तापमान कपास फसल की बढ़वार के समय 21-27 डिग्री सेल्सियस तापमान व उपयुक्त फलन के लिए दिन में 27 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम है। यह तापमान अप्रैल में मिल जाता है तथा रात्रि में ठंडक का होना आवश्यक है, जोकि सितम्बर-नवम्बर का मौसम है। कपास की तैयारी गेहूं के खेत खाली होते ही कपास की तैयारी शुरू कर दें। पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध है तो कपास की फसल को मई में भी लगाया जा सकता है। मृदा कपास की फसल को अच्छी भुरभुरी मृदा तैयार कर लगाना चाहिए। उन्नत प्रजातियां सामान्यतः उन्नत प्रजातियों का 2.5 से 3.0 कि.ग्रा. बीज (रेशाविहीन) तथा संकर एवं बीटी प्रजातियों का 1.0 कि.ग्रा. बीज (रेशाविहीन)/हैक्टर की बुआई के लिए उपयुक्त होता है। उन्नत प्रजातियां 45-60 सें.मी. पर लगायी जाती हैं व संकर एवं बीटी प्रजातियों में पंक्ति से पंक्ति एवं पौधे से पौधे की दूरी 90-120 सें.मी. एवं 60-90 सें.मी. रखी जाती है। देसी प्रजातियां कपास की देसी प्रजातियां जैसे-एल.डी.-327, एल.डी.-694, लोहित, आर.जी. 8 व सी.एड. 4 तथा अमेरिकन प्रजातियां जैसे-एच.डी. 107, एच. 777, एच.एस. 45, ए.ए.एच. 1, आर.एस. 810, आर.एस. 2013, एच.एस.-6, विकास तथा संकर एल.एच-1556, एफ.-1861, एफ.-1378, एल.एम.एच.-144, एफ.-846, लगा सकते हैं। बीज उपचार बोने से पूर्व बीज को प्रति कि.ग्रा. 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम या कैप्टॉन दवा से उपचारित करें। इमिडाक्लोप्रिड 7 ग्राम/कि.ग्रा. बीज अथवा कार्बोसल्फान 20 ग्राम/कि.ग्रा. से बीज उपचारित कर बोने से फसल को 40 से 60 दिनों तक रसचूसक कीटों से सुरक्षा मिलती है। दीमक से बचाव दीमक से बचाव के लिए 10 मि.ली. पानी में 10 मि.ली. क्लोरोपाइरीफॉस मिलाकर बीज पर छिड़क दें तथा 30-40 मिनट छाया में सुखाकर बुआई कर दें। खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। यदि मृदा में कार्बनिक पदार्थों की कमी हो, तो खेत तैयारी के समय आखिरी जुताई में कुछ मात्रा गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ-साथ 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन तथा 30 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तत्व के रूप में प्रयोग करना चाहिए। स्त्रोत : खेती पत्रिका(भाकृअनुप) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001, विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, संतोष नगर, हैदराबाद।