<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><img class="image-right" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/92c93f93993e930-93093e91c94d92f-92e947902-91594393793f-92a94d93092393e932940/92c93f93993e930-92e947902-90992694d92f93e92893f915-92b93893294b902-915940-916947924940/93892c94d91c940/bhindi.jpg" width="208" height="104" /></p> <p style="text-align: justify;">भिण्डी एक लोकप्रिय सब्जी है। इसका उत्पादन मुख्यत: सब्जी के लिए किया जाता है। गर्मी तथा बरसातीमौसम की सब्जियों में भिण्डी एक प्रमुख सब्जी है। इसके इस्तेमाल से शरीर के प्रचुर मात्रा में विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ प्रोटीन तथा खनिज तत्व की प्राप्ति होती है। इसके जड़ और तना का प्रयोग गुड़ तथा चीनी को साफ़ करने के लिए किया जाता है। इसके तने के रेशेदार छिलके का इस्तेमाल पेपर मिल में करते हैं। भिण्डी की खेती लगभग सालोभर की जाती है साथ ही साथ व्यवसायिक रूप में हमारे राज्य में इसकी खेती की जाती रही है। इसकी फसल के लिए 25<sup>0</sup> से 30<sup>0</sup> सेंटीग्रेड का तापमान सबसे अच्छा होता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">जलवायु एवं मिट्टी <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">भिण्डी लम्बे एवं गर्म मौसम वाली फसल है। वैसे इसकी खेती सालोभर की जाने लगी है। इसकी खेती सभी प्रकार की भूमि में की जाती है। लेकिन बलुई दोमट या दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए विशेष उपयुक्त है। 6 से 8 पी. एच. मान मिट्टी इस फसल के लिए अच्छी होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">उन्नत प्रभेद एवं उपज <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">भिण्डी की प्रमुख प्रभेद जिसमें वाई.भी.एम. यानि पीला वाला वायरस रोग नहीं लगता है तथा फल मुलायम लम्बे हरे होते हैं सबसे उपयुक्त माने जाते है। अरका अभय, अरका अनामिका, परभनी क्रान्ति, पंजाब पद्यामिनी इत्यादि गरमा मौसम की उन्नत किस्म है। इनकी उपज क्षमता 70-90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। पूसा सावनी 20-25 सेंमी. लम्बे हरे रंग के, कोमल, रोआँ रहित फल तथा मोजैक रोग प्रतिरोधी गुण वाली अच्छी किस्म है।</p> <p style="text-align: justify;">पूसा मखमली 20-25 सेंमी. लम्बे, हरे कोमल तथा रोआँ रहित फल वाली प्रभेद है। ये दोनों किस्म गरमा तथा बरसात दोनों मौसम में लगाई जाती है। इनकी उपज क्षमता 100-125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हैं। बरसाती किस्म में परभनी क्रान्ति, सेलेक्सन 8 से 10 तथा के. एस. 312 इत्यादि बरसात के लिए अच्छी होती है। इन सभी किस्मों की उपज क्षमता 90 से 125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। संकर किस्मों में भवानी, कृष्ण, हाब्रिड-6 तथा हाईब्रिड-8, इंद्रानिल तथा अनोखी इत्यादि प्रमुख है।</p> <h3 style="text-align: justify;">खेती की तैयारी</h3> <p style="text-align: justify;"><strong> </strong></p> <p style="text-align: justify;">खेत की अच्छी तरह से 3-4 बार जुताई करें। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें। ताकि खेत से खरपतवार अच्छी तरह साफ़ हो जाए। दूसरी व् तीसरी जुताई के समय 200 क्विंटल कम्पोस्ट खेत में मिला दें। अंतिम जुताई के समय नेत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फूर व् पोटाश की पूरी मात्रा खेत में मिला दें। जुताई के बाद खेत में पाटा चलाकर मिट्टी की भुरभुरी तथा समतल बना लें।</p> <p style="text-align: justify;">नेत्रजन की शेष आधी मात्रा पौधा जमने के 25 से 30 तथा 50-55 दिनों बाद दो बार में पौधों की जड़ों के पास देकर मिट्टी में अच्छी तरह से मिला दें।</p> <h3 style="text-align: justify;">बीज एवं बुआई <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">बीज दर बरसाती में 8-10 किग्रा. तथा गर्म मौसम में 15-20 किग्रा. बीज प्रति हेक्टेयर है। बीज का उपचार 2.5 ग्राम थीम या कैप्टान या वेविस्टीन दवा से प्रति किग्रा. बीज की दर से करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई का समय <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">गर्मी फसल की बुआई का सबसे अच्छा समय 15 जनवरी से फरवरी के अंत तक होता है। जबकि बरसाती फसल को जून-जुलाई में लगाते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई की विधि <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">भिण्डी के बीज सीधे खेत में ही लगाये जाते हैं। गरमा मौसम में बीज की बुआई बीज को २४ घंटे पानी में भिंगोकर एवं अंकुरण कराकर करनी चाहिए। गरमा मौसम में इसके बीजों की बुआई 45 x 30 सेंमी. (कतार से कतार की दूरी 45 सेंमी. तथा पौध से पौध की दूरी 30 सेंमी. तथा पौध से पौध की दूरी 45 सेंमी.) पर करें। एक स्थान पर एक या दो बीज की बुआई करनी चाहिए। फसल की सिंचाई के लिए मेड़ व नाली बुआई से पूर्व बना लें।</p> <h3 style="text-align: justify;">खाद एवं उर्वरक <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">भिण्डी की अच्छी उपज हेतु सही और संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरक का व्यवहार मिट्टी के जांच के उपरान्त ही करना चाहिए। इसकी खेती में निम्नलिखित मात्रा में खाद एवं उर्वरक के व्यवहार की अनुशंसा की जाती है। कम्पोस्ट 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर या 60-80 क्विं./हेक्टेयर वर्मी कम्पोस्ट, यूरिया 200-250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, सिंगल सुपर फास्फेट 250-350 किलोग्राम तथा पोटाश 80 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।</p> <h3 style="text-align: justify;">निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">सिंचाई के 3-4 दिनों बाद निकाई-गुड़ाई करने से खेत के खरपतवार नष्ट हो जाते है साथ ही साथ खेत की मिट्टी हल्की तथा खेत में नमी बनी रहती है। खेत में अधिक खरपतवार निकलने पर खरपतवार नाशी दवा लासो 2 लीटर 800 लीटर पानी में घोल बना कर खेत में छिड़कें।</p> <p style="text-align: justify;">गर्म मौसम के भिण्डी की फसल को 8-10 दिनों पर सिंचाई करनी। सिंचाई करते समय ध्यान रहे कि अधिक जल जमाव न हो सके। बरसात में आवश्यकतानुसार 10-15 दिनों पर सिंचाई करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">फसल चक्र तथा अन्तवर्ती खेती <strong> </strong></h3> <ol style="text-align: justify;"> <li>शकरकंद – भिण्डी, 2. भिण्डी-पत्तागोभी-लौकी-एक वर्षीय फसल चक्र।</li> </ol> <p style="text-align: justify;">द्विवर्षीय फसल चक्र-टमाटर-शाक-भिण्डी-फूलगोभी-लौकी इत्यादि।</p> <p style="text-align: justify;">अंतरवर्ती फसल के रूप में भिण्डी के साथ आलू, मटर, बैगन, मकई, मूली, गोभी, शाक इत्यादि फसल लगा सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">इस प्रकार भिण्डी की वैज्ञानिक खेती करके 100-125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त कर अधिक से अधिक लाभ ले सकते हैं एवं किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">माघ में जब पानी पड़े तो किसान को चाहिए की जमीन को खूब जुतवा दे। जून तक ढेले को वैसे ही छोड़ दे धूप में पतने के लिए। भादो में बरसात होने पर मिट्टी को सड़ने दें। फिर उसमें अनाज उपजाएं।</p> <p style="text-align: justify;"> </p> <div id="basic-modal-content" style="text-align: justify;"> <div class="Janani"><object width="650" height="350" classid="clsid:d27cdb6e-ae6d-11cf-96b8-444553540000" codebase="http://download.macromedia.com/pub/shockwave/cabs/flash/swflash.cab#version=6,0,40,0"> <param name="src" value="https://www.youtube.com/v/oFXKmyFObKc&rel=0&autoplay=1" /><embed height="350" width="650" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/92c93f93993e930-93093e91c94d92f-92e947902-91594393793f-92a94d93092393e932940/92c93f93993e930-92e947902-90992694d92f93e92893f915-92b93893294b902-915940-916947924940/93892c94d91c940/bhindi.jpg" type="application/x-shockwave-flash" /> </object> <br />भिंडी की वैज्ञानिक बुवाई से तकनीक क्या है ? जानें अधिक, इस विडियो को देखकर</div> </div> </div> <div> </div> <div>स्त्राेत एवं सामग्रीदाता : कृषि विभाग, बिहार सरकार।</div>