परिचय ऐसा अनुमान है कि फलों एवं सब्जियों के उत्पादन का लगभग 30 – 40 प्रतिशत हिस्सा तुड़ाई उपरांत कुप्रबंधन के कारण क्षतिग्रस हो जाता है। यदि फलों एवं सब्जियों का सही समय पर प्रसंस्करण करें तो तुड़ाई उपरांत क्षति तो कम होगी ही साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के असंख्य अवसर भी पैदा होंगे। इसके अतिरिक्त हमारे युवा फलों एवं सब्जियों के प्रसंस्करण को उद्यम के रूप में अपनाकर क्षेत्रों में उद्योग लगाकर उन्नति के नये आयाम भी स्थापित कर सकते हैं। इससे न केवल किसान को आर्थिक लाभ होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में काफी मदद भी मिलेगी। हमारे देश विश्व के कुछ ही गिने – चुने देशों में से एक है जहाँ लगभग हर प्रकार की जलवायु पाई जाती है। यही कारण है कि हमारे देश में विविध प्रकार के फसल व सब्जियां उगाई जाती हैं। इस समय भारत फलोत्पादन (88.9 मीट्रिक टन) एवं सब्जियों के उत्पादन (170.8 मीट्रिक टन) में विश्व में चीन के बाद दुसरे पायदान पर है। धान्य व दलहनी फसलों की अपेक्षा फसल व सब्जियां बहुत अधिक नाशवान प्रकृति की होती हैं। अधिकतर फलों व सब्जियों में 80 से 95 प्रतिशत तक पानी होता है। एवं वे धन्य एवं दलहनी फसलों से भारी होते हैं। उनका गठन मुलायम व श्वसन क्रिया अधिक होने के कारण इन्हें ढुलाई एवं भण्डारण के दौरान बहुत से सूक्ष्मजीव ग्रसित करते हैं, जो कई रोगों का कारण बन जाते हैं। ऐसे में इन कृषि उत्पादों से तमाम तरह के प्रसंस्करित मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किये जा सकते हैं। आइये चर्चा करते हैं ऐसे ही कुछ प्रसंस्करित उत्पादों के बारे में। जैम एवं मुरब्बे तैयार करना ये उत्पाद चीनी की अधिक मात्रा द्वारा कम से कम 68 प्रतिशत होती है। चीनी के इतने गाढ़ेपन में जीवाणु पैदा नहीं होते तथा नष्ट हो जाते हैं। इनमें सब्जी व फल की वास्तविक सुगंध तथा स्वाद बना रहता है। जिन फलों में पेक्टिन कम मात्रा में हो उनका जैम बनाने के लिए उनके गूदे में बाजार में मिलने वाला पेक्टिन पाउडर मिला सकते हैं। जैम – यह लगभग सभी प्रकार के फलों और गाजर व टमाटर से बनाया जा सकता है। अच्छा जैम उन्हीं फलों से बनता जैम के जमने में सहायक होती है, जैम बनाने के लिए फसल अथवा उसका पेस्ट चीनी के साथ मिलकर गाढ़ा होने तक पकाया जाता है विभिन्न फलों से जैम बनाने की सामग्री सारणी – 1 में दी गई है। जैम बनाने की विधि अच्छे पके फल लें, (अकेला फल या मिश्रित फल), छीलकर, काटकर, बीज व गुठली (जहाँ आवश्यक हो) निकालें, छोटे – छोटे टुकड़ों में काटें या कद्दूकस करें, थोड़ा सा पानी डालकर पका लें तथा पेस्ट तैयार करें, पेस्ट में चीनी डालकर कुछ देर तक पकाएं, थोड़ा गाढ़ा होने पर सिट्रिक अम्ल (खटास) थोड़े से पानी में घोलकर गाढ़े पेस्ट में डालें तथा 5 – 10 मिनट तक जैम को