परिचय विगत कुछ वर्षों में प्रयोगशाला और उसके बाहर किये गये प्रयोगों से यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि तालाब में उचित मात्रा में रासायनिक खाद, जैविक खाद, स्वस्थ मत्स्य बीज का संचयन और पूरक आहार का प्रयोग किया जाय तो प्रति हेक्टेयर जल क्षेत्र से 3000 से 5000 किलोग्राम मछली का प्रतिवर्ष उत्पादन किया जा सकता है | मिश्रित मत्स्य पालन द्वारा किसी तालाब में उपलब्ध सभी भोज्य पदार्थ एवं पूर्ण जलक्षेत्र का अधिकतम प्रयोग करने की कोशिश की गई है | अधिक से अधिक उत्पादन के लिए तालाब की तैयारी और देख-रेख को निम्नलिखित चरणों में बांटा जा सकता है | - 1. संचयन पूर्व तालाब की तैयारी (क) तालाब की भौतिक स्थिति में सुधार : मत्स्य पालन की तैयारी आरंभ करने के पूर्व यह आवश्यक है कि तालाब से सभी बाँध मजबूत और पानी का प्रवेश एवं निकास का रास्ता सुरक्षित हो ताकि वर्षाऋतू में तालाब को नुकसान न पहुंचे तथा तालाब में पानी के आने-जाने से बाहरी मछलियों का प्रवेश न हो और तालाब की संचित मछलियाँ बाहर न भाग सके | (ख) जलीय पौधों की सफाई – तालाब में उगे जलीय पौधों में मछलियों के शत्रुओं को आश्रय मिलता ही है साथ ही ये तालाब की उर्वरकता को सोख लेते हैं तथा जल के संचयन में बाधा डालते हैं | इनके उन्मूलन का सबसे अच्छा तरीका मजदूरों द्वारा सफाई करवा देना है | वैसे कुछ यन्त्र और रसायन भी उपलब्ध हैं जिनके द्वारा तालाब की सतह पर लगे पौधे जैसे –जलकुंभी, कमल, लीला, पिस्टिया, आइपोमिया या पानी में डूबे पौधे जैसे सिरेटोफाईलम, बैलिसनेरिया आदि का उन्मूलन किया जा सकता है | परन्तु किसी भी रसायन का प्रयोग मत्स्य विशेषज्ञ की सलाह से ही क्रिया जाना चाहिए क्योंकि ये तीव्र विष है और इनका उन्मूलन हो जाने के बाद बरकरार यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि वे पुन: तालाब में घर न कर पायें | (ग) परभक्षी एवं अपतृण (जंगली) मछलियों का उन्मूलन : पोठिया, धनहरी, चंदा, चेला, खेसर आदि अपतृण और बोआरी, टेंगरा, गरई सौरा: कवई बुल्ला, पबदा, मांगुर आदि मांसाहारी (परभक्षी) मछलियों की श्रेणी में आते हैं | दोनों तरह की मछलियाँ उपलब्ध कराये गये पूरक तथा प्राकृतिक आहार में हिस्सा बांटती है और संचित जीरों को भी खा जाती है | अत: यह आवश्यक है कि मत्स्य बीज संचय के पूर्व इनका पूर्ण उन्मूलन हो जाये | उन्मूलन का कार्य बार-बार जाल चलाकर या तालाब सुखाकर या विष का प्रयोग करके किया जा सकता है | इसमें सबसे उत्तम तालाब से पूर्ण जल की निकासी करके मछलियों को चुनकर तालाब को कुछ दिन तक सूखने के लिए छोड़ देना है | परन्तु ऐसे तालाब भी काफी है जिन्हें सुखाना या जाल लगाकर सफाई करना संभव नहीं है, वैसे तालाबों में विष का प्रयोग किया जाता है | वैसे बाजार में बहुत तरह के रासायनिक और जैविक विष उपलब्ध हैं, जैसे – महुआ की खल्ली को तालाब में 1000 किलोग्राम / एकड़ / मीटर की दर में प्रयोग करने पर सारी मछलियाँ मर जाती हैं, जिन्हें खाने में काम में लाया जा सकता है | साथ ही महुआ खल्ली सड़ने के बाद जैविक खाद का भी काम करता है | रासायनिक विष के रूप में ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग 140 किलोग्राम/एकड़/ मीटर की दर से प्रयोग करने पर भी तालाब की सारी मछलियाँ मर जाती है जो खाने योग्य रहती है | अन्य रासायनिक विष के प्रयोग का प्रभाव दीर्घकालिक होता है और इनके प्रयोग से मरी मछलियों को खाया नहीं जा सकता है | यहाँ तक कि सामान्य लोग तथा पशु के लिए भी उस जल का प्रयोग एक माह तक नुकसानदेह रहता है | (घ) चूना का प्रयोग : तालाब के पानी को थोडा क्षारीय होना मछली की वृद्धि एवं स्वास्थ्य हेतु अच्छा होता है | साधारणत: 100 किलोग्राम भाखरा चूना का प्रति एकड़ जलक्षेत्र में छिड़काव मत्स्य बीज संचयन के करीब 10 से 15 दिन पहले कर दिया जाना चाहिए | 50 चूना का प्रयोग जाड़ा प्रारंभ होने एवं 50 कि.ग्रा. चूना का प्रयोग गर्मी के मौसम प्रारंभ होने पर करना श्रेयकर होता है | अधिक अम्लीय जल वाले तालाबों में और भी अधिक भखरा चूना की आवश्यकता होती है | पानी की क्षारीयता की जांच बाजार में उपलब्ध पी.एच. पत्र या युनिवर्सल इंडिकेटर सौल्युशन द्वारा आसानी से कर सकते हैं | चूना की मात्रा तब बढ़ाते जानी चाहिए जब तक पानी का पी.एच. पत्र या युनिवर्सल इंडिकेटर सौल्यूशन द्वारा आसानी से कर सकते हैं | चूना की मात्रा तब तक बढ़ाते जानी चाहिए जब तक पानी का पी.एच. 7.5 से 8 के बीच न हो जाए | 2. मत्स्य बीज संचयन संचयन हेतु उन मछलियों की किस्मों का चयन किया जाना चाहिए जिनकी भोजन की आदत एक दुसरे से अलग हो, जो तालाब के प्रत्येक बिन्दु पर पाए जाने वाले भोज्य पदार्थ का प्रयोग कर सके तथा कम समय में तेजी से बढती हो | इन तथ्यों को देखते हुए भारतीय मछलियों में कतला, रोहू तथा मृगल और विदेशी कार्प मछलियों में सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प और कॉमन कार्प को एक साथ संचयन किया जाना उत्तम होता है | साधारणत: सम्मिलित रूप से 2000 से 2500 की संख्या में 3” से 4” आकार के मत्स्य बीज अंगुलिका/ इयर लिंग या 5000 से 6000 की संख्या में 1 “ से 2” आकार के मत्स्य बीज प्रति एकड़ जलक्षेत्र के दर से संचयन किया जाना चाहिए | निम्नलिखित तीन अनुपात में से किसी एक अनुपात में मत्स्य बीज का तालाब में संचयन किया जाना चाहिए | 1 2 3 कतला – 10% कतला – 30% कतला – 30% सिल्वर कार्प – 20% रोहू – 40% रोहू – 40% रोहू – 30% मृगल – 15% मृगल – 30% ग्रास कार्प – 10% कॉमन कार्प – 15% मृगल – 15% कॉमन कार्प – 15% तालाब में मछलियों के विभिन्न प्रजातियों की भोजन संबंधी आदतें नोट : मत्स्य बीज संचय में यह सावधानी रखनी चाहिए कि मत्स्य बीज स्वस्थ और अच्छे किस्म के हों | कभी भी तालाब में नदी से मत्स्य स्पान लेकर सीधे नहीं संचय करना चाहिए, अन्यथा तालाब में अनावश्यक मछलियाँ भी आ जायेंगी, जिससे तालाब की सफाई आदि पर किया गया व्यय पूर्ण रूप से व्यर्थ हो जायेगा | 2. मत्स्य बीज संचयन के उपरान्त : तालाब से अच्छा उत्पादन उसमें उर्वरक एवं पूरक आहार उचित प्रयोग प्राप्त करना संभव है | (क) उर्वरक का प्रयोग : रेयरिंग तालाब प्रबन्धन में वर्णित विधि से मिश्रित मत्स्य पालन तालाब में भी उर्वरक का प्रयोग किया जाता है | (ख) पूरक आहार : सरसों, राई, सोयाबीन या मूंगफली की खल्ली एवं चावल का कुंडा / कोढ़ा या गेहूं का चोकर बराबर मात्रा में मिलाकर मछलियों के कुल अनुमानित वजन का 2% की दर से प्रतिदिन पूरक आहार का प्रयोग किया जाता है | पूरक आहार का छिड़काव सुखा या एक दिन पानी में भिगों कर तालाब में एक निश्चित स्थान पर किया जाना चाहिए | अथवा बोरा में छेद कर पूरक आहार भार कर चार-पांच स्थान पर तालाब में बांस के सहारे टांग देना चाहिए | यदि ग्रास कार्प का बीज भी संचयन किया हो तो प्रतिदिन 4-5 किलोग्राम हाईड्रिला, बरसीम, नेपियर या किसी तरह का भी मुलायम घास तालाब में पूरक आहार के रूप में ग्रास कार्प को दिया जाना चाहिए | वर्त्तमान में बाजार में फारमुलेटेड फिड भी उपलब्ध हैं जिनमें समुचित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के साथ-साथ मिनरल मिक्सचर जैसे तत्व मौजूद रहते हैं | एस पूरक आहारों के प्रयोग से मछलियाँ कम समय में तेजी से वृद्धि करती है | (ग) मछली की वृद्धि की जांच : प्रतिमाह तालाब में जाल लगाकर मछलियों की वृद्धि एवं उनके स्वास्थ्य की जांच की जानी चाहिए तथा उसके अनुरूप पूरक आहार की मात्रा घटाई या बढ़ाई जानी चाहिए | मछलियों को तालाब से निकालना : मछलियों को आठ-नौ महीने के संचय के बाद बिक्री हेतु फैंका जाल या ताना जाल से समय-समय पर आंशिक रूप से निकालना, एक बार सारी मछलियों को निकालने के अपेक्षा अच्छा होता है | कॉमन कार्प मछली की निकासी नवम्बर, दिसंबर से प्रारंभ कर फरवरी के अंत तक पूरी कर ली जानी चाहिए | जिससे तालाब में मार्च महीने में पुन: कॉमन कार्प के बीज का संचयन किया जा सके | उसी तरह शेष मछलियों की भी आंशिक निकासी मई तक पूरी हो जानी चाहिए ताकि जून-जुलाई में उक्त तालाब में पुन: संचयन किया जा सके | स्त्रोत: मत्स्य निदेशालय, राँची, झारखण्ड सरकार