<p style="text-align: justify;">एकीकृत कृषि प्रणाली में दो या इससे अधिक उद्यमों का एकीकरण शामिल होता है। इसमें किसान की अधिकतम जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादकता में वृद्धि कृषि अपशिष्टों का कुशल पुनर्चक्रण, संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा रोजगार पैदा होते हैं। इसमें जोखिम कम होने के साथ स्थिरता भी सुनिश्चित होती है। एकीकृत कृषि प्रणाली का उद्देश्य सम्बधित उद्यमों के साथ फसलों की गहनता और विविधीकरण के आधार पर प्रति क्षेत्र प्रति समय उपज को अधिकतम करना है। इसके अलावा यह पोषक तत्व पुनर्चक्रण सुनिश्चित करती है। वर्ष में अधिक लाभ और रोजगार सृजन के लिए एकीकरण रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता को कम करता है। तालाबों में मछलियों के साथ बत्तख या मुर्गीपालन के अलावा तालाबों के किनारे या तालाबों के ऊपर में पशुओं द्वारा तालाब का निरंतर जैविक निषेचन किया जाता है। इस प्रकार पशु और चारा अपशिष्ट के लाभदायक उपयोग से पशुधन, कृषि और मछलीपालन की दक्षता बढ़ जाती है। ऐसे में किसान कई उद्यमों से एक साथ कम लागत में अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">मवेशी/भैंस/डेयरी इकाई, बकरी इकाई, शूकरपालन, बत्तख-पालन, चारा भूमि, फसल भूमि, मछलीपालन (तालाब इकाई), मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मुर्गीपालन, खाद उत्पादन इकाइयां आदि परस्पर जुड़ी हुई हैं या एक दूसरे पर आश्रित हैं। एक इकाई से निकलने वाले अपशिष्ट और उप-उत्पाद दूसरी इकाई में कच्चे माल के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं। इस प्रकार लागत काफी कम हो जाती है और अपशिष्ट के निपटान की समस्या भी दूर हो जाती है। इससे एकीकृत कृषि प्रणाली की लाभप्रदता बढ़ जाती है।</p> <p style="text-align: justify;">इस कृषि प्रणाली में मुर्गीपालन के अपशिष्टों को बत्तख और मछली के आहार के रूप में उपयोग किया जाता है। गोबर का इस्तेमाल खाद के लिए किया जाता है और फसल के क्षेत्रा में पोषक तत्वों की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा गोमूत्र और नीम के अर्क को खेत में कीटनाशक के रूप में छिड़का जा सकता है। अनाज और इसके भूसे का उपयोग मुर्गी एवं गाय के आहार तथा चावल के भूसे को गाय के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पोल्ट्री की बेडिंग सामग्री का उपयोग खाद में भी किया जा सकता है। तालाब में जलकुंभी की तरह जलीय खरपतवार का उपयोग वर्मीकम्पोस्ट में बेडिंग सामग्री के रूप में किया जा सकता है। मशरूम की खेती में चावल के भूसे का भी प्रयोग किया जा सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">कृषि प्रणाली में विविधता के लाभ</h3> <p style="text-align: justify;">कृषि प्रणाली में विविधता से ग्रामीण आबादी के लिए खाद्य और पौष्टिक आहार के विविध विकल्प सुनिश्चित करने के साथ-साथ बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव, बाजार से प्राप्त होने वाले घटकों पर कम निर्भरता, समय-समय पर आमदनी जुटाने और किसानों को रोजगार उपलब्ध करवाने में भी सहायता मिल सकती है। विभिन्न क्षेत्रों में सीमान्त किसान परिवारों के सर्वेक्षण में पाया गया है कि दो से अधिक इकाइयों वाले परिवारों के लिए आमदनी का औसत काफी ज्यादा (1.61 लाख रुपए) है। ये इकाइयां हैं-फसल-डेयरी, बकरी-फसल, डेयरी-बकरी, मुर्गी-फसल, डेयरी-बकरी, मुर्गी-मछली इत्यादि दो इकाइयों वाले परिवारों के लिए यह केवल 0.57 लाख रुपए है, जिसमें केवल फसल-डेयरी, फसल, डेयरी, फसल-बकरी आदि हैं। दो घटकों वाले 59 प्रतिशत सीमान्त परिवारों की प्रति व्यक्ति आमदनी बढ़ाने के लिए उनकी कृषि प्रणालियों यानी केवल फसल, केवल डेयरी फसल, डेयरी-फसल, शूकर-फसल, मुर्गीपालन, फसल, मछलीपालन, फसल-बागवानी, फसल- बकरी, डेयरी-बकरी में विविधता लाने की आवश्यकता है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="197" height="172" /></p> <h3 style="text-align: justify;">एकीकृत कृषि प्रणाली के प्रकार</h3> <ul> <li style="text-align: justify;">फसल-बत्तख-मछलीपालन कृषि प्रणाली</li> <li style="text-align: justify;">फसल-पशुपालन कृषि प्रणाली</li> <li style="text-align: justify;">फसल-पशुपालन-मछलीपालन कृषिप्रणाली</li> <li style="text-align: justify;">फसल-पशुपालन-मुर्गी-मछलीपालन कृषि प्रणाली</li> <li style="text-align: justify;">फसल-मछलीपालन-मुर्गीपालन कृषि प्रणाली</li> <li style="text-align: justify;">फसल-पशुपालन-मत्स्य-वर्मीकम्पोस्टिंग कृषि प्रणाली</li> <li style="text-align: justify;">फसल-पशुपालन-वानिकी कृषि प्रणाली</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">एकीकृत कृषि प्रणाली से प्राप्त हो ने वाले लाभ</h3> <p style="text-align: justify;">एकीकृत कृषि प्रणाली विशेष रूप से विभिन्न कृषि उद्यमों को एकीकृत करके छोटे किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाती है। इसके अलावा उत्पादकता में वृद्धि, लाभप्रदता की रक्षा, खाद्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। फसल के साथ पशुपालन करना पफायदेमंद पाया गया है। यह नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम और अन्य खनिज पोषक तत्वों से मृदा की भौतिक-रासायनिक गुणों में सुधार करता है। मवेशी खाद मृदा की कार्बनिक पदार्थ सामग्री को बढ़ाती है और इस प्रकार मृदा की जलभराव क्षमता तथा नमी में वृद्धि होती है। यह मृदा की उर्वरा क्षमता में सुधार के साथ संरक्षण भी करती है। एकीकृत कृषि प्रणाली प्रति इकाई क्षेत्रा में उत्पादकता को बढ़ाती है, जिससे भूमि का बेहतर उपयोग होता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">धान-बत्तख-मछलीपालन कृषि प्रणाली</h3> <p style="text-align: justify;">पारंपरिक चावल की खेती प्रणाली की तुलना में एकीकृत धान-बत्तख कृषि प्रणाली उत्पादन की लागत को कम करती है। यह चावल की उत्पादकता को भी बढ़ाती है। यह पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती है और जैविक धान एवं बत्तख के मांस की बिक्री के माध्यम से किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। धान-बत्तखपालन की तकनीक से चावल की उत्पादकता 20 प्रतिशत और किसानों का 50 प्रतिशत तक लाभ बढ़ सकता है। बत्तख के मांस में प्रोटीन और अन्य पोषण की उच्च सामग्री होती है, जो खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की समस्या को हल करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। धान-बत्तख कृषि प्रणाली में मछली का एकीकरण, जड़ों के आसपास हानिकारक गैसों के संचय को रोकता है। इससे धान के क्षेत्र से मीथेन गैस, हाइड्रोजन सल्फाइड और अन्य विषैली गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है और भूमंडलीय तापन की वृद्धि में कमी आती है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) शिवानी रंजन’ और सुमित सौ’ ’सस्य विज्ञान विभाग, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)</p> <p style="text-align: justify;"> </p>