आम आम में गमोसिस रोग की रोकथाम के लिए प्रति पेड़ (10 वर्ष या अधिक आयु के पौधे के लिए) 250 ग्राम जिंक सल्पेफट, 250 ग्राम काॅपर सल्फेट, 100 ग्राम बुझा हुआ चूना व 125 ग्राम बोरेक्स पेड़ के मुख्य तने से एक मीटर की दूरी पर 2-4 मीटर व्यास के अन्दर मिट्टी में मिलायें। वर्षा न होने की स्थिति में तुरन्त हल्की सिंचाई कर दें। आम में एंथ्रेक्नोज रोग से बचाव के लिए काॅपर ऑक्सीक्लोराइड की 3 ग्राम मात्रा काे 1 लीटर पानी में घाेल आवश्यकतानुसार छिड़काव करें। केला केले में प्रति पौधा 55 ग्राम यूरिया पाैधे से 50 सें.मी. दूर घेरे में प्रयोग कर हल्की गुड़ाई करके भूमि में मिला दें। केला बीटिल की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफाॅस 1.25 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कार्बोफ्रयूरान 3-4 ग्राम या फोरेट 2 ग्राम प्रति पौधे की दर तने के चारों ओर मिट्टी में मिलायें तथा इतनी ही मात्रा गोफे में डालें। आंवला आंवला में इन्दर बाेल कीट की राेकथाम के लिए डाइक्लोरोवास (नुवान) एक मि.ली. प्रति लीटर पानी में बने घोल में रूई भिगोकर सलाई की मदद से छेदों में छालकर चिकनी मिट्टी से बन्द करें। अमरूद अमरूद की हिसार सफेदा, हिसार सुरखा, इलाहाबादी सफेदा, बनारसी सुरखा, लखनऊ 49, ललित तथा सरदार किस्मों को सितंबर में लगाया जा सकता है। नये बागों की नियमित सिंचाई करें। अमरूद के फल-मक्खी की रोकथाम के लिए 700 मि.ली. मैलाथियान का 7-10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें । सितंबर में सदाबहार पेड़ जैसे-अमरूद, आम, बेर, लीची एवं नीबू प्रजाति के फल लगा सकते हैं। बाग लगाने से पहले 3×3 फुट के गड्ढे खोद लें। गड्ढे की ऊपर की मृदा को बराबर सड़ी-गली देसी खाद से मिलाकर तथा 2 कि.ग्रा. जिप्सम भी डालें। दीमक की आशंका वाले क्षेत्र में 10-20 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस 20 ई.सी. प्रति गड्ढा डालें। बेर सितंबर में बेर की रोपाई हो सकती है। पौधे निकालने से पहले फालतू पत्ते उतार दें। पौधों में 27 फुट दूर लगाने से 72 पेड़ प्रति एकड़ लग सकते हैं। नये पौधे की 17 दिनों के अन्तर पर सिंचाई करें व बेर के पुराने बागों की भी सिंचाई करें। लीची लीची में एक साल के पौधे के लिए 5 कि.ग्रा. सड़ी गोबर की खाद, 50 ग्राम नाइट्रोजन, 25 ग्राम फॉस्फोरस व 50 ग्राम पोटाश की दर से पौधे के चारों तरफ तने से दूर मिट्टी में मिलायें। 10 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृक्ष के लिए 50 कि.ग्रा. गोबर/कम्पोस्ट खाद, 500 ग्राम नाइट्रोजन, 250 ग्राम फॉस्फोरस तथा 500 ग्राम पोटाश प्रति पेड़ की दर से प्रयोग करें। लीची में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई देने पर जिंक सल्फेट (0.4 प्रतिशत) का छिड़काव करें। कटहल कटहल के पके फलों के बीजों को निकाल कर पौधशाला में बुआई करें।नए बाग लगाने के लिए रोपण का कार्य करें। बेल बेल के पेड़ों पर शाटहोल रोग की राकेथाम के लिए कापॅर ऑक्सीक्लाेराइट का छिड़काव करें। नए बाग लगाने के लिए रोपण का कार्य करें। करौंदा करौंदा के पके फलों की तुड़ाई करके बीज निकाल लें तथा नए पौधे तैयार करने के लिए बीजों की पौधशाला में बुआई करें। पपीता सितंबर में पपीता के पेड़ लगा सकते हैं। पुष्प उत्पादन ग्लोडियोलस की रोपाई के लिए प्रति वर्ग मीटर 10 कि.ग्रा. सड़ी गोबर की खाद/कम्पोस्ट 200 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट व 20 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश रोपाई के 15 दिनों पहले अच्छी तरह क्यारियों में मिला दें। रजनीगंधा के स्पाइक की कटाई करके बाजार में बिक्री के लिए भेजें। सितंबर माह सुन्दर फूल बुआई का समय भी है। गेंदा के अलावा, कैलनडुला, विगोनिया, गुलदाउदी, डहेलिया, स्वीट पी, सूरजमुखी, जिनीया, डोगपलावर, कारनेशन, पोपी, लारकसपुर इत्यादि फूल के लिए क्यारियां अच्छी तरह तैयार करके बुआई कर दें, ताकि सर्दियों में सुन्दर फूलों का भी आनन्द ले सकें । स्त्राेत : राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012, खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)।