गाढ़ा होने तक पकाएं (जब जैम को चम्मच से गिराने पर चादर सी बनने लगे तो समझें कि जैम तैयार है) गर्म - गर्म जैम को साफ़ बोतलों में भर दें, थोडा ठंडा होने पर ढक्कन बंद करें तथा शुष्क स्थान पर भंडारित करें। मुरब्बा – फल एवं सब्जी से गाढ़े चीनी के घोल में बने शुष्क मुरब्बे बहुत लोकप्रिय हैं। इन्हें भी चीनी के से परिरक्षित किया जरा है। चीनी की 68 – 70 प्रतिशत या इससे अधिक मात्रा हो जाने पर सूक्ष्मजीव नहीं पनपते तथा मुरब्बा काफी समय तक सुरक्षित रह सकता है। मुरब्बा सेब, आम, आंवला, बेल, करौंदा, चेरी, अनन्नास आदि फलों तथा गाजर, पेठा, अदरक आदि सब्जियों से तैयार किया जाता है। शुष्क मुरब्बे को कैंडी, क्रिष्टली कृत एवं ग्लेज्ड फल भी कहते हैं। मुरब्बा बनाने के विधि अच्छे फसल का चुनाव करें, छिले तथा काटें, गोदें, उबलते पानी या नमक के घोल में करें। बराबर मात्रा में चीनी मिलाना तथा मुरब्बा पकाकर तैयार करना, फलों को चीनी की चाशनी में पकाएं या फलों को चीनी की परत के बीच रखें तथा पकाएं। बाद में थोड़ा सा सिट्रिक अम्ल (0.1 – 0.5 प्रतिशत) डालकर पकाए, जार या मर्तबान में भरकर बंद करके शुष्क स्थान पर रखें। फलों व सब्जियों को सुखाने में सावधानियां धब्बेदार, क्षतिग्रस्त या खाए हुए फलों और सब्जियों को सुखाने के काम में नहीं लाना चाहिए, क्योंकि इनपर जीवाणुओं का असर जल्दी होता है। प्रयोग में लाने से पहले इन्हें साफ पानी में धोएं। सूखाने से पहले फल तथा कुछ खास सब्जियों को गंधक से उपचारित करना आवश्यक है। इसके लिए इन्हें बंद कमरे या बक्से में गंधंक का धुवां देना चाहिए या पोटेशियम मेटाबाईसल्फाइट के घोल में निर्धारित समय तक रखना चाहिए। उपचारित फल व सब्जियों का रंग उन्हें सुखाने के बाद ख़राब नहीं होता है तथा भंडारण के दौरान इनमें कीटों का असर नहीं होता। धुप में सुखाते समय इन्हें चटाई, चारपाई या चादर पर फैलाकर ऊपर से बारीक़ मलमल का कपड़ा डाल देना चाहिए, जिससे इन्हें धूल, मक्खियों तथा कीटों से बचाया जा सके। इन्हें समय – समय पर उलटते – पलटते रहना चाहिए, ताकि कोई भाग बिना सूखा न रह जाए। इन्हें ट्रे में इस तरह फैलाना चाहिए कि कटा हुआ भाग ऊपर की ओर रहे। सूख जाने के बाद फलों और सब्जियों को हवारहित डिब्बों अथवा बोतल में रखना चाहिए। इने ढक्कन पर मोम लगाकर सील बंद कर देना चाहिए। आजकल इन्हें पॉलीथिन की थैलियों में भी सीलबंद करके रखा जाता है। सुखाए गये फलों और सब्जियों के भंडारण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। भण्डारण कक्ष नमी तथा कीटरहित व शुष्क होना चाहिए। सुखाए हुए फलों और सब्जियों को यदा – कदा धुप में रखना चाहिए। सारणी -1 फल तथा सब्जियों से जैम बनाने के लिए सामग्री फल/सब्जी गूदा (किग्रा) चीनी (किग्रा) पानी (मि.