सब्जियों का उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने में विषाणुजनित (वायरस) रोग प्रमुख बाधा हैं। इसलिए इनके बारे में विस्तृत जानकारी तथा इनका सफल प्रबंधन भारत में सब्जी उत्पादन के लिए अति आवश्यक है। इस अध्याय में हम सब्जियों के प्रमुख रोग, उनके कारक विषाणु, लक्षण, उनके प्रसारक तथा प्रभावी प्रबंधन के बारे में चर्चा कर रहे हैं। सब्जियां हमारे आहार का प्रमुख हिस्सा हैं। ये हमें आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं जैसे कि खनिज तत्व एवं विटामिन। इसके अलावा ये हमें स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और औषधीय गुणों से भी भरपूर होती हैं। सब्जियों के उत्पादन में वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होता है, क्योंकि ये आय और रोजगार की बहुत अच्छी स्रोत हैं। भारत में 2017-2018 में 10.26 मिलियन हैक्टर क्षेत्रा से सब्जियों का उत्पादन 184.40 मिलियन टन आंक गया। आगे हम चर्चा कर रहे हैं विभिन्न सब्जियों के प्रमुख रोगों एवं कीटों की, जिनकी वजह से सब्जी फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है। टमाटर सोलेनम लाइकोपर्सिकम, फैमिलीः सोलेनेसी टोस्पो वायरस रोगकारक विषाणु-ग्राउंडनट बडनेक्रोसिस वायरस, समूहः टोस्पो वायरस टोस्पो वायरस लक्षण भारत में ग्राउंडनट बडनेक्रोसिस वायरस को टमाटर की खेती के लिए गंभीर क्षति के एक कारण के रूप में जाना जाता है। वायरस के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 7 से 20 दिनों बाद दिखाई देते हैं। पत्तियों की ऊपरी सतह पर कांसे के रंग के छोटे धब्बे विकसित होते हैं और पूरे पत्ते पर फैल जाते हैं। पुरानी पत्तियों पर ये आमतौर पर कांसे के रंग के धब्बे या छल्ले के रूप में नसों के बीच में बनते हैं। ये धब्बे बढ़ सकते हैं और एक साथ जुड़ सकते हैं। जैसे ही रोग विकसित होता है, प्रभावित ऊतक काला हो जाता है। भूरे-काले रंग की धारियां तने और पत्ती के डंठल पर भी दिखाई दे सकती हैं। कुछ दिनों में तेजी से बढ़ रहे पौधे मर जाते हैं। पुराने पौधों में रोग पूरी तरह से विकसित होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। प्रभावित पौधों के पके हुए फलों पर अक्सरअक्सर अनियमित या वृत्ताकार छल्ले दिखाई देते हैं। प्रसारण यह वायरस, थ्रिप्स की कई प्रजातियों द्वारा फैलता है। टोमेटो मोजेक वायरस राेगकारक विषाणुः टोमेटो मोजेक वायरस, समूहः टोबेमो वायरस लक्षण पत्तियों पर हल्के और गहरे हरे रंग के धब्बेदार क्षेत्रा दिखाई देते हैं। यह रोग आमतौर पर नए पत्तों की नसों के बीच हल्के हरे रंग से शुरू होता है और बाद में मोजेक पैटर्न में परिवर्तित हो जाता है। अन्य लक्षणाें में पाैधाें के विकास का रुकना और पफल विकृति शामिल हैं। कटे हुए टमाटर के अंदरूनी हिस्से में भूरे रंग के क्षेत्र बन जाते हैं। प्रसारण यह वायरस संक्रमित बीज के बाहरी आवरण में होता है। यह यांत्रिक रूप से दूषित बागवानी उपकरण, बर्तन या प्लांटर्स से भी प्रसारित होता है। संक्रमण का एक सामान्य तरीका संक्रमित पौधों के जमीन में गड़े हुए मलबे द्वारा भी है। लीफ कर्ल वायरस राेग कारक विषाणु टाेमटे लीपफ कर्ल वायरस, समूहः बिगोमोवायरस/जेमिनीवायरस लक्षण इस रोग के कारण पत्तियों पर हल्के पीले रंग के मोजेक के साथ-साथ पत्तियों में विकृति या कर्लिंग दिखाई देती हैं। छोटे तथा बड़े पौधे वायरस से संक्रमित होने पर गंभीर रूप से प्रभावित हो जाते हैं। पत्तियां आकार में कम हो जाती हैं। नई पत्तियां नीचे की ओर मुड़ने लगती हैं तथा बाद में आने वाली पत्तियां सीधी तथा उनके किनारे ऊपर की ओर मुड़ जाते हैं। वयस्क अवस्था में संक्रमित पौधों की बढ़त रुक जाती है और उनके फूलों का फलों में रूपांतरण होना समाप्त हो जाता है। प्रसारण यह वायरस सफेद मक्खी (बेमिसिया तबेसी) द्वारा फैलता है। कुकुम्बर मोजेक वायरस रोगकारक विषाणुः कुकुम्बर मोजेक वायरस, समूहः कुकुमो वायरस लक्षण इस वायरस के कारण सक्रंमित पाैधाें पत्तों पर मोजेक तथा फलों पर मोर्टेलिंग के लक्षण दिखते हैं। नई पत्तियां बहुत संकीर्ण आरै मुड़ी हुई हो जाती हैं और कभी-कभी धागे के सामान पतली दिखती हैं। पौधों की बढ़त रुक जाती है। इस वायरस के लक्षण टीएमवी से बाधित पौधों से बहुत मिलते-जुलते हैं। प्रसारण यह वायरस एफिड की कई प्रजातियों द्वारा फैलता है। तरबूज सिट्रुलुस लेनटेनस, फैमिली: कुकुर बिटेसी वाॅटरमेलन बड नेक्रोसिस वायरस रोगकारक विषाणुः वाॅटरमेलन बड नेक्रोसिस वायरस, समूहः टोस्पो वायरस लक्षण संक्रमित पौधों की पत्तियों पर मोटिंलग, सिलवट, पीलापन तथा हल्की पीली गोलाकार रिंग दिखाई देती हैं, जो बाद में भूरे रंग की हो जाती हैं। बेलों/टहनियों पर भूरे रंग (नेक्रोटिक) की धारियां दिखाई देती हैं। तने की दो गांठों के बीच का भाग का छोटा होना, बेलों का सीधा होना तथा नई कलियों का भूरा होना और मरना इस वायरस के अन्य लक्षण हैं। जैसे-जैसे फूल बढ़ता है, तना नीचे की ओर से सूखना शुरू हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर पौधे मर जाते हैं। रोग की संक्रामकता अधिकतर गरम तथा सूखे मौसम में ज्यादा होती है, क्याेंकि तब इस राेग के प्रसारक कीट थ्रिप्स की संख्या तेजी से बढ़ती है। संक्रमित पौधों के फलों पर हल्के पीले रंग के छल्ले दिखाई देते हैं, जो बाद में नेक्रोटिक (भूरे) बन जाते हैं। प्रसारण यह वायरस थ्रिप्स वेक्टर द्वारा प्रसारित होता है। स्त्राेत: सावर्णि त्रिपाठी, अभिषेक वर्मा और राज वर्मा भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-