परिचय महाझींगा एक सुस्वादु, पौष्टिक आहार के रूप में उपयोग में आने वाला जलीय प्राणी है | यह मछली की प्रजाति न होते हुए भी जल में रहने के कारण सामान्य बोल चाल में मछली ही समझा जाता है | इसका उप्तादन पूर्व में खारे पानी में (समुद्र) में ही संभव था | परन्तु वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम से अब मीठे पानी (तालाब) में भी इसका पालन किया जा रहा है | महाझींगा का पालन अकेले अथवा अन्य मछलियों (रेहू, कतला, मृगल ) के साथ किया जा सकता है | चूँकि महाझिंगा नीचे स्तर पर रहने वाला प्राणी है अत: इसके तालाब में कॉमन कार्प या मृगल का संचयन कम मात्रा में करना चाहिये | मटियाही या दोमट मिटटी वाले एक एकड़ या इससे छोटे तालाब मजाझिंगा पालने के लिए उपयुक्त है | कैसे करें तैयारी तालाब की तैयारी – महाझींगा के बीज संचयन करने के पूर्व तालाब की सफाई करवा लेना चाहिये ताकि उसमें किसी प्रकार की खाऊ मछली या हानिकारक कीड़े इत्यादि नहीं रहें | तत्पश्चात मिश्रित मत्स्य पालन के पूर्व जिस प्रकार तालाब की तैयारी की जाती है उसी प्रकार से तालाब की तैयारी कर लेनी चाहिये | उक्त मछली को छिपने के लिए बांस, झाड़, पुराने टायर इत्यादि तालाब में डालना चाहिये | बीज प्राप्ति की श्रोत : महाझींगा के बीज का उत्पादन समुद्र के पानी में ही होता है अत: इसका बीज पं.बंगाल एवं उड़ीसा के समुद्र –तटीय क्षेत्रों में बने हैचरीयों से क्रय किया जा सकता है | मत्स्य बीज संचयन : केवल महाझींगा पालन तकनीक में 20,000 (बीस हजार) झींगा के बीज प्रति एकड़ के दर से संचयन किया जा सकता है जबकि अन्य मछलियों के साथ इसका पचास प्रतिशत यानि 10,000 (दस हजार) झींगा बीज का संचयन प्रति एकड़ किया जा सकता है | इसके संचयन के लिए उपयुक्त समय अप्रैल माह से जुलाई तक का है | महाझींगा बीज को तालाब में छोड़ने से पहले इसके पैकेट को जिस तालाब में संचयन करना है उसमें कुछ देर रख दिया जाता है ताकि पैकेट के पानी और तालाब के पानी का तापमान एक हो जाये तत्पश्चात ही संचयन हेतु बीज पाने में छोड़ा जाता है | भोजन – जिस जगह पर झींगा बीज को संचयन हेतु छोड़ा जाता है उसी स्थान पर प्रथम 15 दिनों तक उन्हें भोजन के रूप में सूजी, मैदा, अंडा को एक साथ मिलाकर गोला बनाकर दिया जाता है | उक्त भोजन सुबह और शाम के समय एक ही स्थान पर प्रतिदिन दिया जाता है | 15 दिनों के पश्चात नवजात झींगा मछली सामान्यत: अन्य मछलियों को दिया जाता है वही इनका भी भोजन होता है | झींगा पालन में इन्हें ऊपर से पूरक आहार का दिया जाना अति आवश्यक है | अन्यथा भोजन के अभाव में ये आसपास में ही कमजोर झींगा को अपना भोजन बना लेती हैं | वृद्धि – यदि अनुकूल परिस्थिति मिला तो महाझींगा प्राय: छ: माह में लगभग 100 ग्राम का हो जाता है | झींगा की वृद्धि के जाँच के लिए समय समय पर जाल चलाकर वृद्धि की जांच करनी चाहिये | शिकारमाही – जब झींगा पूर्ण रूपेण बड़ा हो जाए तो समय-समय पर इसकी निकासी पर बेचा जा सकता है | 40-50 ग्राम का महाझींगा बिक्री के योग्य माना जाता है | बीच-बीच में बड़े झींगा को निकालते रहना चाहिये जिससे छोटे झींगा को बढाने का अवसर मिलता रहे यह प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है | खुले बाजार में इसका मूल्य इसके वजन के अनुसार 350/- से 400/- रू प्रतिकिलो प्राप्त हो जाता है | अधिक जानकारी एवं महाझींगा के बीज हेतु सहायक मत्स्य निदेशक अनुसंधान, शालीमार मत्स्य प्रक्षेत्र सेक्टर 2 धुर्वा रांची से संपर्क किया जा सकता है, जिनका दूरभाष नं. 0651-2440885 है | स्त्रोत: मत्स्य निदेशालय, राँची, झारखण्ड सरकार