मौसमी फूल वे होते हैं जिनका जीवनक्रम एक ही मौसम का होता है। किसी भी उद्यान को थोड़े समय में ही मौसमी पुष्पों से रंग-बिरंगा व सुंदर बनाया जा सकता है। सालों भर होने वाले फूलों के पौधों की अपेक्षा मौसमी फूलों के पौधों से लगातार दो या तीन माह में ही फूलों से आच्छादित एक भरा-पूरा उद्यान सफलतापूर्वक बनाया जा सकता है। मौसमी पुष्पों का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे आसानी से उगाये जा सकते हैं। मौसमी फूल मुख्यत: शीत ऋतु, ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु में लगाए जाते हैं। इन्हें सीधे बीज से या बिचड़े तैयार कर लगाया जाता है। बीज से लगाये जाने वाले मौसमी फूलों के बीज सीधे क्यारियों में गिरा देते हैं और अंकुरण के बाद अतिरिक्त पौधों को सावधानीपूर्वक निकाल देते हैं। बिचड़े तैयार करने के लिए 1 मीटर चौड़ी और 3 से 5 मीटर लम्बी पौधशाला तैयार करते हैं। भली प्रकार से मिट्टी तैयार करके उसमें भरपूर जैविक खाद देते हैं। सिंचाई करके पर्याप्त नमी होने परबीज डालकर हल्के से मिट्टी में मिला देते हैं और बालू एवं छनी हुई पत्ती की खाद के मिश्रण से हल्का ढँक देते हैं। अंकुरण के बाद नियमित सिंचाई करते हैं। बिचड़े जब लगभग चार सप्ताह के हो जायें तब इन्हें क्यारियों में रोपना चाहिए। रोपाई हमेशा दोपहर के बाद करनी चाहिए एवं रोपाई के बाद नियमित सिंचाई करते रहनी चाहिए। क्यारियों को तैयार करते समय प्रति 10 वर्गमीटर के लिए 20-50 किलो गोबर की खाद, 500 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 165 ग्राम म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश, 275 ग्राम यूरिया देना चाहिए। इन उर्वरकों को मिट्टी में अच्छी प्रकार से मिलाकर क्यारियों को तैयार करना चाहिए। बिचड़े लगाने के बाद नियमित निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए एवं एक दो माह के अंतर पर यूरिया का उपरिवेशन करना चाहिए। अच्छे फूल और अधिक पुष्पण प्राप्त करने के लिए मुरझाये फूलों को तोड़कर छंटाते रहना चाहिए। शीतकालीन मौसमी फूल शरदऋतु के फूलों की संख्या अन्य ऋतुओं की अपेक्षा अधिक होती है। वास्तव में देखा जाए तो जाड़ों में ही फूलों की बहार रहती है। शीतकालीन मौसमी फूल सितंबर-अक्टूबर में लगाये जाते हैं तथा नवंबर-दिसंबर से मार्च तक फूलते हैं। झारखंड में उगाए जाने वाले शीतकालीन मौसमी फूल इस प्रकार हैं: स्वीट एलाइसम, एंटरहिनम, कैलेंडुला, एस्टर, कार्न फ्लावर, स्वीट सुलतान, क्राईसेंथेमस, कॉसमास, डहलिया, लार्कस्पर, डायन्थस, कार्नेशन, स्वीट विलियम, कैलिफोर्निया पॉपी, कैन्डीटफ्ट, स्वीटपी, पेटूनिया, पॉपी, फ्लाक्स इत्यादि। ग्रीष्मकालीन मौसमी फूल इस ऋतु में अपेक्षाकृत कम मौसमी फूल पाए जाते हैं। अधिकतर पौधों के बिचड़े तैयार कर लगाये जाते हैं। गर्मी के फूलों वाले ये पौधे वसंत ऋतु में लगाये जाते हैं तथा अप्रैल से जून-जुलाई तक फूलते हैं। इस ऋतु के प्रमुख मौसमी फूल इस प्रकार हैं: एमारैंथस, कास्मिया, कोचिया, क्लियोम, गोम्फ्रेना, जिनिया, गैलार्डिया, टोरेनिया, पोर्टुलाका, सिलोशिया, सूर्यमुखी, इत्यादि। वर्षाकालीन मौसमी फूल इस ऋतु में ग्रीष्म ऋतु के ही अधिकतर मौसमी फूल लगाये जाते हैं। ये फूल जून-जुलाई में लगाये जाते हैं और वर्षा ऋतु में खिलते हैं। इस ऋतु के प्रमुख मौसमी फूल इस प्रकार हैं: एमारैंथस, कास्मिया, कोलियस, कैलियोपासिस, गोम्फ्रेना, गैलार्डिया, टोरेनिया, बालसम, इत्यादि। पौधा लगाने की विधि इस वार्षिक पौधों को लगाने की दो विधियाँ प्रचलित हैं – एक जिसमें एक क्यारी में एक ही रंग एवं एक ही प्रकार के फूल लगाते हैं और दूसरी जिसमें विभन्न रंगों के मिश्रित फूलों को एक ही क्यारी में ऊँचाई के अनुसार लगाते हैं। इसमें बड़े पौधों को पीछे, बीच में मध्यम ऊँचाई के तथा सामने सबसे छोटे पौधों को लगाया जाता है। क्यारियों में लंबे, मध्यम एवं छोटे पौधों का अनुपात क्रमश: 5:3:2 या 6:3:1 रखते हैं। क्यारियों को लम्बाई के हिसाब से तैयार करते हैं। परन्तु, इसकी चौड़ाई लगभग 1-1.5 मीटर रखते हैं। (क) पौधशाला में बीज डालना – मौसमी फूलों के बीज साधारणतया छोटे होते हैं। अत: इसकी अच्छी देखभाल के लिए उचित स्थान पर लगाते हैं। बीजों को मात्रा के अनुसार गमलों में, बक्सों में या ऊँची क्यारियों में लगाते हैं। नर्सरी के लिए क्यारियों को जमीन से 10-15 सें.मी. ऊँचाई पर बनाते हैं। क्यारियों की चौड़ाई लगभग 1 मीटर रखते हैं जिससे कि घास निकालने, पानी डालने एवं पौधों की सघनता को कम करने में सुविधा होती है। नर्सरी के लिए क्यारियों की लम्बाई लगभग 2-3 मीटर रखनी चाहिए। मिट्टी को तैयार करते वक्त 10-15 किलो प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट डालना चाहिए। मिट्टी जनित रोगों की रोकथाम हेतु प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम की दर से बने ब्रासीकाल या कैप्टान के घोल को मिट्टी में मिलाना चाहिए। बीज को पंक्ति में 5-6 सें.मी. की दूरी पर तथा 0.5 सें.मी. गहराई पर लगाना चाहिए। सामान्यत: बीजों के आकार पर उसकी गहराई निर्भर करती है। बीजों को लगाने के उपरांत महीन छिद्र वाली चलनी से छानी हुई कम्पोस्ट या खाद को उसके ऊपर डालते हैं। दिन में दो-तीन बार पानी का छिड़काव करना चाहिए। अच्छे अंकुरण के लिए क्यारियों को अखबार के पन्ने या हल्के कपड़े से ढँककर अँधेरा करते हैं। क्यारियों के बाहरी किनारों पर फालीडाल डस्ट या लिन्डेन डस्ट का छिड़काव करते हैं जिससे चीटियाँ बीजों को नहीं खा पाती हैं। जब बीजों से अंकुरण होने लगता है तब उसके ऊपर रखे अखबार या कपड़े को हटा देते हैं। बिचड़े लगभग एक महीने में रोपने योग्य हो जाते हैं तथा उस समय तक तीन-चार पत्तियाँ आ जाती हैं। (ख) जमीन तैयार करना एवं बिचड़ा लगाना – खेतों की अच्छी तरह से जुताई करने के बाद प्रति 10 वर्ग मीटर के लिए 20-50 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद, 500 ग्राम सिगल सुपर फास्फेट, 165 ग्राम म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश और 275 ग्राम यूरिया मिलाना चाहिए। बिचड़ों को उखाड़ने के पहले हल्की सिंचाई कर देते हैं जिससे कि ये क्यारी में जल्दी लग जाएँ। बिचड़ों को शाम के समय ही उखाड़ना चाहिए। लम्बे, मध्यम एवं बौने पौधों को क्रमश: 30-40 सें.मी., 15-20 सें.मी. एवं 10-12 सें.मी. की दूरी पर लगाते हैं। बिचड़ों को लगाने के तुरन्त बाद पानी डालना चाहिए। उन्नत किस्में (1) एक्रोक्लाइनम – गोलिएथ, एल्बो, रोज, रोज ऐन्ड वाइट। (2) एजरेटम – ब्लू मेरी, मिडगेट ब्लू, फेयरी पिंक, परफेक्सन, समर स्नो, ब्लू बेडर, ब्लू मॉन्क। (3) एन्टरहिनम – टॉम थम्ब, मैजिक कार्पेट, ग्लेशियर, हाइनुन, रोजावेल वालकेनो, केवेलियर, गार्डमेन, कमान्डर, सनलाइट, टेम्पल, टिंकल बेल, जुलीआना, मैक्सिमम आर्किड, मैक्सिमम स्कारलेट, मैक्सिमम येल्लो। (4) आर्कटॉटिस – सटन ट्रिम्फ (5) कैलेन्डुला – गोल्ड स्टार, याशिमा, मुराजी, पैसिफिक व्यूटी, गोल्डेन जेम, ऑरेन्ज जेम, लेमन जेम, क्राइसेंथा, ऑरेन्ज, क्रीम ब्यूटी, गोल्ड फिंक, रेडियो, क्रिस्टेड, येल्लो कोलोसाल, गोल्डेन इम्पेरर, लेमन कोरोनेट, ऑरेन्ज कोरोनेट। (6) एस्टर – पूर्णिया, वायलेट कुसन, कामिनी, फूल गणेश, वाइट शशांक, फूल गणेश वायलेट, फूल गणेश पिंक, फूल गणेश पर्पल, कॉमेट, अमेरिकन ब्यूटी, क्वीन ऑफ़ द मार्केट, अर्ली बर्ड, ब्लू वंडर, बकेट पाउडर पफ, बकेट मिड ब्लू। (7) स्वीट सुल्तान – एल्बा, फेबोरीटा, ओडेरेटा, ग्रेसियोसा, स्पलेंडन्स सुआवियोलेन्स। (8) एनुअल क्राइसेन्थिमम – मैनिंग स्टार, इवनिंग स्टार, इस्टर्न स्टार, बलेन्का, ग्लेरिया, इसाबेल, रोमियो, येल्लो स्टोन, निविया, एल्वो, गोल्डेन क्राउन, टेट्रा कॉमेट, मैरी इक्लिप्स, जॉन ब्राइट, नार्दन स्टार। (9) कॉसमॉस – फिस्ता, ऑरेन्ज फ्लेम, ऑरेन्ज रफेल, मैंडरीन। (10) कास्मिया – प्यूरिटी, डेजलर, ग्लोरिया, पिंक सेन्सेशन, रैडियेन्स, भरसेल्लेस। (11) लार्कस्पर – ब्लू बेल, ब्लू स्पाइरी, लीलेक स्पाइरी, कार्मीनकिंग, डेजलर, लिलेक इम्प्रुव्ड, लॉस एंजेल, मिस कैलिफोर्निया, रोजावोंडा, वाइट किंग, रीगल, एल्टी, फ्लेमेन्गो। (12) डायंथस – पिंक फ्लेस, स्नो स्टॉर्म, फायर स्टॉर्म, ओरिएंटल कार्पेट, ब्लू पीटर, सेलमोन क्वीन, रोड वेडगर, मिस मिवाको, न्यू मिकाडो, स्कारलेट क्वीन, रीच क्रिमसन, ब्रेभो, ब्लेक प्रिंस, फायर बाल, पिंक ब्यूटी, सेलमोन किंग, स्नो ड्रिफ्ट, स्नोवाल। (13) कैंडीटफ्ट – आइसबर्ग, इम्प्रेस, वाइट पेनिकल, सैम्पर वायरेन्स वाइट, जाइंट हायसेंथ फ्लावर, वाइट स्पाइरल। (14) डाइमाफोर्थिका – सैल्मोन ब्यूटी, बफ ब्यूटी, वाइट ब्यूटी, आरेन्ज इंम्प्रुव्ड, ऑरेन्ज ग्लोरी, लासबेगम, ऑरेन्ज ग्लोरी। (15) हेलीक्राईसम – फायर वाल, ल्युटम, परपुरम, रोजम, टाल डबल, ड्वार्फ डबल, मॉनस्ट्रोसम, बकेट मिक्स, स्वीस जाइंट मिक्स। (16) हॉलीहॉक – दीपिका, दुल्हन, गौरी, पुसा हालीहॉक श्वेता, पूसा हालीहॉक कृष्णा, पूसा हॉली हॉक लालिमा, पूसा हॉली हॉक गुलाबी, पाउडर पफ। (17) गजेनिया – मिनिस्टर, सन साइन, डेब्रेक ब्राइट ऑरेन्ज, डेब्रेक ब्राइट येल्लो, डेब्रेक गार्डेन सन। (18) ल्यूपिन – एल्बस, जाइंट किंग, टेक्सानस, डार्कब्लू, अजुरी ब्लू, पिक्सी डिलाइट, रोजस। (19) जिप्सोफिला – सिंगल वाइट, डबल वाइट, पैसफिक, अर्ली स्नोबाल, रीपेन्स रोजिया। (20) शार्ली पॉपी – शार्ली, स्वीट ब्रीयर, अमेरिकन लिगन। (21) लाइनेरीया – नार्थ लाइट, फेयरी वकेट, इक्सेल्सर। (22) पैंजी – यूनिवसल, हैपी फेस, क्रिस्टल, सुपर मैजेस्टी, मैजेस्टी, सुपर स्वीस जाइंट, मास्टर पीस, एपेनग्लो, ब्लेक प्रिंस, यल्लोक्वीन, पर्पल क्वीन। (23) पिटुनिया – रोयाल्टी, ब्रुपीस रोयल्टी, पीचरेड, स्नोवाल, फायर चीफ, लेडीबर्ड, बींगो, डजलर, क्रिम स्टार, पर्पल प्रिंस, सुपर फ्रिल्स, रामोना, पॉपकार्न। (24) फ्लाक्स – ट्विंकल, आर्टशेड, एलवा, ब्रिलिएंट, कोकसिनिया, वरमिलन, ग्लोव ब्यूटी, ग्लैमर, टेट्रा रेड। (25) पोर्टुलाका – मैजिक कार्पेट, सनीशेड, डबल रेड, ज्वेल। (26) साल्विया – सटन फायर बाल, हुसार, पायरेट, आर्ली बोनफायर, रेड पीलर, हाट जाज, सैल्मोन पीग्मी, पनोरमा, अमेरिका, संत जॉन फायर, फायर ड्वार्फ, भापलेट क्वीन। (27) स्वीट पी – गैन्डीफ्लोरा, लीटिल स्वीट हॉट, स्पेन्सर, फ्रिल्ड, मल्टीफ्लोरा। (28) भेनेडियम – चेयरफूल ऑरेन्ज, चेयरफूल बाइट। (29) स्वीट एलाइसम – ओरीएन्टल नाइट, लीटील जेम, लीलेक क्वीन, रोयाल कार्पेट, स्नो कार्पेट, पिंक हिटर, वायलेट क्वीन, स्नोक्लोथ, टेट्रा स्नोड्रिफ्ट। (30) नस्ट्रेशियम – डबल ड्वार्फ ज्वेल, वाइट बर्ड, ग्लेम। (31) अमरैन्थस – अमर किरण, अमर मैजिक, अमर पोएट, अमर पार्वती, अमर सुकिरण, अमर तीरंगा, फ्लेम, पीग्मी टॉच, रेड फ़ॉक्स, मोल्टेन फायर। (32) बालसम – रोज फलावर, रोयाल बालसम, टॉल डबल, टॉम थम्ब, डबल कैमेलिया फ्लावरर्ड, एसेन्ट, सुपर इल्फीन। (33) गैलार्डिया – इंडियन चीफ, लॉलीपॉप यल्लो, लॉलीपॉप ऑरेन्ज, सनसाइन स्ट्रेन, डबल टेट्रा फिस्टा, ब्रमेन, बारगेन्डी, ग्लोबीन, सनगुनिया। (34) गोम्फ्रेना – लीलीपुट बुडी, ड्वार्फ बुडी पर्पल, क्रिजी, ड्वार्फ वाइट। (35) सिलोसिया – रेड फ़ॉक्स, एप्रीकाट ब्रान्डी, फायर ग्लो, गोल्डेन फेदर, पम्पास पल्म, मौग्नीफिका, सिल्वर फेदर, लीलीपुट, ज्वेल बाक्स, इम्प्रेस, फेन्सी पल्म। (36) तोरीनिया – पान्डा, डचेस बागेन्डी, डचेस पिंक। (37) टीथोनिया – रेड टॉच, यल्लो टॉच, टाल आरेन्ज, ड्वार्फ आरेन्ज, गोल्ड फिंगर। (38) जिनिया – पोलर वियर, र्स्कालेट फ्लेम, गोल्डेन बाल, सैल्मोन ब्यूटी, कैन्डीकेन, लीलीपुट। (ग) पौधों का प्रबंधन – ये पौधे बहुत ही कोमल होते हैं अत: इनकी उचित देखभाल की जरूरत होती है। क्यारियों से समय-समय पर घास निकालते एवं मिट्टी हल्की करते रहना चाहिए। समय-समय पर उचित मात्रा में पानी देना चाहिए। गर्मी में 4-5 दिनों पर, जाड़े में 10-12 दिनों पर एवं बरसात में अगर कम पानी हो तब सिंचाई करते हैं। हल्की मिट्टी में पानी की जरूरत ज्यादा होती है। बिचड़ों को लगाने के एक महीने बाद 100 ग्राम यूरिया की दूसरी मात्रा का उपनिवेश करना चाहिए। (घ) बीज संग्रहण एवं संरक्षण – वार्षिक पौधों के बीज संग्रहण एवं संरक्षण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पौधों के बीजों की शुद्धता को बनाये रखने के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि फूल स्वयं परागित, आंशिक परपरागित या पूर्णत: परपरागित हैं या नहीं। स्वपरागित पौधों यथा-लूपिन, स्वीट पी, साल्विया में दूरी रखने की जरूरत नहीं है। आंशिक परपरागित पौधों, जैसे कि एंटीरहीनम, लार्कस्पर, लाइनेरिया, फ्लाक्स एवं पैन्जी में दूरी 50-100 मीटर से ज्यादा रखते हैं। आंशिक परपरागित पौधों में बालसम, जीनिया, गोम्फ्रेना, कॉक्सकंब, सूर्यमुखी, पोर्टुलाका, गैलार्डिया, स्वीट एलासम, कैलेन्डुला, कॉर्नफ्लावर, स्वीट सुल्तान, गुलदाउदी, कॉसमॉस, डहलिया आदि भी आते हैं। बीज का संग्रहण उचित परिपक्वता होने पर उसकी फली फटने से पहले करना चाहिए। बीज को उचित कीटनाशकों से उपचारित करने के बाद हवा बंद डब्बों या थैलों में रखना चाहिए। कीट तथा बीमारियाँ – फूलों में अधिकतर माहू (एफिड) तथा सुंडी (केटरपीलर) से अधिक क्षति पहुंचती है। इनके प्रकोप को कम करने के लिए जुताई के समय 5 प्रतिशत लिन्डेन के पाउडर का छिड़काव करना लाभदायक है। अन्य कीड़ों के नियंत्रण के लिए मैलाथियान (2 मिली0 दवा एक लीटर पानी में) के घोल का छिड़काव लाभदायक रहता है। नर्सरी में प्राय: आर्द्रगलन बीमारी आती है। यदि उपर्युक्त विधि के अनुसार बीज की बोआई की जाए तो बीमारी आने की संभावना कम हो जाती है। इस बीमारी के प्रकोप से पौधे नीचे से गल कर सूख जाते हैं। नियंत्रण के लिए 2 ग्राम कैप्टान या वेवस्टीन दवा का एक लीटर पानी में बने घोल का छिड़काव बहुत उपयोगी है। कभी-कभी ब्लाइट के प्रकोप से कारनेसन के पौधे सूखने लगते हैं। नियंत्रण के लिए फाइटोलोन या बोर्डो मिश्रण (5:4:50) के घोल का छिड़काव लाभदायक है। बोर्डो मिश्रण का तात्पर्य क्रमश: कॉपर सल्फेट, चूना एवं पानी के मिश्रण से है। बालसम तथा एस्टर के पौधे पाद विगलन की बीमारी के कारण सूख जाते हैं। चेस्टनट (अमोनियम कार्बोनेट -2 भाग, कॉपर सल्फेट-2 भाग मिलाकर 24 घंटे रखकर) 28-35 ग्राम के दो गैलन पानी में बने घोल का छिड़काव या जड़ में डालने से लाभ होता है। एस्टर में वायरस की बीमारी आती है। उसके लिए वायरसरहित किस्मों का ही प्रयोग करना चाहिए। जाड़े में लगाये जाने वाले फूलों की सूची क्र.सं. फूल का नाम पौधे की ऊँचाई (सें.मी.) प्रसारण विधि बोआई/ रोपाई की दूरी (सें.मी.) फूलने का समय (माह) फूलों का रंग अभ्युक्ति 1 एक्रोक्लाईनम 40-70 बीज 15-20 3 गुलाबी एवं सफेद फूल इकहरे दोहरे, आंतरिक सज्जा हेतु। 2 हॉली हॉक 120-180 बीज 30-45 3-4 सफेद, गुलाबी, पीला, लाल प्रदर्शनी एवं बार्डर में पीछे लगाने हेतु। 3 स्वीट एलाईसम 10-30 बीज/बिचड़ा 15 1.5-2 सफेद, बैंगनी, गुलाबी क्यारी एवं गमले में। 4 एन्टरहिनम 15-120 बिचड़ा 20-40 2.5-4 सफेद, पीला, गुलाबी क्यारी, गमले एवं गुलदस्ते में। 5 आर्कटोटिस 35-40 बिचड़ा 30-40 3-4 सफेद, हल्का पीला क्यारी एवं गुलदस्ते। 6 कैलेन्डुला 30-50 बिचड़ा 20-30 2-3 पीला, नारंगी गमले, क्यारी एवं गुलदस्ते। 7 एस्टर 40-50 बिचड़ा 20-40 3-4 सफेद, गुलाबी, नीला क्यारी, गमले, गुलदस्ते। 8 कार्नफ्लावर 60-90 बिचड़ा/बीज 20-25 3.3.5 सफेद, गुलाबी, बैंगनी, नीला क्यारी, गुलदस्ते। 9 स्वीट सुल्तान या कार्नफ्लावर 45-60 बिचड़ा/बीज 30 3-3.5 सफेद, पीला, बैंगनी क्यारी, गमले, सुंगधित, गुलदस्ते। 10 एनुअल क्राईसैन्थेमम 45-75 बिचड़ा/बीज 30-45 3 सफेद, पीला क्यारी एवं खुले फूल 11 कॉसमॉस 60-150 बिचड़ा/बीज 30-45 2-3 सफेद, गुलाबी, लाल, पीला एवं बैंगनी गुलदस्ते के लिए सालो भर उगाने योग्य। 12 डहलिया 30-150 बीज, कर्त्तन एवं कंद 30-45 3.3.5 सफेद, पीला, लाल, कत्थई मिश्रित क्यारी, गमला, गुलदस्ता। 13 लार्कस्पर 30-100 बिचड़ा/बीज 20-30 3.3.5 नीला, सफेद, गुलाबी, पीला एवं बैंगनी गमला, क्यारी एवं गुलदस्ता। 14 डायंथस 30-40 बिचड़ा/बीज 30-40 3-4 सफेद, लाल, गुलाबी, पीला एवं बैंगनी क्यारी एवं गुलदस्ता। 15 कार्नेशन 45-75 बिचड़ा/बीज 30-40 3-4 सफेद, गुलाबी, पीला, लाल मिश्रित सुगंधित फूल, क्यारी गुलदस्ते। 16 जिप्सोफिला 60-90 बीज 20-30 3 सफेद, गुलाबी, पीला क्यारी एवं खुले फूल। 17 हेलिक्राईसम 70-90 बीज 30-40 3-3.5 पीला क्यारी एवं खुले फूल 18 कैंडीटफ्ट 30-40 बीज 15-20 2-2.5 सफेद, गुलाबी गमले एवं बॉर्डर में लगाने के लिए। 19 स्वीट पी 30-150 बीज 30-100 3 सभी रंग एवं मिश्रित बॉर्डर एवं प्रदर्शनी हेतु, सहारा की आवश्यकता। 20 लाईनेरीया 30-40 बीज 15-20 3 सभी रंगों एवं दोहरे रंग में गमले एवं क्यारी 21 मेसेम्व्रेन्थम (आइस प्लान्ट) 10-20 बिचड़ा/बीज 15-20 3 सभी रंग एवं मिश्रित धूप वाले स्थानों में। 22 पिटुनिया 30-45 बीज/बिचड़ा 20-25 3 लाल, सफेद, गुलाबी, बैंगनी गमले एवं क्यारी 23 फ्लाक्स 30-45 बीज/बिचड़ा 20-25 3-3.5 सभी रंग बार्डर, गमले एवं बास्केट। 24 कैलिफोर्निया पॉपी 30-45 बीज/बिचड़ा 20 3-3.5 पीला, नारंगी समूह में लगाने के लिए। 25 शार्ली पॉपी 45-60 बीज/बिचड़ा 20-30 2-2.5 सफेद, लाल, गुलाबी समूह में लगाने के लिए। 26 अफ़्रीकी गेंदा 60-120 बीज/बिचड़ा 30-45 3 पीला, नारंगी क्यारी एवं खुले फूल, गमलों एवं माला एके लिए। 27 फ्रेंच गेंदा 30-40 बीज/बिचड़ा 20-30 2.5.-3 लाल, पीला, नारंगी क्यारी एवं खुले फूल, गमलों एवं माला के लिए। 28 सालविया 45-60 बीज/बिचड़ा 30 3 लाल, सफेद, गुलाबी क्यारी एवं रॉकरी। 29 नास्टरशियम 30-45 बीज 20 2.5.-3 पीला, नारंगी, लाल बेड एवं रॉकरी। 30 वरबीना 25-40 बीज 20-25 2.5.-3 नीला, बैंगनी, लाल गमला, क्यारी, झूलते बक्से एंव रॉकरी। 31 पैन्जी 20 बीज/बिचड़ा 25-30 2.5.-3 मिश्रित रंग एवं सभी रंग धूपदार स्थान, गमला एवं क्यारी। 32 गजेनिया 25-40 बिचड़ा 20-30 3 लाल, पीला, गुलाबी क्यारी एवं गमले में। 33 क्लीयोम 50-100 बिचड़ा 50-75 2-3 गुलाबी, लाल, बैंगनी, सफेद क्यारियों एवं बोर्डर में। 34 सिनरेरिया 30-45 बिचड़ा 30-45 2-3 गुलाबी, बैगनी, लाल गमले एवं क्यारियों में लगाने हेतु। 35 एजरेटम 20-30 बिचड़ा 20-30 2 बैंगनी, सफेद क्यारियों एवं गमले में लगाने हेतु। 36 डाइमाफोर्थिका 30-40 बिचड़ा 30-45 3 सफेद, गुलाबी, पीला क्यारियों एवं गमले में लगाने हेतु। 37 ल्यूपिन 40-50 बिचड़ा 30-45 2-3 सफेद, बैंगनी, गुलाबी गमले एवं क्यारियों में लगाने हेतु। 38 पोटुलाका 10-20 बीज 10-20 2 पीला, गुलाबी, बैगनी क्यारियों में लगाने हेतु। गर्मी वाले मौसमी फूल क्र.सं. फूल का नाम पौधे की ऊँचाई (सें.मी.) प्रसारण विधि बोआई/ रोपाई की दूरी (सें.मी.) फूलने का समय (माह) फूलों का रंग अभ्युक्ति 1 अमरैंथस 60-75 बिचड़ा 30-40 3 गुलाबी, सफेद एवं लाल मुख्यत: रंग बिरंगे पत्तियों के लिए, गमले एवं आंतरिक सज्जा हेतु। 2 गैलार्डिया 30-45 बिचड़ा/बीज 20-25 3-3.5 लाल, पीला प्रत्येक ऋतु में उगाने योग्य, गर्मी को सहने योग्य। 3 गोम्फ्रेना (बटन फ्लावर) 30-60 बिचड़ा 25-30 2-2.5 गुलाबी, सफेद, बैंगनी उपरोक्त सभी। 4 पोर्टुलाका 10-25 कटिंग 15-20 2-2.5 सभी रंगों में एवं मिश्रित रंग गमलों में झूलते बक्सों एवं झुंड में लगाने हेतु। 5 कोचिया 60-75 बिचड़ा 30-45 - हरी महीन पत्तियों की शोभा गमलों के लिए। 6 जिनिया 40-90 बिचड़ा 30-45 2-3 नीला छोड़कर सभी रंग कड़े पौधे जो आसानी से लम्बी अवधि तक उगाये जा सकते है। 7 सिलोसिया 45-75 बिचड़ा 50-90 2-3 लाल, गुलाबी, पीला, नारंगी झुण्ड में लगाने के लिए, बहुत बठोर एवं लम्बी अवधि हेतु। 8 सूर्यमुखी 45-150 बीज 45-90 2-3 पीला, नारंगी, ताम्र खुले धूपदार स्थानों में लगाने के लिए एवं सालों भर उगाने योग्य। वर्षा वाले मौसमी फूल क्र.सं. फूल का नाम पौधे की ऊँचाई (सें.मी.) प्रसारण विधि बोआई/ रोपाई की दूरी (सें.मी.) फूलने का समय (माह) फूलों का रंग अभ्युक्ति 1 गोम्फ्रेना (बटन फ्लावर) 30-60 बिचड़ा 25-30 2-2.5 गुलाबी, सफेद प्रत्येक ऋतु में उगाने योग्य एवं सूखा सहने की क्षमता। 2 गैलार्डिया 45-60 बिचड़ा 20-25 3-3.5 पीला, नारंगी, भूरा उपरोक्त 3 बालसम 30-60 बीज 20-30 2-2.5 सभी रंगों में कम समय में पहले फूल आने वाले बहुत कोमल पौधे। 4 कैलियोपसिस 45-60 बिचड़ा 30-40 3-3.5 मिश्रित रंग सभी मौसमों के लिए। 5 टीथोनिया 70-150 बीज 30-40 3-3.5 नारंगी, सिंदुरी बीज को सीधे खेतों में लगाते है। 6 विन्का रोजिया (सदाबहार) 60-75 बीज 30-50 3-3.5 सफेद, गुलाबी सालों भर उगाने योग्य। 7 कोलियस 40-90 बीज 30-50 3-3.5 मिश्रित रंग सुंदर आकर्षक मिश्रित रंगों वाले पत्ते। 8 तोरीनीया 20-30 कटिंग/बिचड़ा/ बीज 20 2-3 सफेद, बैगनी, गुलाबी क्यारियों में झुंड में लगाने हेतु। 9 टीथोनिया 30-50 बीज 30-45 2-3 पीला, लाल गमलों एवं क्यारियों के लिए उपयुक्त। स्त्रोत: रामकृष्ण मिशन आश्रम, दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, राँची।