प्रस्तावना मछलीपालन के साथ मुर्गीपालन व्यवसाय लाभप्रद है। इस तकनीक के अंतर्गत मुर्गी की पोल्ट्री लीटर (मुर्गीधर के फर्श का विष्ठायुक्त भूसा ) मछलीपालन पोखर में खाद के रूप में डाला जाता है। इस प्रकार के मत्स्यपालन में न तो जलक्षेत्र में कोई अलग से खाद डालने की आवश्यकता पड़ती है, और न ही पूरक आहार देने की। मुर्गी सह मछलीपालन से प्रति हेक्टर प्रतिवर्ष लगभग 2000 स 2500 किलोग्राम मछली 60000 से 72000 तक अण्डे तथा 550-600 किलोग्राम मुर्गी का मांस प्राप्त होता है। मुर्गीपालन संबंधित व्यवस्थाएं मुर्गियों के घर मुर्गियों के लिए घर का इंतजाम तालाब के किनारे भूमि पर या तालाब के अन्दर झोपड़ी बनाकर किया जा सकता है। मुर्गी के धर को आरामदायक गर्मियों में ठण्डा और सर्दियों में गरम रखने की ब्यवस्था होनी चाहिए । मछली सह मुर्गीपालन अंतर्गत मुर्गियों को रखने की आधुनिक सघन प्रणाली अपनाई जाती है। इसमें पक्षियों को मुर्गी के लिए बनाये गए धर के अन्दर ही निरंतर रखा जाता है। इसमें बैटरी सिस्टम (पिंजरों का कतार) की तुलना में डीप लीटर सिस्टम को प्राथमिकता दी जाती है। डीप लीटर सिस्टम में 10 सेटीमीटर ऊंची बारीक किन्तु सूखी धान की भूसी, कुट्टी किया गया धान का पैरा, लकड़ी का बुरादा, गेहूं की भूसी आदि किसी चीज की बिछाई जाती है। यही डीप लीटर है। मुर्गियों का मलमूत्र नीचे बिछाए गए तह पर गिरता है। यदि नीचे का लीटर कुछ गीला सा हो जाता है, तो उसे सूखाने के लिए चूना डाला जाता है तथा उसमें हवा लगती रहे। जरूरत पड़ने पर भूसी आदि भी डाली जाती है। लगभग दो माह में यह डीप लीटर बन जाता है, और 10-12 माह में पूर्णतया विकसित लीटर बन जाती है। जो परिपूर्ण खाद है। मुर्गियों की विष्ठा में 1% नाइट्रोजन होता है तथा निर्मित विकसित लीटर में यह 3% होता है। पोल्ट्री लीटर का मछलीपालन तालाब में खाद के रूप में उपयोग मुर्गी धर से निकाले गए पोल्ट्री लीटर का भंडारण कर लिया जाता है। मछलीपालन हेतु तालाब में इसे प्रतिदिन सुबह 50 किलो प्रति हेक्टर की दर से डाला जाता है। यदि शैवाल पूंज (काई अधिक) होने पर पोल्ट्री लीटर कुछ दिन नहीं डालना चाहिए। 25-30 मुर्गियों से एक वर्ष मे एक मेट्रिक टन पोल्ट्री लीटर बनता है। अतः एक हेक्टर जलक्षेत्र के लिए 500-600 मुर्गियां रखना पर्याप्त होता है। इतने पक्षी 20 मेट्रिक टन (खाद) लीटर देगें। पूर्णतया तैयार लीटर में 3% नाइट्रोजन, 2% फास्फेट और 2% पोटाष रहता है। मुर्गियों का चयन अच्छे पक्षियो में रोड आईलैंड या सफेद लेगहार्न प्रजाति उपयुक्त है। मुर्गी के आठ सप्ताह के चूजों को रोग प्रतिरोधक टीके लगााकर रखा जाता है। प्रति हेक्टर जलक्षेत्र के लिए 500-600 मुर्गी रखना उपयुक्त है। मुर्गियों के लिए आहार मुर्गियों को आयु के अनुरूप संतुलित मुर्गी आहार दिया जाता है। आहार फीड हापर में रखा जाता है, ताकि आहार बेकार न जाए। 9-20 सप्ताह तक "ग्रोअर मेष" 50-70 ग्राम प्रति पक्षि प्रति दिन की दर से और तत्पष्चात् लेयर मेष 80–120 ग्राम प्रतिदिन की दर से आहार दिया जाता है। 1-5 अण्डे देना मुर्गियां 22 सप्ताह बाद अण्डे देना प्रारंभ कर देती हैं। मुर्गियों को 18 माह तक अण्डे की प्राप्ति हेतु रखना चाहिए। मछलीपालन हेतु व्यवस्थाएं तालाब का चयन तालाब बारहमासी कम से कम 2 मीटर गहरे तथा ताल में पानी भरने के लिए जलश्रोत हो, एसे तालाब का चयन करना चाहिए। जलीय वनस्पति का उन्मूलन तालाब से जलीय वनस्पति को निकलवा देना चाहिए। अनचाही एवं मांसभक्षी मछलियां अनचाही एवं मांसभक्षी मछलियों को मत्स्यबीज संचयन के पूर्व तालाब से निकलवा देना चाहिए। इन्हें निकालने हेतु बार-बार जाल चलाकर निकाल सकते हैं, इन्हें निकालने हेतु 2500 किलो ग्राम प्रति हेक्टर महुआ खली का उपयोग किया जा सकता है। चूने का प्रयोग एक हेक्टर जलक्षेत्र में 250-350 किलोग्राम चूना डालना चाहिए। मत्स्य बीज संचयन मछली सह मुर्गीपालन के लिए तालाब में प्रति हेक्टर 5000 अंगुलिकाएं प्रति हेक्टर की दर से संचय करना चाहिए। मछली की वृद्धि समय-समय पर प्रतिमाह जाल चलाकर इनकी वृद्धि एवं बीमारी का पता लगाते रहें। बीमारी की जानकारी होने की दशा में उचित उपचार करें। मत्स्य उत्पादन एक हेक्टर जलक्षेत्र के पोखर से प्रतिवर्ष 2500 से 3000 किलोग्राम मत्स्य उत्पादन लिया जा सकता है। एकीकृत मछली सह मुर्गीपालन से लाभ मछली सह मुर्गीपालन से मछली अण्डे एवं मांस प्राप्ति से अधिक आय होती है। तालाब में मछलियों के लिए अतिरिक्त खाद देने की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि मुर्गियों द्वारा त्यागे गए लीटर से इसकी पूर्ति हो जाती है। मछली सह मुर्गी पालन की आर्थिक 0.5 हेक्टर जलक्षेत्र मद मात्रा स.क्र. मद मात्रा दर राशि आवर्ती व्यय 1 तालाब पट्टा रू.1000/-प्रति हेक्टर 500.00 २. महुआ खली 1250 किलोग्राम रू.250/- क्विंटल 3150.00 3 मत्स्य अंगुलिकाएं 2500 रू.400/- प्रतिहजार 1000 आठ सप्ताह आयु के चूज 275 रू.8/- प्रति नग 2200.00 आहार 9175 रू.2.50 प्रतिकिलो 22937.00 अन्य आकस्मिक व्यय 1000.00 अ कुल आवर्ती व्यय 30,787.00 ब कु बैंक की किस्त व्याज 12% रू. 4541 + रू.3814 8355.00 स मुर्गीघर निर्माण (एकबार) 10,000.00 क कुल व्यय (अ+ब+स) 49,142.00 ख सकल आय 1 मछली विक्रय किलोग्राम 1250 रू.30/- प्रति किलोग्राम 37500.00 2 अंडा विक्रय 35000 अण्डे रू.100/- प्रति सैकड़ा । 35000.00 3 मुर्गी 625 किलोग्राम रू.45/- प्रति किलोग्राम 28125.00 ख योग सकल आय(1+2+3) 100625.00 ग शुद्ध आय (ख-क)रू.. रू.100625-49142रू. 51483 51483 नोट:- आधा हे0 जलक्षेत्र में मछली सह मुर्गी पालन से प्रथम वर्ष लगभग रू0 51000 तथा अगले वर्ष से प्रति वर्ष रू0 61,000/- आय अनुमानित है क्यों कि अगले वर्ष मुर्गी घर का निमार्ण नहीं करना पड़ेगा। स्त्राेत : मत्स्य पालन विभाग, मध्यप्रदेश शासन।