ली.) सिट्रिक ग्राम)अम्ल (ग्राम) पेक्टिन ( आम 1.0 0.75 50 1.2 10.0 अमरुद 1.0 0.75 150 2.5 - सेब 1.0 0.75-1.00 100 2.3 - पपीता 1.0 0.70 100 3.0 4.0 आड़ू 1.0 0.75 100 1.0 3.0 आलू बुखार 1.0 0.80 150 - 2.0 आवंला 1.0 0.75 150 - - अनन्नास 1.0 1.00 50 0.5 8.0 नाशपाती 1.0 0.75 100 1.5 - स्ट्रेबेरी 1.0 0.75 100 2.0 - गाजर 1.0 0.75 200 2.5 10.0 टमाटर 1.0 1.00 100 3.0 2.0 मिश्रित फल 1.0 0.80-1.00 100 2.5 - * जैली फलों के रस से तैयार की जाती है। आम पापड़ आम रस दो धुप में सूखाकर आप पापड़ भी बनाया जाता है। इसके लिए रस को चटाई पर पतली तह में फैलाया जाता है। सूखने पर दूसरी तह लगा दी जाती है। कभी – कभी रस को पकाकर या अतिरिक्त चीनी मिलाकर गाढ़ा करके भी सुखाया जात है। अत्यधिक आलम वाले आम रस में शर्करा मिलाने से, शर्करा व अम्ल के अनुपात को नियंत्रित किया जा सकता है। धुप में सुखाया गया उत्पाद रंग में गहरा भूरा या काला पड़ जाता है, धुल वैगरह भी लग जाती है तथा यह उत्तम गुण वाला नहीं रहता है। बानेशन, बॉम्बेग्रीन और दशहरी आम के गूदे का 25 डिग्री ब्रिक्स और अम्लता 0.5 प्रतिशत रखकर कैबिनेट शुष्कयंत्र में सूखाने से उत्पाद का स्वाद, शर्करा व अम्ल के लिहाज से उत्तम होता है। फल रस में पैक्टिन (बानेशान में 0.5 प्रतिशत) और दशहरी अरु बॉम्बेग्रीन में (0.75 प्रतिशत) मिलाने से आम पापड़ की गठन उत्तम पाई गई। फलों से पेय तैयार करना फलों से पेय तैयार करने हेतु यदि परिरक्षित गूदे या जूस का प्रयोग करें तो इसमें सिट्रिक अम्ल तथा पोटेशियम मेटाबाईसल्फाईट कम डालें क्योंकि ये पहले ही डाले जा चुके होते हैं। ताजा फलों के जूस व गूदे से विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट, पौष्टिक एवं मनभावक पेय बनाये जा सकते हैं। फलों के जूस से स्कवैश नेक्टर, शर्बत इत्यादी बनाये जा सकते हैं। परिरक्षित गूदे/जूस, से भी कई प्रकार के पेय तैयार किया जा सकते हैं। स्क्वैश यह पेय सबसे अधिक मनभावक और लोकप्रिय है। इसमें कम से कम 25 प्रतिशत फलों के गूदा/जूस, 40 – 50 प्रतिशत चीनी एवं एक प्रतिशत अम्ल होता है। आम संतरा, नींबू, बेल लीची, जामुन या मिश्रित फलों से स्कवैश तैयार किये जा सकते हैं तथा इनको खाद्य रसायन से सुरक्षित रख सकते हैं। पीने के लिए एक हिस्सा स्कवैश में तीन गुना पानी मिलाएं। नेक्टर नेक्टर एक अत्यंत लोकप्रिय पेय है। इसमें 10 -15 प्रतिशत फलों का जूस या गूदा, 10 – 15 प्रतिशत अम्ल होता है। पीने के लिए इसमें पानी नहीं मिलाते तथा इसे ऐसे ही पिया जाता है। आम, अनन्नास, अमरुद, नींबू, अंगूर, सेब, लीची, जामुन, आलू बुखारा आदि से या मिश्रित फलों से नेक्टर तैयार कर सकते हैं। मिश्रित नेक्टर ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होता है। नेक्टर को संरक्षित गूदे व जूस से भी बना सकते हैं। आम की मीठी चटनी आम की चटनी के लिए थोड़े कच्चे फलों को चुना आया है। इसके अंतर्गत