संकर मक्का रोगों का प्रकोप मक्का में मेडिस, टर्सिकम लीफ ब्लाइट, डाउनी मिल्ड्यू इत्यादि रोग कभी-कभी दिखाई देते हैं। इन रोगों का प्रकोप देर से बोई जाने वाली फसल में ज्यादा पाया जाता है। जीवाणुजनित तना विगलन तथा पाइथियम वृंतगलन रोग में पौधों में पुष्पण के दौरान जलभराव की स्थिति पाई जाती है। इसी प्रकार, फसल की बढ़वार के समय पुष्पोत्तर अवस्था में कमी के दबाव के कारण वृंतगलन के लक्षण भी दिखाई देते हैं। रोगरोधी प्रजातियां इस प्रकार के रोगों को रोकने के लिए रोगरोधी प्रजातियों की समय से बुआई करनी चाहिए, जबकि मेडिस, टर्सिकम लीफ ब्लाइट की रोकथाम के लिए 2.5 कि.ग्रा./हैक्टर जिनेब का 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। यदि रोग की रोकथाम न हो तो 10-15 दिनों के अंतराल पर दूसरा छिड़काव अवश्य कर देना चाहिए। पत्ती लपेटक कीट की रोकथाम मक्का की फसल में पत्ती लपेटक कीट की रोकथाम के लिए क्लोरोपायरीफॉस 1.0 मि.ली. पानी में मिलाकर या इमानेकटिन बेंजोएट 1.0 मि.ली. दवा 4.0 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। संकर ज्वार सिंचाई ज्वार की फसल में पौधों की वृद्धि, फूल तथा दाना बनते समय सिंचाई करना आवश्यक होता है। चार क्रान्तिक अवस्थाएं ज्वार की फसल के लिए सिंचाई देने की चार क्रान्तिक अवस्थाएं होती हैं प्रारंभिक बीज पौधे की अवस्था भुट्टे निकलने से पहले भुट्टे निकलते समय भुट्टों में दाना बनने की अवस्थाएं। निराई-गुड़ाई ज्वार की अच्छी उपज लेने के लिए बुआई के 3 सप्ताह बाद निराई-गुड़ाई करने से खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ मृदा में वायु का संचार होता है तथा मृदा में नमी भी सुरक्षित रहती है। खरपतवारनाशी यदि किसी कारणवश निराई-गुड़ाई संभव न हो तो बुआई के तुरंत बाद एट्राजिन नामक खरपतवारनाशी की 0.75-1.0 कि.ग्रा. मात्र का 700-800 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और ऋषि राज सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली।