<p style="text-align: justify;"><strong>रेन्बो ट्राउट मत्स्य पालन</strong></p> <p style="text-align: justify;">रेन्बो ट्राउट पर्वतीय क्षेत्रों में पाली जाने वाली विदेशी प्रजाति की मछली है। यह मत्स्य प्रजाति उत्तरी अमेरिका के प्रशान्त महासागर वाले तटीय क्षेत्रों की मूलवासी है, जिसको 20वीं सदी के प्रारंभ में अंग्रेजों द्वारा भारत में लाकर मुख्यतः क्रीड़ा मात्स्यिकी तथा मनोरंजन के लिए उत्तर भारत के हिमालय क्षेत्र एवं दक्षिण भारत के कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित किया गया था। इस मछली का पालन यूरोप के देशों में बहुतायत से किया जाता है। भारत में इस मछली के पालन की शुरूआत 20वीं सदी के साठ के दशक से हुई है। सर्वप्रथम रेन्बो ट्राउट मछली का पालन जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश के ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में हुआ। इसके बाद यह प्रजाति अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अधिक आमदनीपरक जल कृषि की मुख्य प्रजाति के रूप में प्रचलित हो गई ।</p> <h3 style="text-align: justify;">ट्राउट रेस-वे </h3> <p style="text-align: justify;">आमतौर पर ट्राउट मछली का पालन लम्बाईयुक्त पक्के तालाबों में किया जाता है। इन तालाबों को रेस-वे कहते हैं। इनमें लगातार पानी का बहाव बनाये रखना आवश्यक है। पानी के बहाव से मछली को आवश्यक घुलित ऑक्सीजन की पूर्ति होती है तथा बचा हुआ आहार एवं विष्ठा जैसे वांछनीय पदार्थों का लगातार बहाव के साथ निष्कासन होता रहता है। बहता हुआ पानी तालाब में वांछित कमतापमान को भी नियंत्रित रखता है। रेस-वे का उचित आकार मछली की बढ़वार को प्रभावित करता है। आमतौर पर उत्पादन वाले तालाबों का आकार 30 वर्ग मीटर का होता है, जिसकी लम्बाई लगभग 15 मीटर तथा चौड़ाई 2 मीटर रखी जा सकती है। रेस-वेमें प्रवेश द्वार (इनलेट) तथा जल निष्कासन द्वार (आउटलेट) की व्यवस्था आवश्यक है। इनलेट के रूप में खुली नाली या 2 इंच व्यास की पाइप व्यवस्था हो सकती है तथा आउटलेट रेस-वे को गहरे क्षेत्र में नीचे की तरफ 3 इंच व्यास के पाइप द्वारा या स्लुइस गेट के आकार में बनाया जाता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">अंगुलिकाएं</h3> <p style="text-align: justify;">रेस-वे में संचय करने के लिए, 2-5 ग्राम आकार की स्वस्थ एवं रोगरहित अंगुलिकाओं का पर्याप्त मात्र में होना आवश्यक है। अंगुलिकाओं का आकार लगभग समान होना चाहिए। छोटी एवं असमान आकार की अंगुलिकाओं का संचय उचित नहीं है। अंगुलिकाओं को फार्म पर ही तैयार किया जा सकता है या अन्य स्थान से उचित ढंग से जीवित अवस्था में लाया जा सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">आहार</h3> <p style="text-align: justify;">प्रतिदिन आवश्यकतानुसार मछलियों को खिलाने के लिए आहार की आवश्यकता होती है। मछली की अवस्था के अनुसार अंगुलिका आहार या ट्राउट आहार स्वयं तैयार करके या अन्य स्रोतों से इनकी व्यवस्था करना आवश्यक है। एक बार में सिपर्फ 3 महीने की आवश्यकता का आहार ही रखना उचित है। इसका भंडारण उचित ढंग से करना जरूरी है। अधिक पुराना एवं फफूंदी लगा आहार प्रयोग नहीं करना चाहिए। </p> <h3 style="text-align: justify;">उपकरण </h3> <p style="text-align: justify;">संवर्धन के दौरान कुछ छोटे प्रकार के उपकरणों तथा औजारों की आवश्यकता होती है, जैसे-टब, बाल्टी, मग, रेस-वे सपफाई का ब्रश, छोटे आकार का मत्स्य जाल, फीड कन्टेनर, फीडिंग ट्रे इत्यादि। बड़े ट्राउट फार्म के लिए छोटे आकार के फिल्टर, एरेटर फीड मिल, ग्रेडर, फीड ड्रायर, आइस बॉक्स तथा छोटी-बड़ी तुलाएं आवश्यक होती हैं। जल तापमान मापने के लिए थर्मामीटर, ऑक्सीजन सिलेण्डर, ऑक्सीजन एंव अमोनिया मापने की किट तथा गम बूट की भी आवश्यकता होती है। लाल दवा (पोटेशियम परमैंग्नेट) तथा साधारण नमक भी मत्स्य उपचार हेतु अत्यंत आवश्यक हैं।</p> <p style="text-align: justify;">ट्राउट पालन में पानी के तापमान की महत्वपूर्ण भूमिका है। सामान्यतः 0-20 डिग्री सेल्सियस तापमान ट्राउट पालन के लिए अनुकूल रहता है। फिर भी अच्छी बढ़वार एवं अधिक उत्पादन के लिए 13-18 डिग्री सेल्सियस तापमान रहना आवश्यक है। उचित तापमान रहने से मछली ठीक प्रकार से आहार ग्रहण करती है तथा घुलित ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्र बनी रहती है। इसके विपरीत अधिक तापमान पर मछली तनावग्रस्त अवस्था में रहती है तथा सामान्य व्यवहार नहीं करती है। आमतौर पर 18 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान ट्राउट के लिए अनुकूल नहीं है तथा इस स्थिति में ज्यादा समय तक रहने से मछलियां मरने लगती हैं। ऐसे में पानी के बहाव को बढ़ाकर तापमान का कुछ नियंत्रण किया जा सकता है अन्यथा ठण्डे पानी की व्यवस्था आवश्यक हो जाती है। अतः मछलियों की संख्या एवं वजन के अनुसार संवर्धन के दौरान रेस-वे में पानी की आवश्यकता मछली की अवस्था के अनुसार अलग-अलग रहती है। सुविधा के लिए आवश्यक जल की मात्र को जल बहाव के रूप में समझा जा सकता है। जल बहाव की लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) में गणना की जाती है। आमतौर पर एक टन मछली उत्पादन के लिए 300 लीटर प्रति मिनट पानी की आवश्यकता होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">आहार व्यवस्था</h3> <p style="text-align: justify;">रेनबे ट्राउट मांसाहारी मछली है अतः इस मछली की खुराक में उच्च कोटि के प्रोटीन का प्रचार मात्र में रहना अत्यंत आवश्यक है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), देबाजीत सर्मा निदेशक, भाकृअनुप-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय, भीमताल, नैनीताल (उत्तराखण्ड)।</p>