भूमिका मानव को स्वस्थ्य एवं निरोग रहने के लिए संतुलित भोजन आवश्यक हैं। इस भोजन में फलों एवं सब्जियों का विशेष महत्व है क्योंकि ये हमारे शरीर के लिए रक्षक भोजन है। इससे हमें ऐसे खनिज तत्व, विटामिन एवं अन्यान्य पोषक पदार्थ मिलते है जो शरीर की वृद्धि के साथ-साथ उसे निरोग रखने में सहायक होते है। इन तत्वों के कमी से शरीर में कुपोषण के लक्षण पैदा हो जाते है। भारत जैसे विकासशील देश में कुपोषण की समस्या बहुत ही जटिल है। हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर महिलाएँ एवं बच्चे कुपोषण की विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हैं। एक तिहाई बच्चे कम वजन के पैदा होते है तथा 60 प्रतिशत बच्चे खून की कमी से प्रभावित हैं। विटामिन ‘ए’ की कमी के कारण भी प्रतिवर्ष लगभग 20,000 बच्चे प्रभावित होते है। कुपोषण की समस्या गरीब एवं निम्न अर्थिक स्तर के लोगों में ज्यादा पायी जाती है। हमारे देश में एक हद तक लोगों को खाद्यान्य दाल एवं तेल से कार्बोहाइडेट्स, प्रोटीन और वसा तो उपलब्ध हो जाती है परन्तु विटामिन एवं खनिज लवणों की कमी बनी रहती है। कुपोषण की समस्या विटामिन एवं खनिज लवणों की कमी से ही अधिक होती है और इसे दूर करने के लिए आहर में सब्जियों एवं फलों का एक निर्धारित मात्रा में सम्मिलित होना बहुत जरूरी है। इनसे हमे खाद्य रेशा, खनिज लवण एवं विटामिन के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेटस, प्रोटीन और वसा तत्व प्राप्त होते है जो अन्य से नही मिलते। इसलिए सब्जियों एवं फलों को रक्षात्मक भोजन का नाम दिया गया है। भोजनशास्त्रियों एवं वैज्ञानिकों के अनुसार हमारा भोजन संतुलित तभी होगा जब प्रत्येक वयस्क अपने आहार में 300 ग्राम सब्जियों (100 ग्रा. पत्तेदार, 100 ग्रा. जड़ तथा 100 ग्रा. अन्य) एवं 65-80 ग्रा. फलों का सेवन करें। हमारे देश में शाकाहारी लोगों की संख्या अधिक हैं जिसके कारण हम अपने भोजन में सब्जियों की मात्रा बढ़ा सकते है। सब्जियों एवं फलों के उपयोग एवं उपलब्धता को बढ़ाने में गृहवाटिका या पोषण-वाटिका बहुत मददगार साबित हो सकती है। सभी घरों के आसपास थोड़ी बहुत जमीन अवश्य होती है जिसका उपयोग फल एवं सब्जियाँ लगाने में आसानी से किया जा सकता है। गृहवाटिका से प्राप्त फल एवं सब्जियाँ बिल्कुल ताज़ी होती हैं तथा पोषक मान विशेषकर विटामिन का स्तर बहुत ऊँचा होता है। इसके साथ-साथ विभन्न प्रकार के कीटनाशी जो कि सब्जी उत्पादक भारी मात्रा में डालते है उन्हें खाने से हम बच सकते हैं। गृहवाटिका लगाने से घर के सदस्यों के खाली समय का सही उपयोग हो जाता है और भोजन के लिए ताज़ी सब्जियाँ एवं फल भी मिलते रहते हैं। फलों से पोषण सुरक्षा फलों का पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण स्थान है। अनेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विकार जो विटामिन, खनिज लवणों आदि की कमी से होते है, फलों के निरंतर सेवन करने से समाप्त हो जाते हैं। फलों को हम अनेक रूपों जैसे कच्चा एवं सूखा – (काजू, बदाम, पिस्ता, अखरोट) परिरक्षित पदार्थ (स्क्वैश, चटनी, जैम, जैली, मार्मलेड, मुरब्बा इत्यादि) के रूप