परिचय नर्सरी तालाब में स्पान से फ्राई का उत्पादन पंगेसियस मत्स्य पालन का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है | अत: इसका उचित प्रबंधन आर्थिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है | स्पान के संचयन से पहले पानी को पूर्णत: निकालकर तालाब को सूरज की रोशनी में छोड़ दिया जाता है ताकि मिटटी पूरी तरह से सूख जाए | तालाबों में जहां सालों भर पानी रहता है, जल की निकासी संभव नहीं है वहां जल के खर-पतवार के हाथ से चुनकर या जाल चलाकर हटा देना चाहिए | सतह पर तैरने वाले जलीय पौधों के 2, 4-D नामक रसायन का प्रयोग का उन्मूलन किया जा सकता है, इसके लिए 3-4 किलोग्राम/ एकड़ / की दर से प्रयोग कर सकते हैं | अधिक जलीय शैवाल का होना भी अच्छा नहीं माना जाता है | जलीय शैवालों के समूह के उन्मूलन के लिए सीमाजाईन का प्रयोग 1-2 किलोग्राम / एकड़ की दर से किया जाना चाहिए | तालाबों में अवांछित मछलियों का उन्मूलन आवश्यक है | खाऊ मछलियाँ, मछलियों के जीरों को खा जाती है जबकि अन्य छोटी जंगली मछलियाँ लाताब में उपस्थित अधिकांश भोजन को हड़प जाती है | संचयन के पूर्व इनका उन्मूलन करना अति आवश्यक है – रसायन मात्रा पानी में जहर की असर ब्लीचिंग पाउडर (30 प्रति० क्लोरिन) 120-140 किलोग्राम/एकड़/मी. 7-8 दिन महुआ खल्ली 1000 किलोग्राम/एकड़/मी. 20-25 दिन डेरीस रूट पाउडर 60-70 किलोग्राम/एकड़/मी. 25-30 दिन तालाबों में संचयन के पहले हानिकारक जलीय कीटों का उन्मूलन कर लेना आवश्यक है | बार-बार जाल चलाकर इन्हे हटा लेना चाहिए | इसके अलावा डीजल या कैरोसिन तेल 20-25 लीटर/ एकड़ की दर से प्रयोग करना चाहिए | आजकल नुभान का प्रयोग 70-100 मी.ली. प्रति एकड़ की दर से उपयोग कर कीटों का उन्मूलन कर लेते हैं | तालाब में चूना का प्रयोग (200 किलोग्राम/एकड़) की दर से करना चाहिए | चूना के प्रयोग के एक सप्ताह बाद प्लवक का उत्पादन के लिए कार्बनिक खाद (गोबर) के साथ-साथ रासायनिक खाद के रूप में यूरिया एवं एस०एस०पी० या डी०एस०पी० एवं म्यूरेट आफ पोटाश का प्रयोग करना चाहिए | खाद मात्रा/प्रति एकड़ में यूरिया 10 किलोग्राम एस०एस०पी० 10 किलोग्राम पोटास 1-2 किलोग्राम कच्चा गोबर 2000 किलोग्राम पंगेसियस प्राम्भिक अवस्था में स्वजन भक्षी होता है | अत: इसकी रोकथाम के लिए तालाब में जन्तु प्लवक का समुचित स्तर बरकरार रखना बहुत ही आवशयक है | इसके अतिरिक्त पाउडर फीड के रूप में कृत्रिम आहार बाहर से देते रहना चाहिए | नर्सरी तालाब के 50 लीटर पानी में प्लवक की मात्रा कम से कम 4 मी.ली. होना अच्छा माना जाता है | नर्सरी तालाब में स्पान को 400-500/वर्ग मी.की दर संचयन करना चाहिए | चार सप्ताह के उपरान्त इसका आकार 0.8-1.0 ग्राम हो जाता है | इसके बाद इन्हें बड़े नर्सरी तालाब में संचयन करना चाहिए | अगले दो महीने में पंगास 15-20 ग्राम वजन प्राप्त कर लेती है, जो बड़े तालाबों में संचयन हेतु उत्तम आकर है| संचयन तालाब प्रबंधन पंगेसियस की अंगुलिकाओं को स्थानांतरण के 1 दिन पहले किसी भी प्रकार का कृत्रिम भोजन नहीं दिया जाना चाहिए ताकि सथानान्तरण के समय ज्यादा मल-मूत्र त्याग न करें तथा आक्सीजन की मात्रा ज्यादा कम न हो | तालाबों में पंगेसियस का पालन दो विधि द्वारा किया जाता है – 1) एकल पालन – 10-15 ग्राम की अंगुलिकाओं का संचयन 10000-20000/प्रति हेक्टेयर के दर से कर सकते हैं जिससे 15-20 टन/हे. उत्पादन लिया जा सकता है | 2) मिश्रित पालन – जब कार्प या अन्य प्रजातियों के साथ पंगेसियस का पालन किया जाता है तो इसकी संचयन दर 10000/ हे. से ज्यादा नहीं रखी जाती है | इस विधि में 10-12 टन/हे. उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है | संचयन तालाब का आकार से अधिक 5 एकड़ एवं पानी की गहराई 1.5 मी. तक रखना ठीक है | चूना का प्रयोग 200 किग्रा/ एकड़ संचयन के पूर्ण करना चाहिए | जैविक खाद के रूप में गोबर या मुर्गी का खाद 1000 किग्रा/ एकड़ को 10 भागों में बाँट कर संचयन काल के दौरान प्रयोग करते रहना चाहिए | स्त्रोत: मत्स्य निदेशालय, झारखण्ड सरकार