फल को छीलकर फंकों में काट लिया जाता है। अब इन्हें उबलते पानी में दो मिनट तक रखकर फिर पानी में ठंडा करके बाहर निकाल लिया जाता है। परिरक्षक के उपचार के लिए इन्हें 1.5 प्रतिशत पोटेशियम मेटाबाइसल्फाइड के घोल में 15 मिनट तक रखना चाहिए। फिर धुप में या कैबिनेट शुष्कक यंत्र में सुखा लिया जाता है। सूखे आम की फांकों से लवणजल की अपेक्षा अच्छा अचार ही नहीं बनता। पूनर्जलयोजना के वास्ते सूखी आम की फांकों को पानी में 1:10 अनुपात में 10 मिनट तक गर्म करके फिर उसी पानी में 5 घंटे रखना चाहिए। अब इसे उचित मात्रा में नमक, चीनी और ऐसीटिक अम्ल में 680 ब्रिक्स तक पका करके, बोतलों में बंद कर देना चाहिए। स्क्वैश बनाने की विधि फलों का रस या गूदा तैयार करें। पानी व चीनी का घोल तैयार करें (सारणी – 1 के अनुसार) घोल तैयार करते समय अम्ल डाल लें व एक उबाल आने पर ठंडा कर लें। चीनी के घोल को कपड़े से छान लें तथा जूस में मिला दें, खाद्य रसायन (थोड़े से पानी घोलकर) डालें। स्क्वैश को साफ बोतलों में भरकर अच्छी प्रकार सील कर दें। (भरते समय बोतल में 1.2 – 2.5 सें. मी. जगह खाली रखें, बोतलों का भंडारण ठंडे स्थान पर रखें नेक्टर बनाने की विधि फलों का जूस/गूदा तैयार करें, कर्म करके चीनी व पानी का घोल तैयार करें। उबाल आने पर ठंडा करें तथा साफ कपड़े में छान लें। अब सारणी – 2 के अनुसार जूस को घोल बनाकर किटाणु रहित (गर्म पानी से उपचारित) बोतलों में ऊपर तक भरें तथा अच्छी तरह से सील करें। बोतलों को आधे घंटे तक उबले पानी में डूबोकर रखें, बाद में बोतलों का भंडारण ठंडे स्थान पर करें। टमाटर की सॉस (कैचप) टमाटो कैचप, टमाटर के जूस या गूदे को (बिना बीज व छिलके वाला) गाढ़ा करके बनाया जाता है। इसको कई मासलों, नमक चीनी, सिरका इत्यादि डालकर पकाया जाता है। इसमें टमाटर ठोस पदार्थ 12 प्रतिशत होना चाहिए। टमाटर का सूप सूप पौष्टिक, स्वादिष्ट एवं स्वस्थ्य होते हैं। इनमें विटामिन और खनिज काफी मात्रा में पाए जाते हैं। ये भूखे भी बढ़ाते हैं और अन्य सब्जियों के सूप की तुलना में टमाटर का सूप ज्यादा लोकप्रिय है। टमाटर का अचार व चटनी भारतीय भोजन में अचार व चटनी का विशेष स्थान है। अन्य सब्जियों की भांति टमाटर का अचार भी स्वादिष्ट होता है। अचार बनाने के की विधि सब्जियों की सुरक्षित रखने के लिए पुरानी परिरक्षण विधि हैं। अचार बनाने के अलग – अलग तरीके हैं जैसे तेल वाला, बिना तेल के सिरके वाला एवं सूखा अचार। कैचप बनाने की विधि पूरे पके टमाटर धोएं, छोटे टूकड़ों में काटें, 3 – 5 तक पकाएं व ठंडा करें, छलनी से गूदा या जूस निकालें, 1/3 हिस्सा चीनी या सभी मसलों की पोटली बनाकर डालें व टमाटर के जूस को पकाएं। पकाए समय बीच – बीच में पोटली को दबाते रहें ताकि उसका तत्व जूस में आ जाये। जब टमाटर का जूस 1/3 हिस्सा तक पकाने के बाद गाढ़ा हो जाये तो मसलों की पोटली निकाल कर उसका जूस निकालें, बाकी बची चीनी व नमक डालें और कुछ मिनट पकाएं, गाढ़े जूस में सिरका डालकर 5 मिनट तक पकाएं, सोडियम बेन्जोएट को थोड़े से पानी में घोल कर गर्म कैचप में मिलाएं। सूप तैयार करने की विधि टमाटर का गूदा या जूस छान लें, चीनी व नमक मिलाकर, उबालें तथा गाढ़ा करें, प्याज एवं लहसून गाढ़ा होने तक पकाएं। मसालों की पोटली बनाकर उबलते जूस में डालें, मक्खन और स्टार्च का पेस्ट बनाकर गाढ़े जूस में डालें तथा 2 मिनट तक पकाएं। मसालों की पोटली को निचोड़ कर उसका रस निकालें और सूप में मिला दें, बोतलों को उबलते पानी में 40 – 45 मिनट तक स्ट्रालाइज करें, गर्म – गर्म पियें या साफ बोतलों को साफ एवं ठंडी जगह पर रखें। टमाटर का आचार व चटनी तैयार करने की विधि सख्त पके हुए टमाटर लें, धोकर काट लें लहसून, अदरक, हरी मिर्च को तेल में भून लें और सभी पिसे मसालें भी मिलाकर गर्म कर लें, अब टमाटर के टूकड़ों में मिला दें, सिरका और बचा हुआ तेल डाल दें, (तेल को पहले गर्म करके ठंडा कर लें), साफ बोतलों से भरें और ठंडे सुरक्षित स्थान पर अचार की बोतलों को रखें। अमचूर कच्चा आम काफी खट्टा होता है, इसलिए अमचूर बनाने के लिए इसे ही इस्तेमाल किया जाता है। साधारणत: हवा में पेड़ से गिरा हुआ कच्चा आम ही अमचूर बनाने के काम में लाया जाता है। परंतु यदि पूर्ण विकसित कच्चा आम वैज्ञानिक ढंग से सुखाया जाये तो अच्छा अमचूर बनाया जा सकता है। सामान्यत: कच्चा और बीजू आम का छिलका उतारकर धुप में सुखा देते हैं। लोहे का चाकू इस्तेमाल करने से उत्पाद काला पड़ जाता है। छिलकारहित सूखा आम ही अमचूर कहलाता है। अमचूर चटनी बनाने और खटास देने वाला मसालों के रूप में दाल, साग आदि के बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। यह देखा गया है कि बीजू पेड़ पर फल लगने से 11 सप्ताह इसे सुखाना उपयुक्त रहता है। इस समय फल पूरी तरह से विकसित हो जाता है और गूदा सफेद रहता है। अम्लता और स्टार्च उच्च मात्रा में और शर्करा व फिनोलिक्स कम मात्रा में रहती हैं। अमचूर बनाने के लिए फल का छिलका स्टेनलेस स्टील के चाकू से उतारा जाता है और बाद में लंबी फांकों में काट लिया जाता है। अब इन्हें उबलते पानी में 2 – 5 मिनट और भाप में 5 मिनट के लिए डालना चाहिए। उसके बाद 15 मिनट के लिए 1.5 प्रतिशत पोटेशियम मैटाबाइसल्फाइट के घोल में रखकर शुष्कन यंत्र या फिर धुप में सुखाया जाता है। इस प्रक्रिया में अम्ल, एस्कार्बिक अम्ल और शर्करा का निक्षालन जरूर होता है, किन्तु उत्पाद उत्तम गुणवत्ता वाला बना रहता है। निर्जलित उत्पाद, धुप में सूखे उत्पादों की अपेक्षा बहुत अच्छा होता है। पूर्ण रूप से पका हुआ फल भी ओसेमोबेक और हिम शुष्कन विधि द्वारा सुखाया जा सका है। लेखन: राम रोशन शर्मा स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार