काली मिर्च काली मिर्च मानसून के15 दिन विलंब होने पर स्थापित पौधा रोपण हरी पत्तियों के साथ बेसिन एवं उसके बीच अंतराल का मिश्रण ताप भर के साथ-साथ वाष्पोत्सर्जन को कम करने के लिए पत्तों पर लाईम 1% या काओलिनाइट का छिड़काव । नई पोधा रोपण / अन्तराल को भरने का स्थगन करना । 8-10 लीटर प्रतिदिन प्रति वाईन (ड्रिप सिंचाई) या 50 लीटर/ प्रति सप्ताह प्रति वाईन (होस सिंचाई )की दर पर फसलो की सिंचाई क्लोरोपायरीफोस 0.75%के साथ मृदा हेतु जीवंत समर्थन, ड्रैन्च पर टर्मिनेट आक्रमण की रोक के लिए और1 भी लंबे तक सहायता पर स्प्रै: 21 दिन के बाद पुन: स्प्रै यदि आवश्यक हो तो । अति नवीन प्लांटेंशन हरी पत्तियों /कोरपिथ कम्पोस्ट के साथ बेसिन एवं अंत अंतर को मिलाना उपयुक्त छाया प्रदान करके नवीन वाईन की रक्षा करना 5-8 लीटर प्रतिदिन प्रति वाईन (ड्रिप सिंचाई ) या 25 लीटर प्रति सप्ताह प्रति वाईन (होस सिंचाई की दर पर फसल सिंचाई) 30 दिनों की लगातार मानसून विलंब स्थापित पौधा रोपण हरी पत्तियों के साथ बेसिन एवं अंतअन्तराल को मिलाकर ताप लोड के साथ-साथ अंतरण को कम करने के लिए फोलिएज पर लाईम 1%या काओलीनाइट स्प्रै । नई प्लांटिंग / खाइयों को भरने का स्थगन करना । 8-10 लीटर प्रतिदिन प्रति वाईन (ड्रिप सिंचाई )या 50 लीटर/प्रति सप्ताह प्रति वाईन (होस सिंचाई ) की दर पर फसलों की सिंचाई क्लोरोपायरिफोस 0.75% के साथ मृदा हेतु जीवत समर्थन, ड्रैन्च पर टर्मिनेट आक्रमण की रोक के लिए और 1 भी लम्बे तक सहायता पर स्प्रै: 21 दिन बाद पुन: स्प्रै यदि आवश्यक हो तो । अति नवीन प्लांटेंशन हरी पत्तियों/ कोरपिथ कम्पोस्ट के साथ बेसिन एवं अंत अंतर को मिलाना उपयुक्त छाया प्रदान करके नवीन वाईन की रक्षा करना 5-8 लीटर प्रतिदिन प्रति वाईन(ड्रिप सिंचाई) या 25 लीटर प्रति सप्ताह प्रति वाईन (होस सिंचाई की दर पर फसल सिंचाई) वेजेटेशन / प्रजनन स्तर के दौरान सूखा 35-40 लीटर प्रति वाईन प्रति सप्ताह या 8-10 लीटर प्रति वाईन प्रति दिन की दर पर होस सिंचाई प्रदान करना (ड्रिप सिंचाई) मानसून के आने तक हरी पत्तियां (10 कि.ग्रा. प्रति वाईन)/कोरपिथ कम्पोस्ट (2 कि.ग्रा. प्रति वाईन और मल्च की दर पर एफवाईएम जैसे जैविक खादों का प्रयोग नई पौधा रोपण/ खाइयों को भरना स्थगित करना क्लोरोपायीरोफोस 0.075 के साथ मृदा के जीवंत समर्थन, ड्रेच पर टर्माईट आक्रमण को रोकने के लिए और 1 मि.लंबी तक सहायता पर स्प्रै:21 दिनों के बाद पुन: स्प्रै यदि आवश्यक हो तो । टर्मिनल सूखा हरी पत्तियां/कोरपिथ कम्पोस्ट के साथ बेसिन एवं अंत अन्तर का मल्च उपयुक्त छाया प्रदान करके नये वाईन की रक्षा करना । 5.8 लीटर प्रति दिन प्रति वाईन की दर पर फसलो को सींचना क्लोरपायोरोफोस 0.075 के साथ मृदा के जीवंत समर्थन,ड्रेच पर दीमक आक्रमण को रोकने के लिए और 1 मि.लंबी तक सहायता पर स्प्रै यदि आवश्यक हो तो । इलाइची स्थिति इलाइची 15 दिनों की लगातार मानसून का विलंब खतपतवार को हटाना और मल्च के रूप में प्रयोग करना मानसून सैट होने तक नई पौधा रोपण से बचना 8 लीटर प्रति कलम्प प्रति दिन (10-12 दिन में एक बार) की दर पर सिंचाई या स्प्रिकलर सिंचाई (वर्षा के 25 एमएम के लिए 4 घंटे प्रति दिन नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना वेजेटेशन / प्रजनन स्तर के दौरान सूखा 8 लीटर प्रति कलम्प प्रति दिन (10-12 दिन में एक बार)की दर पर सिंचाई या स्प्रिकलर सिंचाई (वर्षा के 25 एमएम के लिए 4 घंटे प्रति दिन हरी मल्च प्रयोग करना नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना पुराने और गैर उत्पादित सकरों को हटाना टर्मिनल सूखा 8 लीटर प्रति कलम्प प्रति दिन (10-12 दिन में एक बार)की दर पर सिंचाई या स्प्रिकलर सिंचाई (वर्षा के 25 एमएम के लिए 4 घंटे प्रति दिन हरी मल्च प्रयोग करना नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना पुराने और गैर उत्पादित सकरों को हटाना *ईलायची बारहमासी फसल है और वेजेटेटिन और प्रजनन चरण सामान रहता है । अदरक एवं हल्दी स्थिति 15 दिनों तक मानसून की लगातार कमी हरी पत्तियां /कोरपिथ कम्पोस्ट के साथ मोटी मल्च कवर प्रदान करना छाया के लिए उपयुक्त अंत फसल उगाना 30 दिनों तक मानसून की लगातार कमी लघु आवधिक किस्मों की खेती छाया के लिए उपयुक्त अन्तफसलन उगाना वेजेटेटिव स्तर के दौरान सूखा वर्षा का 5-10 एमएम तक सप्ताह में एक बार फसलों की सिंचाई । हरी पत्तियों का प्रयोग /कोरपिथ कम्पोस्ट मल्च रिजोमफोरमेशन के समय सूखा वर्षा का 5-10 एमएम तक सप्ताह में एक बार फसलों की सिंचाई हरी पत्तियों का प्रयोग /कोरपिथ कम्पोस्ट मल्च अदरक की खेती की हा सकती है और सब्जी उदेश्यों के लिए उपयोग की जा सकती है। टर्मिनल सूखा फसल की खेती स्थिति जायफल लगातार 15 दिनों की मानसून के विलंब पर हरी पत्ति/बेसिन के बहर कोरपिथ कम्पोस्ट के साथ मोटी मल्च कवर प्रदान करना। नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना। लगातार 30 दिनों की मानसून के विलंब होने पर 50 से 100 लीटर प्रति पौधा प्रति सप्ताह तक पौधों की सिंचाई करना और हरी मल्च का प्रयोग करना । नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना। प्रजनन स्तर पर सूखा 50 से 100 लीटर प्रति पौधा प्रति सप्ताह तक पौधों की सिंचाई करना और हरी मल्च का प्रयोग करना। नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना। टर्मिनल सूखा 50 से 100 लीटर प्रति पौधा प्रति सप्ताह तक पौधों की सिंचाई करना और हरी मल्च का प्रयोग करना नये पौधों के लिए पर्याप्त छाया प्रदान करना * जायफल बारहमासी फसल है और वानस्पतिक और प्रस्फुटन चरण सामान रूप से होता है स्त्रोत : राष्ट्रीय बागवानी मिशन,भारत सरकार