आस्था, नांदेड़ जिला, महाराष्ट्र क्षेत्र स्वच्छता का ध्यान रखें व घास पात हटाते रहें। एक ही किस्म की अनुमोदित संकर प्रजाति और संकालित संशोधित बीज का प्रयोग करें (imidacloprid @7 ग्राम / किलो बीज) परभक्षियो व परजीवीयों के संरक्षण के लिए किनारों पर मक्का और लोबिया का रोपण करें। पक्षी बसेरा के रूप में कपास की हर 9 पंक्ति के बाद सेटारिया स्पीशीज़ का रोपण करें। अमेरिकन सुंडी से बचाव के लिए फेरोमोन जाल (1 / 10 @ हेक्टेयर) की स्थापना करें। उचित समय पर ट्राईकोग्राम्मा किलोन्सिस के अंडे बौलवर्म द्वारा दिये अण्डे के समकालीन रिलीज करें। ट्राईकोग्राम्मा या एनएसकेई (NSKE) 5% के दूसरे छिड़काव के बाद HaNPV का 250 LE / हेक्टेयर दर से छिड़काव करें आवश्यकता के अनुसार पर्यावरण अनुकूल कीटनाशकों / फफूँदनाशी छिड़काव करें पानीहारी, सिरसा जिला, हरियाणा H 1098 किस्म की बुवाई नीम बीज पाउडर सत्त का 12.5 किलो प्रति हेक्टेयर दर से + ब्युवेरिया बससियाना (Beauveria bassiana) का 1.25 किलो प्रति हेक्टेयर दर से उपयोग करें। अल्फामेथरिन (Alphamethrin) 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर + कांफिडर 100 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें। नीम बीज पाउडर सत्त का 12.5 किलो प्रति हेक्टेयर दर से उपयोग करें। किनुयाफॉस (Quinalphos) 2.250 लीटर / हेक्टेयर दर से उपयोग करें। मनसा, पंजाब अगेती, लघु अवधि, CLCV और 327 LD, 1556 LH, 651 अंकुर, गंगा कावेरी 151 और व्हाइटगोल्ड (Whitegold) जैसे कीटों के प्रति प्रभावशून्य। सीडा, अबूटीलोन, धतूरा, ऐज़रेटम (Abutilon, Dhatura, Ageratum) और अन्य खरपतवार जो कपास की फसल के आसपास है नष्ट कर दिये जायें। कपास के खेतों और खेतों के आसपास भिन्डी, अरहर और मूंग न बोयें। गहरी जुताई, अच्छी सिंचाई करें, मृदा जांच के आधार पर अनुग्रहित देसी किस्मों के लिए 30 किलो ग्राम प्रति एकड़, संकर प्रजाति के लिए 60 किलो ग्राम प्रति एकड़ नाइट्रोजन, 12 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से पॉटेशियम ऑक्साइड का प्रयोग करें। 15 से 17 मई के दौरान बोनें वाली अमेरिकन देसी प्रजाति कपास के लिए 4 किलोग्राम प्रति एकड़, एर्बोरियम कपास के लिए 3 किलोग्राम प्रति एकड़, संकर प्रजाति कपास के लिए 1 से 5 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज प्रयोग करें। रोपाई के समय लाइन से लाइन की दूरी 67.5 सेंटीमीटर और पोधों से पोधों के बीच की दूरी 45 सेन्टीमीटर और देसी एवं संकर प्रजाति के लिए क्रमश: 67.5*75 सेन्टीमीटर निर्धारित करें। रोपाई के एक माह पश्चात सिंचाई करें, तत्पश्चात हाथ से विरलें। ट्रक्टर से नराई करें। सप्ताह में दो बार नियमित रूप से कीट पतंगों की निगरानी करें। आवश्यकता के अनुसार कांफिदोर 200 एस एल 100 मिलीलीटर , असतामिप्रिड 20 एस पी 50 ग्राम, ठिओमेथोक्षम 25 डब्ल्यू जी 100 गें प्रति हेक्टेयर की दर से तेला व चेपा जैसे नाशीजीवों के लिए प्रयोग करें। स्त्रोत: राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन अनुसंधान केंद्र, नई दिल्ली