में प्रयोग कर सकते हैं परन्तु परिरक्षित रूप में इस्तेमाल करने से ताजे फलों की तुलना में कम पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। परिरक्षण के विभिन्न स्तरों पर उष्मा का इस्तेमाल होता है तथा कई विटामिन इसके लिए संवेदनशील होते है जिसके कारण पोषक तत्वों में कमी आ जाती है। अगर फल एवं सब्जी को कम से कम उष्मा से उपचारित करके उपयोग किया जाए तो पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में रहते हैं। पका पीला आम, पपीता, खुमानी और पीले आडू कैरोटीन के उत्तम स्त्रोत होते है जो शरीर में विटामिन ‘ए’ की पूर्ति करते हैं। आवला, अमरुद, बेर एवं नीबू वर्गीय फलों में विटामिन ‘सी’ अधिक होता है जबकि बदाम, काजू, पिस्ता में प्रोटीन पाया जाता है। वसा से भरपूर फलों में अखरोट, बदाम, काजू, पिस्ता महत्वपूर्ण हैं। कुछ प्रमुख फलों में पाए जाने वाले पोषक तत्व निम्न सारणी में दिए गए हैं। हमें इस बात का प्रयास करना चाहिए कि मौसमी फलों एवं ताज़ी सब्जियों का अधिक से अधिक उपयोग करें क्योंकि इनमें पोषक तत्व ज्यादा होते हैं जिनसे ज्यादा पोषण सुरक्षा मिलती है। फलों में पाए जाने वाले पोषक तत्व प्रमुख फलों में पाए जाने वाले पोषक तत्व (प्रति 100 ग्रा.) फल प्रोटीन (ग्रा.) कार्बोहाइड्रेट (ग्रा.) कैल्शियम (मि.ग्रा.) लोहा (मि.ग्रा.) कैरोटीन (मि.ग्रा.) थायमीन (मि.ग्रा.) विटामिन सी (मि.ग्रा.) आँवला 0.05 13.7 50.00 1.20 9.00 0.03 600.00 सेव 0.20 14.1 7.00 0.30 90.00 0.03 7.00 खुमानी 1.00 12.80 17.00 0.50 2700.00 0.03 7.00 केला 1.1 22.20 8.00 0.70 190.00 0.05 10.00 - अंगूर 0.5 16.50 20.00 0.50 - - 1.00 - अमरुद 0.10 9.00 50.00 1.20 - 0.02 15.00 नींबू 0.50 9.30 40.00 0.70 - - 50.00 आम 0.60 16.90 14.00 1.30 2743.00 0.05 15.00 संतरा 1.00 12.20 41.00 0.40 200.00 0.10 50.00 पपीता 0.60 7.20 17.00 0.50 566.00 0.04 57.00 आडू 0.60 9.70 9.00 0.50 1330.00 0.02 - चीकू - 28.00 1.20 97.00 - 6.00 - टमाटर 0.90 3.60 48.00 0.40 351.00 0.12 27.00 सब्जियों से पोषण सुरक्षा सब्जियों का भी संतुलित भोजन एवं पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण स्थान है। पोषक तत्वों की उपलब्धता एक सब्जी से दूसरी सब्जी में भिन्न होती है तथा इन्हें किस रूप में प्रयोग किया जाता है, इस पर भी प्राप्त होने वाले पौष्टिक तत्वों की मात्रा निर्भर करती है। ज्यादातर सब्जियों को जहाँ पकाकर खाया जाता है वही शलजम, मूली, गाजर, ककड़ी, प्याज, टमाटर, पत्तागोभी आदि को अक्सर कच्ची अवस्था में सलाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। तरबूज, खरबूज आदि को पकने के बाद फलों के रूप में खाया जाता है जबकि कुछ सब्जियों जैसे प्याज, लहसुन, अदरक, पोदिना, धनिया आदि को मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है। सब्जियों को विभिन्न प्रकार से प्रयोग करने जैसे कच्चा, पकाकर, भूनकर, सलाद के रूप में मसाले की तरह तथा ताज़ी व वासी अवस्था में खाने से इनसे प्राप्त होने वाले पोषक तत्वों में अंतर आता है सब्जियों से ज्यादा पोषक तत्व के लिए उन्हें कच्ची अवस्था में या उबालकर या कम पकाकर खाना चाहिए। मेथी, फूलगोभी, करेला, बैंगन आदि सब्जियों को सुखाकर बेमौसम में खाया जा सकता है। इसी प्रकार टमाटर, गाजर, मिर्च, फूलगोभी, मूली, करेला, आलू, पेठा आदि को सास, सिरका, चटनी, अचार, चिप्स, मुरब्बा, मिठाई आदि बनाकर खाने में उपयोग किया जा सकता है परन्तु ताज़ी हरी सब्जियों के प्रयोग से ज्यादा पोषण सुरक्षा मिलती है। कुछ प्रमुख सब्जियों में पाए जाने वाले पोषक तत्व निम्न सारणी में दिए गए है। प्रमुख सब्जियों में पाए जाने वाले पोषक तत्व प्रमुख सब्जियों में पाए जाने वाले पोषक तत्व (प्रति 100 ग्रा.) फल प्रोटीन (ग्रा.) कार्बोहाइड्रेट (ग्रा.) कैल्शियम (मि.ग्रा.) लोहा (मि.ग्रा.) कैरोटीन (मि.ग्रा.) थायमीन (मि.ग्रा.) विटामिन सी (मि.ग्रा.) चौलाई 4.0 6.1 397.00 25.5 5520.00 0.03 99.0 पालक 3.4 6.5 380.00 16.2 5862.00 0.26 70.00 मेथी 4.4 6.0 395.00 16.5 5862.00 0.26 70.00 पत्तागोभी 1.8 4.6 39.00 1.8 1200.00 0.06 124.0 सहजन पत्ती 4.4 6.0 395.00 16.5 2340.00 0.04 52.0 पोदीना 4.8 5.8 200.00 15.6 1620.00 0.05 27.0 शलजम 1.7 8.8 18.00 1.0 - 0.04 10.0 प्याज 1.2 11.1 47.00 0.7 - 0.08 11.0 मूली 0.7 3.4 35.00 0.4 3.00 0.06 15.0 शकरकन्द 1.2 28.2 46.00 0.8 6.00 0.08 11.0 करेला 1.6 4.2 20.00 1.6 126.00 0.07 88.0 बैंगन 1.4 4.0 18.00 0.9 74.00 0.04 12.0 फूलगोभी 2.6 4.0 30.0 1.5 30.00 0.04 56.0 लोबिया 3.5 8.1 72.00 2.5 564.00 0.07 14.0 सहजन फली 2.5 3.7 30.0 5.3 110.00 0.05 120.0 फ्रेचबीन 1.7 4.5 50.00 1.7 132.00 0.08 24.0 भिण्डी 1.9 6.4 66.00 1.5 52.00 0.07 13.0 मटर 7.2 15.9 20.00 1.5 83.00 0.25 9.0 कद्दू 1.4 4.6 10.0 0.7 50.0 0.05 2.0 तोरई 0.5 3.4 18.0 0.5 33.0 - 5.0 चिचिंडा 0.5 3.3 26.0 0.3 96.0 0.04 - आलू - - 10.0 0.4 24.0 - 17.0 फल एवं सब्जियों में पाये जाने वाले प्रमुख पोषक तत्व विटामिन ‘ए’ विटामिन ‘ए’ तथा आँख,त्वचा व शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक है। इस विटामिन की कमी से रात में अंधापन (रतौंधी), आँखों में लाली, त्वचा की बीमारी, बच्चों का बढ़वार रुकना जैसी बीमारियाँ हो जाती है। यह विटामिन बीटा कैरोटीन के रूप में पपीता, आम, कद्दू, चुकंदर, टमाटर तथा हरी पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। विटामिन ‘बी’ इस समूह के विटामिन में राइबोफ्लेबिन, निकोटिनिक एसिड, पेंटोथेनिकएसिड, फ़ॉलिक एसिड, विटामिन बी-12 आदि मुख्य हैं। इस समूह का सबसे महत्वपूर्ण विटामिन बी-1 या थायमिन है। इस विटामिन की कमी से ‘बेरी-बेरी’ रोग, भूख न लगना, शरीर के वजन में कमी आदि समस्याएं उत्पन्न होती है। यह विटामिन शरीर की वृद्धि, विकास तथा वंश विकास क्रियाओं में सहायक हैं। सलाद, पत्तागोभी, गाजर, प्याज, हरी सब्जियों में विटामिन ‘बी’ पाया जाता है। विटामिन ‘सी’ विटामिन ‘सी’ की कमी से ‘स्कर्वी’ नामक बीमारी होती है। इसके अलावा विटामिन ‘सी’ की कमी से दाँतों एवं मसूड़ों से खून निकलना, गठिया, शरीर के घावों कर देर से भरना, सर्दी –जुकाम तथा शरीर के प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आती है। विटामिन ‘सी’ मुख्य रूप से आँवला, अमरुद, नींबू वर्गीय फल जैसे – संतरा, नींबू, मुसम्मी, टमाटर तथा हरी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है। उच्च ताप एवं भंडारण समय का प्रभाव इस विटामिन पर ज्यादा पड़ता है तथा इसकी मात्रा में कमी आती है। लौह तत्व यह हमारे शरीर का एक प्रमुख तत्व है। यह ह्युमोग्लोबिन का मुख्य अंग है तथा यह शरीर में ऑक्सीजन को लेकर चलने में प्रमुख भूमिका निभाता है। हरी पत्तेदार सब्जियाँ लौह तत्व के प्रमुख एवं सस्ते स्त्रोत हैं। कैल्शियम कैल्शियम मुख्य रूप से दांत एवं हड्डियों में पाया जाता है। यह दिल की गति को समान्य रखने में तथा कोशिकाओं के संकुचन में प्रमुख भूमिका निभाता है। हरी पत्तेदार सब्जियाँ कैल्शियम का प्रमुख स्त्रोत है। फास्फोरस यह शरीर के ऊतकों की क्रियाओं के लिए आवश्यक है। कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीजनीकण के लिए फास्फोरस की आवश्यकता होती है। इस पौष्टिक तत्व की प्रचुर मात्रा आलू, गाजर, टमाटर, खीरा, करेला, पालक, फूलगोभी जैसी सब्जियों में पायी जाती है। खाद्य रेशा पाचकीय रेशा हमारे भोजन का अभिन्न अंग है और इसे फल एवं सब्जियों के द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियाँ, आँवला, अनार, सेब, केला आदि से रेशा प्रचुर मात्रा में मिलता है। रेशा बहुत सी बीमारियों जो मुख्यत: भोजन से सम्बन्धित है जैसे – मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियाँ आदि को भी कम करता है। कार्बोहाइड्रेट आलू, शकरकंद, मटर आदि सब्जियाँ तथा केला, एवोकैडो, आम आदि फल कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्त्रोत है। इनके प्रयोग से शरीर को शक्ति तथा कैलोरी प्राप्त होती है व शरीर स्वस्थ रहता है। प्रोटीन प्रोटीन एक महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व है। उत्तक तथा कोशिका निर्माण में प्रोटीन की मुख्य भूमिका है। शरीर की टूट-फुट एवं अनेक महत्वपूर्ण क्रियाओं के लिए प्रोटीन बहुत उपयोगी तत्व है। प्रोटीन की प्राप्ति मटर, सेम, बाकला, फ्रेंचबीन, चौलाई आदि सब्जियों से होती है तथा बादाम, काजू, पिस्ता एवं फलों में प्रोटीन का अंश काफी मात्रा में होता है। फल एवं सब्जियाँ मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि के लिए भी अत्यंत उपयुक्त माध्यम है। अनुसंधान से पता लगाया गया है कि यदि खाद्यान्य फसलों के स्थान पर अथवा खाली पड़े हुए बंजर, परती एवं बेकार जमीन पर फलदार पौधों की खेती की जाय तो उससे खाद्यान्य फसलों की तुलना में 2-3 गुणा ज्यादा आमदनी प्राप्त होता है। इन्हीं बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए झारखंड राज्य में मौजूद भौगोलिक एवं भूस्तरीय दशाओं के अनुरूप प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग द्वारा फलों की उन्नत खेती के लिए आवश्यक जानकारी एवं सुझाव दिया जा रहा है। आशा है कि इसमें दी गयी जानकारी यहाँ के कृषकों एवं नीति निर्धारकों को क्षेत्र में फल उत्पादन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्रोत: समेति, कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार