उपयुक्त समय तोरिया फसल-यदि खेत मक्का, बाजरा, तिल, लोबिया, मूंग, उड़द कटने से खाली हो तो तोरिया की फसल सितंबर के पहले सप्ताह में लगा दें, ये गेहूं बोने से पहले नवंबर में पक जाती है। इससे बरसात की नमी का पूरा उपयोग होगा तथा 6.7 क्विंटल पैदावार भी मिलेगी। तोरिया की बुआई के लिए सितंबर का दूसरा पखवाड़ा सबसे उत्तम है। उन्नतशील प्रजातियां इसके लिए उन्नतशील प्रजातियां जैसे भवानी, टाइप-1, टाइप-9, पी.टी.-303 व पीटी.-507 अच्छी हैं। खाद एवं उर्वरकाें का उपयाेग तोरिया की फसल में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करें। मृदा परीक्षण न होने पर सिंचित दशा में बुआई के समय 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फॉस्फोरस, 50 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। सल्फर का उपयाेग तोरिया की फसल में 30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से सल्फर का प्रयोग आवश्यक है। असिंचित दशा में 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 30 कि.ग्रा फास्फोरस व 30 कि.ग्रा पोटाश प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। फॉस्फेट फॉस्फेट तत्व के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग करें, यदि सिंगल सुपर पफॉस्पेफट उपलब्ध न हो तो प्रति हैक्टर 30 कि.ग्रा. गंधक का प्रयोग करना चाहिए।