मत्स्य पालन वर्तमान में दुनिया भर में सबसे तेजी से बढ़ रहे खाद्य उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यह सालाना 7.1 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ रहा है। कुल खाद्य आपूर्ति का 46 प्रतिशत योगदान करने के बावजूद इसे अभी लंबा सफर तय करना है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में नये-नये शोध और अनुसंधान के अनेक अवसर हैं। मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तरीके से कर उसकी उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। खाद्य सामग्री की कमी के कारण, मत्स्य खाद्य उद्योग को मुर्गी और अन्य पशुओं के खाद्य उद्योग के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। इस वजह से अब मत्स्य आहार के लिए नये एवं गैर पारंपरिक खाद्य सामग्री स्रोत खोजने की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों, बेहतर मत्स्य पालन पद्धतियों और मत्स्य आहार में सस्ती सामग्री को शामिल करना (जो वनस्पति आधारित, स्थानीय रूप से उपलब्ध और पौष्टिक रूप से समृ( होद्ध बहुत महत्वपूर्ण है। मत्स्य उत्पादन में पोषण का कापफी महत्व है, क्योंकि मत्स्य आहार कुल लागत का लगभग 50 प्रतिशत बैठता है। छोटे पैमाने पर अधिकांश किसान जलीय कृषि के लिए चावल, गेहूं, मक्के का चोकर और सरसों की खली जैसी पारंपरिक आहार सामग्री पर निर्भर रहते हैं। कभी-कभी इन स्रोतों के दुर्लभ होने या पशुपालन और मानव उपभोग के लिए इस्तेमाल होने की वजह से मत्स्य खाद्य उद्योग को उनके साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, जो कि आहार के महंगे होने का एक कारण बन जाता है। इन मुद्दों के अलावा मुख्य समस्या जागरूकता की कमी और वैकल्पिक आहार सामग्री जैसे ल्यूकेनाल्यूकाेसिफेला, कजानस कजान, ग्लाइसिन मैक्स, कॉरिका पपाया, मनीहाेट एस्कुलेंटा, केला, सेस्बानिया, हेलियनथस मल्टीफ्रलोरस, गोभी आदि जैसे पौधों की उच्च कोटि की प्रोटीनयुक्त पत्तियों के उपयोग ज्ञान का अभाव होना भी है। उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य आहार का निर्माण मुर्गीपालन और पशुपालन में आहार सामग्री के तौर पर शामिल करने के लिए कई स्थानीय रूप से उपलब्ध वनस्पति और वनस्पति आधारित उत्पादों का मूल्यांकन किया गया है। मत्स्य आहार के रूप में उनके संभावित उपयोग के लिए केवल कुछ का ही मूल्यांकन किया गया है। जब इन पत्तियों को ए.ओ.ए.सी (१९९०) की प्रयोग विधि द्वारा विश्लेषण करके उनकी पोषकीय संरचना की जांच की गई, तो यह पाया गया कि उनमें से कुछ में उच्च क्रूड प्रोटीन और बहुत कम मात्रा में क्रूड फाइबर है। इसलिए यह निष्कर्ष निकाला गया कि वनस्पति आधारित सामग्री का प्रयोग सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य आहार बनाने के लिए हो सकता है। यह मत्स्य उत्पादन में सुधार करने में सराहनीय योगदान दे सकता है। सुबबूल यह ल्यूकेना ल्यूकोसिफेला परिवार फेबेसी से संबंधित एक मध्यम आकार का तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है। इसके वृक्ष दक्षिणी मेक्सिको और उत्तरी मध्य अमेरिका में मूल रूप से पाये जाते हैं। भारत में इसे सुबबूल के रूप में जाना जाता है। इसकी खेती आमतौर पर बगीचे में सजावट और खाद्य फसल के रूप में की जाती है। इस पौधे के विभिन्न हिस्से जैसे जड़, पत्तियां, तने, छाल, लकड और बीज मनुष्य और जानवरों के लिए बहुत उपयोगी हैं। पत्तियों का उनके उच्च पौष्टिक मूल्य के कारण पशु आहार के रूप में उपयोग किया जाता है। इसे अक्सर 'उष्णकटिबंधीय अल्फाल्फा' के रूप में संबोधित किया जाता है। एल. ल्यूकोसिफेला की पत्तियां एक सस्ता प्रोटीन स्रोत हैं। इसके उच्च पौष्टिक मूल्य के कारण यह मत्स्य आहार के रूप में उपयोग करने के लिए उपयुक्त है। पपीता यह पूरे साल उष्णकटिबंधीय क्षेत्राें में पाया