पॉलीहाउस में खेती एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें सब्जी व फूल उत्पादन के लिए उपयुक्त एवं नियंत्रित वातावरण बनाया जाता है। इसमें किसान बेमौसमी सब्जियों व फूलों का उत्पादन कर सकते हैं, जबकि खुले खेतों में मौसम के अनुसार ही किसान खेती कर पाते हैं। बेमौसमी सब्जी उत्पादन होने से जहां किसान को अधिक लाभ होता है, वहीं लोगों को बेमौसमी हरी ताजा सब्जियां खाने को मिल जाती हैं। पॉलीहाउस एक संरक्षित व फ्रेमयुक्त संरचना होती है। यह स्टेब्लाइज्ड कम सघनता वाले पॉलीथीन अथवा पारदर्शी प्लास्टिक फिल्म और कीटरोधी नेट से ढकी होती है। इसके अंदर फसलों को नियंत्रित वातावरण में उगाया जा सकता है। गर्मी के मौसम में पॉलीहाउस को ठंडा करने के लिए दोनों तरफ से पर्दे को उठा दिया जाता है। फव्वारा व ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर उसे मौसम के अनुकूल बना दिया जाता है, जबकि ठंड के दिनों में पर्दा गिरा दिया जाता है। इससे पॉलीहाउस के अंदर तापमान बढ़ जाता है। इस प्रकार किसान बमेासैमी सब्जियों व फूलों की खेती कर सकते हैं। इसके साथ ही तापमान नियंत्रण आर्द्रता के साथ-साथ कार्बनडाइऑक्साइड, मृदा तापमान, पादप पोषक तत्व आदि को नियंत्रित किया जाता है, ताकि वांछित सब्जी फसलों का वर्षभर उत्पादन लिया जा सके। नियंत्रित जलवायु और मृदा परिस्थितियों से पॉलीहाउस में उगायी गयी सब्जी एवं फूलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। पॉलीहाउस के लिए सरकार द्वारा अनुदान पॉलीहाउस बनाने के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर जमीन चाहिए। 2000 वगर्मीटर तक पॉलीहाउस बनाने के लिए जिला उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों को कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान सरकार देती है, वहीं नेटहाउस के लिए कम से कम 500 वर्गमीटर जमीन चाहिए। इसके लिए भी 50 प्रतिशत तक अनुदान सरकार देती है। किसान पहले से पॉलीहाउस बनाकर खेती कर रहे हैं और वह क्षतिग्रस्त हो गया है तो उसकी मरम्मत के लिए 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पॉलीहाउस व नेटहाउस पर सरकार द्वारा चयनित एजेंसी किसानों के खेतों में मानक के अनुसार उसे तैयार कर किसानों को उपलब्ध करा देती है। पॉलीहाउस बनाने पर 935 रुपये वर्गमीटर का खर्च आता है। वहीं नेटहाउस के लिए 710 रुपये वर्गमीटर खर्च आता है। सफलता गाथा श्री मोटा राम, सिंधियों की ढाणी, जिला पाली के निवासी हैं। इन्होंने बी.ए. कला संकाय तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी करने का मन बनाया एवं कोचिंग ज्वाइन करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लग गए। एक वर्ष बाद जब कहीं पर भी किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफल नहीं हुये तो वर्ष 2017 में कमाने के लिए बेंगलुरु में कपड़े की दुकान पर कार्य किया। इसमें मामूली वेतन होने के कारण घर खर्च नहीं चला और वे परेशान होने लगे। इसके बाद वहां से भी काम छोड़ अपने गांव लौट आए। इनकी 15 हैक्टर पैतृक कृषि भूमि पर इनके पिता की देखरेख में खेती की जाती थी, लेकिन खेती करने का तरीका पारंपरिक था। श्री मोटा राम ने सोचा कि जीवनभर दूसरों के अधीन नौकरी करने से तो अच्छा है कि कृषि में किसी ऐसी उच्च तकनीक पर काम किया जाये, जिससे आमदनी तो हो साथ ही साथ इससे कुछ लोगों को रोजगार भी दिया जा सके। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी व दूसरों के यहां नौकरी छोड़कर खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाने का मन बनाया। और अपनी 15 हैक्टर भूमि के चारों ओर कांटेदार तार लगाकर खेत को सुरक्षित किया। इसमें खर्चा लगभग 45,000 रुपये का आया। इसके बाद श्री मोटाराम ने कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली और खेती की वैज्ञानिक तकनीक को जानने के लिए जिले में स्थित काजरी कृषि विज्ञान केन्द्र, पॉली के बारे में जानकरी ली। इन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र, पॉली से संपर्क किया। वहां के उद्यान विशेषज्ञ से बागवानी की विस्तृत जानकारी ली। उसी समय बागवानी फसलों, हाईटेक बागवानी और संरक्षित सब्जी उत्पादन पर प्रशिक्षण शुरू होने ही वाला था। उसके बारे में पूर्ण पता किया तथा अगस्त 2017 में प्रशिक्षण में भाग लिया। कृषि विज्ञान केन्द्र, पॉली में आयोजित 21 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री मोटा राम ने भाग लिया, जिसमें हाईटेक बागवानी के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी गयी थी। इसके बाद इन्होंने आधा हैक्टर क्षेत्र में पॉलीहाउस बनवाने का निर्णय लिया और फरवरी 2018 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत इसका निर्माण करवाया। वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गयी फसलों जैसे-टमाटर, खीरा, मिर्च, फूलगोभी, ग्लाडिया गुलाब, हजारा एवं गुलदाउदी में से खीरा की खेती करने की रूपरेखा बनाई एवं उसके अनुसार पॉलीहाउस में फसल बुआई की तैयारी प्रारंभ कर दी। मार्च से जून तक पॉलीहाउस में फसल के लिए तैयारी पूर्ण कर ली गयी तथा जून के अंतिम सप्ताह में खीरा के 45000 बीजों की प्रो-ट्रे तकनीक से बुआई की गयी। प्रो-ट्रे में नारियल का बुरादा 50 प्रतिशत, पैराक्यूलाइट 35 प्रतिशत, वर्मीकम्पोस्ट 15 प्रतिशत आदि मिश्रण को भरकर तैयार किया। इसके बाद बाहरी वातावरण से बचाते हुए पॉलीहाउस के अंदर प्रो-ट्रे को रखा गया एवं बीज बुआई के 28 दिनों बाद 24 जुलाई 2018 को पौध रोपाई की गयी। पॉली जिले के पॉली ब्लॉक में वार्षिक वर्षा 250 मि.मी. तक ही होती है। ब्लॉक में सिंचाई के लिए पानी की समस्या होने के कारण श्री मोटा राम ने एक हैक्टर जमीन पर ढलान की तरफ तालाब का निर्माण करवाया। इसकी सहायता से पूरे वर्ष, 13 हैक्टर क्षेत्रफल को सिंचित किया गया। पॉलीहाउस में खीरा की खेती से 3,58,600 रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त हुई, जो कि साधारण खेती से काफी अधिक है। इस खीरा की खेती के आय-व्यय का विवरण सारणी में दिया गया है। पॉलीहाउस का लाभ खुले खेत के मुकाबले पॉलीहाउस में उत्पादकता तीन से चार गुना अधिक बढ़ जाती है। पॉलीहाउस का उपयोग नर्सरी तैयार करने के लिए भी किया जाता है। इसमें बेमौसमी फूलगोभी, बंदगोभी, शिमला मिर्च, खीरा, ककड़ी, भिण्डी, टमाटर, परवल आदि सब्जियों की खेती की जा सकती है। इसके अलावा फूलों की भी बेमौसमी खेती की जा सकती है। पॉलीहाउस बनाने में किसानों को खर्च अधिक पड़ जाता है, लेकिन बेमौसम सब्जी उत्पादन होने से कीमत तीन से चार गुना अधिक मिल जाती है। इसमें कीटों व रोगों का नियंत्रण आसानी से शत-प्रतिशत किया जा सकता है। सब्जियों व फूलों की गुणवत्ता बनी रहती है तथा बाजार में अधिक भाव मिलता है। छोटी जोत वाले किसानों के लिए पॉलीहाउस अधिक फायदेमंद है। आय-व्यय का विवरण सारणीः पॉलीहाउस में खीरा की खेती का आय-व्यय का विवरण क्र.सं विवरण आय-व्यय(रुपये) 1 पाॅलीहाउस का खर्च 105000 २ खेत की तैयारी 2500 3 क्यारी बनाना 3000 4 बीज 25500 5 खाद व उर्वरक 17500 6 तार व रस्सी 12500 7 श्रमिक खर्च 15000 8 दवाई 9500 9 अन्य 7500 10 कुल व्यय 198000 11 उत्पादन (क्विंटल/हैक्टर) 253 12 कुल आमदनी (22/कि.ग्रा.) 556600 शुद्ध लाभ (रुपये) 358600 स्त्राेत : फल-फूल पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), मोती लाल मीणा, ऐश्वर्य डूडी, चन्दन कुमार और धीरज सिंह, भाकृअनुप-काजरी, कृषि विज्ञान केन्द्र, पॉली, मारवाड़-