<p style="text-align: justify;">फलों व सब्जियों की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए तुड़ाई, भंडारण व परिरक्षण यानी प्रिजर्व करने की नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। फलों व सब्जियों में पानी की अधिक मात्रा होने के कारण वे तुड़ाई के बाद शीघ्र खराब हो जाते हैं। इसी क्रम में खेत में कम लागत से बने सौर ऊर्जाचालित शीत भंडारण कक्ष कृषकों के लिए महत्वपूर्ण तथा मूल्यवान समाधान हो सकते हैं। फल और सब्जियां कटाई के तुरंत बाद खराब होने लगती हैं। इन्हें खराब होने से बचाने के लिए इनको कोल्ड स्टोर में भंडारित किया जाना चाहिए। मुख्य रूप से सब्जियों की खेती छोटे और मध्यम किसानों द्वारा की जाती है। उनके लिए विशेष कोल्ड स्टोरेज तैयार करना महंगा है। इस समस्या को सुलझाने के लिए भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने पूसा-फार्म सनफ्रिज (पूसा-एफएसएफ) की सिफारिश की है।</p> <p style="text-align: justify;">हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों में विविध एकिस्मों के फलों और सब्जियों को उगाया जाता है। ये मानव संतुलित आहार का एक अभिन्न अंग हैं। आहार एवं पोषण विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार के लिए वयस्क महिला व पुरुष को प्रतिदिन 100 ग्राम फल का सेवन करना चाहिए। इन्हें रक्षात्मक खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा गया है। इनके लगातार उपभोग से कई जटिल रोगों से बचा जा सकता है। धान्य व दलहनी फसलों की अपेक्षा फल बहुत जल्दी खराब होते हैं। उनका गठन मुलायम व श्वसन क्रिया अधिक होने के अतिरिक्त इनकी ढुलाई एवं भंडारण के दौरान सूक्ष्मजीव प्रभावित करते हैं। ये कई रोगों का कारण बन जाते हैं। ऐसा अनुमान है कि फल उत्पादन का लगभग 30-40 प्रतिशत हिस्सा तुड़ाई उपरांत कुप्रबंधन के कारण क्षतिग्रस्त हो जाता है।</p> <h3>सफलता गाथा</h3> <p style="text-align: justify;">पूसा-फार्म सनफ्रिज (पूसा-एफएसएफ)-एक ऑफ-ग्रिड, बैटरीरहित, ग्रीन-एनर्जी (सौर-प्रशीतित) कोल्ड स्टोरेज, पूसा संस्थान, नई दिल्ली के कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इस तरह की सौर-प्रशीतित संरचना राजस्थान में मार्च 2020 के बाद से अजमेर के गांव पिचोलिया में बनाई गई है। कृषक समूह 'कृषक विकास संस्थान' की सहभागिता से इसका संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहाहै। यह नवीन कोल्ड स्टोरेज (2000 कि.ग्रा. उत्पादन क्षमता) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध कार्य का परिणाम है। शोध में भारत (भारतीयकृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक) और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (संयुक्त राज्य अमेरिका) के डा. आर. बौड्री और डा. नोरबर्ट म्यूएलर, संयुक्त राज्य अमेरिका के विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा, यूएसएआईडी के राष्ट्रीय अकादमियों द्वारा अनुदान के तहत यह परियोजना कार्यान्वित है। ग्राम पिचोलिया में पूसा-एफएसएफ का उपयोग कृषि समुदाय द्वारा प्रसंस्करित उपज जैसे-टमाटर, फूलगोभी, धनिया, आलू जैसी सब्जियों, फलों तथा फूल एवं मूल्यवर्धित उत्पाद (टमाटर प्यूरी) के साथ-साथ अंडे व पशु उत्पादों के भंडारण के लिए किया जाता है। सौर ऊर्जाचालित इस संयंत्र द्वारा बिजली की समस्या से जूझ रहे किसानों को सबसे अधिक राहत मिल सकती है। इसके भीतर निम्न तापमान और उच्च सापेक्ष आर्द्रता के कारण कृषि उत्पादों को लंबी अवधि तक ताजा बनाए रखने के साथ-साथ उत्पाद की निधानी आयु बढ़ाकर सुरक्षित रख सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">फल व सब्जियों का फसलोत्तर प्रबंधन आज हमारी जरूरत है, ताकि विश्व और विशेष रूप से भारत की बढ़ती आबादी को पौष्टिक भोजन मिलता रहे। यदि कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखा जाए तथा कुछ साधारण क्रियाएं अपनाई जाएं, तो फलों के काफी बड़े हिस्से को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। इससे न केवल किसान को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने का एक अच्छा प्रयास होगा।