जाता है। इसे 'मेडिसिन ट्री' या 'मेलन ऑफ हेल्थ' के रूप में जाना जाता है। पपीता पोषक तत्वों से समृ( होता है। इसके फल (अपरिपक्व), छाल, पत्तियों और बीज में प्रोटियोलॉयटिक एंजाइम और पपेन पाया जाता है। यह प्रोटीन को अमीनो अम्ल में तोड़ देता है। यह मांस को मुलायम करने में प्रयोग किया जाता है। इसमें औषधीय गुण होते हैं। इसके मुखय सक्रिय अवयवों में कार्पिन, काइमोपैन और पेपेन, ग्लुकोट्रोपियोओलिन का जीवाणुनाशक एग्लीकोन, बेंजाइल आइसोथियोसाइनेट, ग्लाइकोसाइड सिनिग्रिन, एंजाइम मायोसिन और कार्पेसिमाइन शामिल हैं। समृद्ध अमीनो अम्ल प्रोफाइल के कारण इसकी पत्तियां, प्रोटीन (30 प्रतिशत तक) का एक अच्छा स्रोत होती हैं। सोयाबीन ग्लाइसीन मैक्स अत्यधिक तेजी से बढ़ने वाली जड़ी-बूटियों का पौधा है। यह एशिया में मुख्यतः पाया जाता है और इसे आमतौर पर सोयाबीन के रूप में जाना जाता है। इसके पत्ते मवेशियों के लिए बहुत ही स्वादिष्ट आहार हैं। इनमें उच्च पोषण मूल्य और पाचन क्षमता बढ़ाने के गुण मौजूद हैं। सोयाबीन के पत्ते का उपयोग मत्स्य खाद्य सामग्री के रूप में भी किया जा रहा है। इसमें उच्च मात्राा (33प्रतिशत) में प्रोटीन पाया जाता है। अल्फाल्फा मेडिकागो सटीवा एक फूलदार पौधा है, जिसकी खेती महत्वपूर्ण खाद्य फसल के रूप में की जाती है। इसे दक्षिण एशिया में लूसर्न घास के रूप में जाना जाता है। यह पूरे विश्व में व्यापक रूप से उगायी जाती है। इसमें मौजूद प्रोटीन की उच्च मात्रा के कारण यह मवेशियों के लिए खाद्य के रूप में लाभप्रद है। इस पौधे की ताजी और सूखी पत्तियों का उपयोग मत्स्य खाद्य सूत्रीकरण में किया जाता है। यह पारंपरिक सामग्री के साथ-साथ एक पूरक खाद्य सामग्री के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। सेस्बानिया भारत में कम लागत और कृषकीय देखरेख के साथ सेस्बानिया पत्तियों को आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी उच्च कोटि की प्रोटीन एवं अच्छी तथा सरल उपज इसे जलीय कृषि के लिए एक आशाजनक खाद्य सामग्री बना सकती है। यह मछली के भोजन के रूप में प्रयुक्त होने वाले अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की तुलना में बहुत सस्ता है। सेस्बानिया विटामिन और प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। यह विशेषकर तिलापिया प्रजाति की मछलियों के पसंदीदा आहारों में से एक है। कसावा कसावा की पत्तियों में अंडे और सोयाबीन की तुलना में विभिन्न प्रकार के प्रोटीन होते हैं। इसमें बहुत सारे अमीनो अम्ल जैसे आर्जिनिन, लाइसिन, वैलीन, ल्यूसीन और आइसोल्यूसीन होते हैं। औसतन, कसावा की पत्तियों से तैयार आहार में (सूखे पदार्थ के आधार पर) क्रूड प्रोटीन 210 ग्राम/कि.ग्रा., एसिड डिटर्जेंट फाइबर 250 ग्राम/कि.ग्रा., राख 85 ग्राम/कि.ग्रा., कैल्शियम 14.5 ग्राम/कि.ग्रा और फॉस्फोरस 14.5 ग्राम/कि.ग्रा. पाया जाता है। सल्फरयुक्त अमीनो अम्ल की कमी के अलावा, कसावा की पत्ती प्रोटीन से परिपूर्ण होती है। इनमें हाइड्रोसायनिक एसिड और टैनिन जैसे प्रति पोषकीय कारकों का पाया जाना चिंताजनक है। सरल प्रसंस्करण तकनीकों का प्रयोग करके प्रतिपोषकीय कारकों की मात्रा कम करके इनसे भोजन तैयार किया जा सकता है। सारणी 1. स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य सामग्री एवं उनके पोषक तत्व खाद्य सामग्री प्रोटीन (प्रतिशत) वसा (प्रतिशत) फाइबर (प्रतिशत) कार्बोहाइड्रेट (प्रतिशत) सूखे पदार्थ (प्रतिशत) खनिज (प्रतिशत) मक्का (सफेद) 9.3 5.0 2.4 70 88 1.8 मक्का (पीला) 10.8 3.6 3.5 71.2 88 1.9 कपास का केक 40.1 8.3 31.9 12.4 91 5.1 चावल की भूसी 9.9 4.4 40.2 8.7 91 21.8 मूंगफली की खली (औद्योगिक) 48.0 13.2 8.1 18.9 93 6.3 मूंगफली की खली 40.6 23.4 6.0 19.0 93 6.2 सोयाबीन 48.1 23.9 4.1 20.7 90 7.9 शराब की भट्टी का अपशिष्ट 22.8 17.8 18.8 46.4 93 कसावा की पत्तियां 14.7 8.4 15.6 45.2 88 16.1 डकवीड 24.8 12.06 92.3 कैनोला 38 3.8 11.1 91 गेहूं का अनाज 13.5 1.9 3 88 कोकोयाम 25.1 28.56 87.0 लोबिया 16.6 19.0 4.3 40 कसावा(आटा) 1.6 0.5 1.7 83.3 गन्ने का फाइबर 1.3 0.64 0.0 55.4 केला (पूरा) 6.5 1.8 5.3 79.2 केला (पत्ते) 32.6 0.8 17.2 18.38 केला(फल) 4.1 0.6 11.5 24.6 केले के छिलके 7.9 11.6 13.4 14.1 शकरकंद 5.4 0.5 1.0 28.1 शकरकंद के पत्ते 24.7 3.6 11.5 12.5 चावल 7.5 0.5 0.2 79.9 पालक 2.1 0.2 0.8 4.5 मूंगपफली के छिलके 4.0 1.0 46.7 46.3 सारणी-1 में स्थानीय रूप से उपलब्ध वनस्पति आधारित संसाधनों में से कुछ की पोषकीय तत्वों की उपलब्धता को दर्शाया गया है, जिनका मत्स्य खाद्य सामग्री के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसमें उपलब्ध उच्च प्रोटीन के फलस्वरूप अन्य पारंपरिक खाद्य सामग्री पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसे अब एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। वनस्पति स्रोतों के आधार पर यह अध्ययन वर्तमान स्थिति में वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करने में मदद कर सकता है। समुद्री प्रग्रहण मात्स्यिकी अपने चरम पर है और अब हम इससे अधिक मत्स्य संग्रहण नहीं कर सकते हैं। मत्स्य चूर्ण/फिश आहार साधारणतया उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में सबसे अच्छी सामग्री मानी जाती है। इसमें मछली की आवश्यकतानुसार उच्च कोटि के प्रोटीन मौजूद होते हैं। इसकी उच्च लागत एवं उपलब्धता संबंधी विसंगतियों के कारण इसका विकल्प ढूंढ़ने की आवश्यकता है, ऐसा आहार जो आसानी से उपलब्ध हो, लागत भी अपेक्षाकृत कम हो और वनस्पति स्रोतों से पाए जाने वाले प्रोटीन के विकल्प भी हो। खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट के अपेक्षाकृत उच्च स्तर को विकल्पों में शामिल किया जाना चाहिए। इनमें प्रोटीन-स्पेयरिंग क्रिया होती है, जो आहार को अधिक किफायती बनाती है। मत्स्य आहार में वनस्पति आधारित प्रोटीन का परिपूरक के रूप में प्रयोग करने से मत्स्य चूर्ण/फिश आहार पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। इससे मछली के आहार की लागत कम हो सकती है। अध्ययन का उद्देश्य आहार की पौष्टिक गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना फिश आहार की जगह कम महंगे और स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों, मुखय रूप से हरी पत्तियों पर आधारित आहार, का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करना है। मछलियों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए स्थानीय रूप से उपलब्ध कृषि उद्योग के सह उत्पादों का उपयोग करके कम लागत वाले संतुलित आहार का विकास करना आवश्यक है। कई अध्ययनों ने विभिन्न मत्स्य प्रजातियों के लिए आहार में सोयाबीन और अन्य सोयाबीन उत्पादों के साथ फिश आहार को आंशिक रूप से प्रतिस्थापित करने में काफी सफलता पाई है। मत्स्य आहार संसाधनों की कमी को देखते हुए, इसके विकल्प स्वरूप कम लागत किन्तु पौष्टिकता से भरपूर एवं संतुलित आहार की खोज में आज भी कई शोध कार्य प्रगति पर हैं। अब समय आ गया है इस बारे में गहन चिंतन करने और साथ ही पारंपरिक खाद्य उत्पादन पद्धतियों को नवाचारों/नवोत्पादों से प्रतिस्थापित करने का। स्त्राेत : खेती पत्रिका सुस्मिता रानी, भाकृअनुप-केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुंबई-400061(महाराष्ट्र), सुजाता साहू भाकृअनुप-केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कोलकाता केन्द्र, कोलकाता-700091 (पश्चिम बंगाल), पंकज कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र, डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, मांझी, सारण-848125 (बिहार)