<h3 style="text-align: justify; "><span>जीवाणु खाद क्या है?</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- यह एक प्रकार की प्राकृतिक खाद है।</p> <p style="text-align: justify; ">- यह खाद सूक्ष्म जीवाणुओं से बनती है जो फसल एवं पर्यावरण के मित्र होते हैं।</p> <p style="text-align: justify; ">- इस खाद को विभिन्न प्रकार के जैविक पदार्थ (माध्यम) में मिलाकर बनाया जाता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- यह धरती की सबसे सस्ती खाद है।</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>जीवाणु खाद कैसे काम करती है?</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद मुख्यतः दो प्रकार की होती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- एक प्रकार की जीवाणु खाद वायुमंडल में उपलब्ध नेत्रजन का स्थिरीकरण संग्रह) करके फसल को उपलब्ध कराता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- दूसरे प्रकार की जीवाणु खाद मिट्टी में उपलब्ध अघुलनशील अर्थात फसलों को अप्राप्त फास्फोरस को घुलनशील बनाकर फसल को उपलब्ध कराती है।</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>फसल विशेष के लिए जीवाणु खाद</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- फसल के साथ वायुमंडलीय नेत्रजन संग्रह करने वाली जीवाणु खाद बदलती रहती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- परन्तु अघुलनशील फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाली जीवाणु खाद सभी फसलों पर समान रूप से काम करती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- धान की फसल के लिए एजोस्फिरिलियम नामक जीवाणु खाद का व्यवहार किया जाना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify; ">- गेंहूँ, मक्का, तेलहन, सब्जी, गन्ना आदि फसलों के लिए एजोरोबैक्टर नामक जीवाणु खाद का व्यवहार करना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify; ">- दलहनी फसलों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की जीवाणु खाद का व्यवहार किया जाता है। जिसे राईजोबियम जीवाणु खाद कहते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>जीवाणु खाद का व्यवहार कैसे करें?</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद से बीज का उपचार करके उसका व्यवहार किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- दो सौ ग्राम (200 ग्राम) जीवाणु खाद 10-12 किलो बीज का उपचार करने के लिए पर्याप्त होता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- 200 ग्राम जीवाणु खाद को आधार लीटर ठंडे मांड़ अथवा गुड़ के घोल में मिलाकर बीज के ऊपर<img class="image-right" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/92c93f93993e930-93093e91c94d92f-92e947902-91594393793f-92a94d93092393e932940/jk.jpg" /> डालकर बीज और जीवाणु खाद के घोल को अच्छी तरह से मिला दें ताकि प्रत्येक बीज पर घोल की एक हल्की परत चढ़ जाए।</p> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद से उपचारित बीज को आधा घंटा छाया में सुखाकर व्यवहार करें।</p> <p style="text-align: justify; ">- बिचड़े का उपचार करके भी जीवाणु खाद का व्यवहार किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- किसी भी प्रकार के जीवाणु खाद की एक किलोग्राम मात्रा में 5-10 लीटर पानी मिलाकर घोल बना लें। यह घोल एक एकड़ खेत में लगने वाले बिचड़े (विशेष रूप से सब्जी के बिचड़े) के पर्याप्त होता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद के घोल में बिचड़े के जड़ को कम-से-कम आधा घंटा डुबोकर रखें, फिर उसे खेत में रोप दें।</p> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद से मिट्टी का भी उपचार कर सकते है।</p> <p style="text-align: justify; ">- एक एकड़ खेत के लिए जीवाणु खाद की २-5 किलोग्राम सुखी भुरभुरी मिट्टी में मिला लें। फसल की बुवाई अथवा रोपाई के 24 घंटे पूर्व अथवा बुवाई/रोपाई के समय मिट्टी में व्यवहार किया जा सकता है।</p> <h3><span>जीवाणु खाद के व्यवहार से लाभ</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- यह पूर्ण रूप से जैविक खाद है जिसका कोई गलत प्रभाव किसी भी जीवधारी पर नहीं पड़ता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- इस खाद के व्यवहार से फसल को हर तरह से लाभ होता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- फसल में बाहरी नाइट्रोजन की आपूर्ति 30% तक कम हो जाती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- फसल की वानस्पतिक एवं प्रजनन अवस्था समान रूप से चलती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- इसका प्रभाव धीरे-धीरे फसल पर होता है और बहुत अधिक समय तक बना रहता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- कृषि उत्पाद की गुणवत्ता काफी बढ़ जाती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- फसल की उत्पादन लागत घट जाती है और उत्पादन बढ़ जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>जीवाणु खाद के व्यवहार के समय क्या न करें?</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद को गर्म पानी अथवा गर्म मांड़ में न डालें।</p> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद को सीधे धुप में न रखें।</p> <p style="text-align: justify; ">- जीवाणु खाद व्यवहार हमेशा सुबह-शाम में करें।</p> <p style="text-align: justify; ">- बीज उपचार अथवा बिचड़ा उपचार के 4-6 घंटे के बाद इसका व्यवहार करने से पूरा लाभ नहीं मिलता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- रासायनिक उर्वरक के साथ मिलाकर इसका व्यवहार कदापि न करें।</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>विशेष जानकारी के लिए कहाँ संपर्क करें?</span></h3> <p style="text-align: justify; ">- जिला स्तर पर जिला कृषि पदाधिकारी अथवा परियोजना निदेश आत्मा से संपर्क करें।</p> <p style="text-align: justify; ">- प्रखंड स्तर पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अथवा प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क करें।</p> <p style="text-align: justify; ">- पंचायत स्तर पर कृषि समन्वयक अथवा अपने गाँव के कृषक सलाहकार से संपर्क किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">- निकट के कृषि विश्वविद्यालय/कृषि महाविद्यालय/कृषि विज्ञानं केंद्र एवं कृषि विशेषज्ञ से उचित सलाह प्राप्त की जा सकती है।</p> <p style="text-align: justify; ">- किसान कॉल सेंटर के विशेषज्ञ से <strong>निःशुल्क</strong> सलाह के लिए <strong>1800 180 1551</strong> पर फोन करें भी सलाह प्राप्त की जा सकती है। यह सुविधा निःशुल्क है।</p> <p style="text-align: justify; "> </p> <p style="text-align: justify; "><strong> स्त्रोत: </strong><a class="ext-link-icon" href="http://www.krishi.bih.nic.in/" target="_blank" title="अधिक जानकारी के लिए ">कृषि विभाग</a>, बिहार सरकार</p>