</p> <p style="text-align: justify;">फसल कटाई के बाद इसकी गुणवत्ता को सुधारना असंभव होता है। फल एवं सब्जियों में नमी की मात्रा अधिक होती है, जिससे स्वाभाविक रूप से ये अपेक्षाकृत जल्द खराब हो जाते हैं। कटाई उपरांत ये जैविक रूप से भी अधिक सक्रिय होते हैं। इनकी श्वसन क्रिया चलती रहती है, जिससे ये पकना शुरू कर देते हैं। इनमें कई जैव रासायनिक क्रियाएं उत्पन्न होती हैं, जो इनकी गुणवत्ता पर प्रतिकल असर डालती हैं। फसलोत्तर गुणवत्ता पर कर्षण प्रक्रियाएं भी असर डाल सकती हैं तथा मशीनी क्षति जैसे-रगड़ लगना, छीलना , टूट जाना आदि के प्रति विशेष रूप से यह संवेदनशील है। कटाई के लिए परिपक्वता के सही चरण का चयन ऐसा महत्वपूर्ण पहलू है, जिसका भंडारण जीवन एवं गुणवत्ता पर पर्याप्त प्रभाव पड़ता है। फल एवं सब्जियों की कटाई के बाद की गुणवत्ता, इसके भंडारण एवं इनकी परिपक्वता के चरण पर निर्भर करती है।</p> <p style="text-align: justify;">भारत में फलों और सब्जियों की कटाई उपरांत हानि 25 से 30 प्रतिशत मुख्य रूप से पर्याप्त शीत भंडारण के अभाव और शीत आपूर्ति श्रृंखला की कमी के कारण है। बड़े कोल्ड स्टोरेज में एक बड़ा प्रारंभिक पूंजी निवेश शामिल होता है। निर्बाध विद्युत ग्रिड आपूर्ति की आवश्यकता होती है, जो कि कई लघु व सीमांत कृषक समुदायों के पास आसानी से उपलब्ध नहीं है। यह अनुमान है कि भारत में उत्पादित फल और सब्जियों का केवल 10-11 प्रतिशत कोल्ड स्टोरेज और भंडारण में रखा जाता है। अपव्यय से बचाने के लिए इस क्षमता को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की आवश्यकता है। किसानों पर फलों और सब्जियों को तुरंत बाजार ले जाकर बेचने और गुणवत्ता खराब होने का नियमित दबाव बना रहता है। इस नए कोल्ड स्टोरेज के उपयोग से किसान उत्तम गुणवत्ता की भंडारण सुविधाओं का लाभ छोटे स्तर पर अपनी आवश्यकतानुसार उठा सकेंगे।</p> <p style="text-align: justify;">पसा-एफएसएफ जैसी संरचनाओं में भारत में 9 करोड छोटे किसानों को लाभान्वित करने की क्षमता है। ये संरचनाएं स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों से किसानों द्वारा स्व-निर्मित की जाती हैं और शीतलन के लिए बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता नहीं होती है। पूसा- एफ एसएफ में अभिनव (नवोन्मेषी) डिजाइन विशेषताएं हैं जैसे इनवर्टर-सोलर रेफ्रिजिरेटर यूनिट में एक स्पिल्ड इवेपोरेटर कॉयल है। रात में ठंडा करने के लिए पानी की बैटरी और एक सेंस-कंट्रोल सिस्टम है, जो उपलब्ध अल्ट्रा वायलेट किरणों के साथ रेफ्रिजिरेशन सिस्टम की ऊर्जा आवश्यकता को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है। इस यूनिट (1.5 टन क्षमता के प्रशीतन कक्ष) के निर्माण के लिए 3x3x3 मीटर आकार की संरचना शृंखला के समानांतर सर्किट में 14 सौर पैनलों/350 वॉट प्रत्येक पैनल (बिजली के लिए) का उपयोग किया जाता है और शीतलन के लिए ग्रिड की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस संयंत्र में मेश जाल और गीले कपड़े की दीवारों के साथ कम लागत वाली स्टाइलो फोम पैनल से इंसुलेशन किया गया है। वाष्पीकरणीय शीतलन और सौर प्रशीतन के संयुक्त प्रभावों के माध्यम से संरचना में शीत बरकरार रहती है। इसमें उचित नमी बनाए रखने के लिए दीवारों को गीला रखा जाना चाहिए। अनुमानत: पूसा-एफएसएफ में दिन का तापमान लगभग 5-10 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम हो सकता है, जब दैनिक परिवेश का अधिकतम तापमान लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। पिचोलिया ग्राम में निर्मित पूसा-एफएसएफ में एचओबीओ रिमोट स्टेशन डेटा एकत्र करता है और इसे क्लाउड पर सार्वजनिक रूप से देखा जा सकता है। ग्राम पिचोलिया, राजस्थान के एक किसान श्री त्रिलोक देवसी, पिचोलिया में पूसा-एफएसएफ संयंत्र में अपनी पुष्प व बागवानी फसलों को भंडारित कर लाभ ले रहे हैं। वैज्ञानिक तथा ग्रामीण सहभागिता संयोजित शोध व इस ट्रायल रन में गेंदे के फूल रखे गए थे, जो कि बाहर अधिक तापमान होते हुए भी शीतलन कक्ष में ताजे थे। इस वर्ष कोविड काल जैसी आपात स्थिति में, किसानों ने मार्च 2020 में लगभग 8000 अंडे और अप्रैल 2020 में 800 कि.ग्रा. टमाटर और 5000 अंडे संग्रहित किए। यह सुविधा छोटे किसानों को बिना बिजली उपलब्धता के भी कोल्ड स्टोरेज तक सस्ती पहुंच प्रदान करती है। अभी यह सुविधा परियोजना के दो अंगीकृत गांव पिचोलिया, राजस्थान तथा चमरारा, पानीपत, हरियाणा में किसानों को बेहतर आमदनी के साथ-साथ अपनी फसलों के विपणन में भी लाभान्वित कर रही है। दिल्ली में भी निकट भविष्य में उपलब्ध करवाने का प्रयास जारी है। इसमें रखी गई कृषि सामग्री ताजा रहती है. जिसके कारण इसे बाद में आकर्षक कीमतों पर बेचा जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong>(भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली,मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका)</strong></p>