टमाटर सिंचाई एवं गुड़ाई टमाटर की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं गुड़ाई करते रहें। बीज उपचार इसमें बहुत से रोग और कीट लगते हैं जैसे कि अर्धगलन, डंपिंग ऑफ आदि। इस रोग में पौधे गलने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए बुआई से पहले बीज को उपचारित कर लेना चाहिए। दूसरा इंडोफिल एम-45 की 2 ग्राम मात्रा/ लीटर मात्रा का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। मोजैक एवं विषाणु रोग मोजैक एवं विषाणु रोग में पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। नियंत्रण के लिए सिकुड़ी पत्तियों को उखाड़कर जला देना चाहिए। फसल पर 2 ग्राम मोनोक्रोटोफॅास छिड़काव करते रहना चाहिए, जिससे कि यह रोग और न फैले तथा पैदावार अच्छी मिल सके। पत्ती, तना एवं फलबेधक कीट की रोकथाम पत्ती, तना एवं फलबेधक कीट की रोकथाम के लिए मैलाथियान 50 ई.सी. की 1.125 लीटर दवा का 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए। ध्यान रहे कि फलों की तुड़ाई छिड़काव के 4-5 दिनों बाद करनी चाहिए। बैंगन बैंगन की नर्सरी बैंगन की नर्सरी तैयार करने के लिए लो टनल पॉलीहाउस से अच्छी गुणवत्ता की पौध तैयार कर सकते हैं। वर्षाकालीन बैंगन की फसल के लिए नर्सरी में बीज की बुआई इस माह भी कर सकते हैं। वर्षाकालीन बैंगन की नर्सरी वर्षाकालीन बैंगन की नर्सरी यदि तैयार हो तो उसकी रोपाई 75-90×60सें.मी. की दूरी पर, जहां तक सम्भव हो, रोपाई शाम के समय करें तथा रोपाई के तुरन्त बाद हल्की सिंचाई कर दें। नाइट्रोजन की टॉपड्रेसिंग ग्रीष्मकालीन बैंगन में रोपाई के 30 दिनों बाद/प्रति हैक्टर 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की पहली टॉपड्रेसिंग व इतनी ही मात्रा की दूसरी टॉपड्रेसिंग रोपाई के 45-50 दिनों बाद कर दें। तना और फलीबेधक कीटों से बचाव बैंगन में तना और फलीबेधक कीटों से बचाव के लिए कार्बोसल्फॉन 25 ई.सी. 1.5 लीटर/हैक्टर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल कर प्रत्येक 10-15 दिनों के अन्तराल पर छिड़काव करते रहना चाहिए। नीम गिरी 4 प्रतिशत का छिड़काव 10 दिनों के अन्तराल पर करने से अच्छा परिणाम मिलता है। स्त्रोत : खेती पत्रिका(भाकृअनुप) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001, विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, संतोष नगर, हैदराबाद।