है। स्वचालित मांग आहार फीडर का उपयोग तालाब में मछली स्टॉक के आधार पर आहार की गणना की गई मात्रा को निकालने के लिए किया जाता है। मछली जरुरत की दर से ज्यादा चारा ले सकती है। स्वचालित डिमांड आहार प्रभावी समय की बचत करते हैं और पैलेटेड आहार फीडर को वितरित करने के लिए प्रभावी होते हैं। फीडिंग का सही समय मछलियों में आहार सेवन और पाचन क्षमता, तापमान, पी-एच, घुलित ऑक्सीजन आदि जैसे विभिन्न पर्यावरणीय कारकों पर निर्भर करता है। बहुत अधिक/कम तापमान या घुलित ऑक्सीजन 5.0 मि.ग्रा./लीटर से कम जैसे कारक सीधे मछली के चयापचय को प्रभावित करते हैं। इसलिए उस समय फीडिंग करना महत्वपूर्ण है जब मछली आहार का सेवन कर सकती है और पाचन प्रक्रिया के दौरान तनावमुक्त रह सकती है। रोजाना निश्चित समय पर सूर्योदय के बाद मछलियों को फीडिंग कराएं और देर शाम या रात के समय कभी न खिलाएं। फीडिंग-कितनी बार मछली शुरुआती दिनों में तेजी से बढ़ती है तो इसकी चयापचय गतिविधियों और समग्र विकास के लिए लगातार अंतराल पर आहार खिलाया जाना चाहिए। विकास दर पानी की गुणवत्ता के मापदंडों, पर्यावरण की स्थिति सहित विभिन्न कारकों के आधार पर फीडिंग आवृत्ति को कम या बढ़ाया जा सकता है। सारणी-4 में एक सामान्यीकृत फीडिंग आवृत्ति प्रस्तुत की गई है। स्त्रोत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) लेखक:मनोज कुमार, कृष्णा कुमार चैधरी और बी.आर. होन्नानंदा जलीय कृषि विभाग, मात्स्यिकी महाविद्यालय, छत्तीसगढ़, कामधेनु विश्वविद्यालय, कवर्धा-471995 (छत्तीसगढ़)