<h3 style="text-align: justify;">सिंचित क्षेत्र के लिए उर्वरक की मात्रा</h3> <p style="text-align: justify;">सिंचित क्षेत्र के लिए 80 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 40-50 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 40 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर एवं बारानी क्षेत्रों के लिए 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 30 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 30 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। बुआई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्र तथा फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्र लगभग 3-4 सें.मी. की गहराई पर डालनी चाहिए। नाइट्रोजन की बची हुई मात्र अंकुरण से 4-5 सप्ताह बाद खेत में बिखेरकर मृदा में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। </p> <h3 style="text-align: justify;">पर्याप्त नमी</h3> <p style="text-align: justify;">अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है। पौधों में फुटाव होते समय, बालियां निकलते समय तथा दाना बनते समय नमी की कमी नहीं होनी चाहिए। बालियां निकलते समय इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। ग्रीष्मकालीन बाजरे में 8-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए। इस प्रकार 9-10 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ सकती है। </p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई का समय </h3> <p style="text-align: justify;">जायद मक्का की फरवरी के अन्त से लेकर मध्य मार्च तक बुआई कर लेनी चाहिए, जिससे कि पैदावार पर कोई कुप्रभाव न पड़ सके।</p> <h3 style="text-align: justify;">बीज की मात्रा </h3> <p style="text-align: justify;">बुआई से पूर्व मक्के के एक कि.ग्रा. बीज को 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम से शोधित करना अति आवश्यक है। सामान्य मक्का के लिए 18-20 कि.ग्रा./हैक्टर तथा संकर मक्का के लिए बीज दर 12-15 कि.ग्रा./हैक्टर प्रयोग करनी चाहिए। मक्का की बुआई हल के पीछे 3 से 4 सें.मी. की गहराई पर करें तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सें.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 30 सें.मी. रखनी चाहिए। </p> <h3 style="text-align: justify;">प्रजातियां</h3> <p style="text-align: justify;">जायद ऋतु में मक्का की उन प्रजातियों को लगाते हैं,</p> <h4 style="text-align: justify;">शीघ्र पकने वाली</h4> <p style="text-align: justify;">शीघ्र पकने वाली होती हैं जैसे-पी.एम.एच.-7, पी.एमएच.-8, पी.एम.एच.-10, कचंन, गौरव, सूर्या, तरुण, नवीन, अमर, आजाद, उत्तम, किसन, विजय व श्वेता।</p> <h4 style="text-align: justify;">हरे भुट्टे लेने के लिए</h4> <p style="text-align: justify;">पी.ई.एम.एच.-2, पी.ई.एम.एच.-3</p> <h4 style="text-align: justify;">बेबीकॉर्न के लिए </h4> <p style="text-align: justify;">बेबीकॉर्न के लिए संस्तुत प्रजातियां पूसा संकर-1, पूसा संकर-2, पूसा संकर-3, एच.एम-4, वी.एल.-42, वी.एल.-78 व प्रकाश आदि प्रमुख हैं। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccdownlod.jpg" width="177" height="150" /></p> <h3 style="text-align: justify;">उर्वरकों का प्रयोग</h3> <p style="text-align: justify;">मक्का की अच्छी उपज लेने के लिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना आवश्यक है। मक्का की फसल के लिए खाद का प्रयोग खेत की तैयारी के समय किया जाता है। उर्वरक में 120 कि.ग्रा. नाइट्रोजेन, 60 कि.ग्रा. फास्फोरस तथा 60 कि.ग्रा. पोटाश/हैक्टर प्रयोग करते हैं। नाइट्रोजेन की आधी मात्र तथा फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा खेत तैयार करते समय प्रयोग करनी चाहिए। शेष नाइट्रोजन की आधी मात्र को दो बार में खड़ी फसल में टॉप ड्रेसिंग के रूप में प्रयोग करें। आधी मात्र बुआई के 25-30 दिनों बाद तथा शेष फूल आने के समय प्रयोग करनी चाहिए। </p> <h3 style="text-align: justify;">निराई-गुड़ाई</h3> <p style="text-align: justify;">मक्का की फसल में कम से कम दो निराई-गुड़ाई करें। पहली निराई-गुड़ाई बुआई के 15-20 दिनों बाद तथा दूसरी बुआई के 30-35 दिनों बाद करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए बुआई के 2-3 दिनों के अन्दर एट्राजीन 2.5 कि.ग्रा. या पेन्डीमेथिलिन 3.33 लीटर में से किसी एक खरपतवारनाशी का प्रयोग 600 लीटर पानी में घोलकर/हैक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मक्का में खरपतवार नियंत्रण</strong></p> <p style="text-align: justify;">अच्छी पैदावार के लिए, समय से खरपतवार नियंत्रण अति आवश्यक है अन्यथा उपज में 50 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। बुआई से 30 दिनों तक खेत को खरपतवारमुक्त रखना आवश्यक है। खरपतवार नियंत्रण के लिए, पहली निराई खुरपी द्वारा बुआई के 15 दिनों बाद करनी चाहिए। इसे 15 दिनों के अन्तराल पर दोहराना चाहिए। यदि फसल की बुआई मेड़ पर की गई है, तो खरपतवार नियंत्रण ट्रैक्टर एवं रिज मेकर द्वारा भी किया जा सकता है। खरपतवारनाशक एट्राजिन 1 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व प्रति हैक्टर की दर से बुआई के तुरन्त बाद अथवा 1-2 दिनों बाद करने से खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है। एट्राजीन 0.5 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व को 800 लीटर पानी में घोलकर भी छिड़काव किया जा सकता है। </p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर, सस्य विज्ञान संभाग,भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>