<h3 style="text-align: justify;">बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">भिंडी की बुआई फरवरी व मार्च में हो जाती है और इस समय यह फसल पुष्पण और फली विकास अवस्था में होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">सिंचाई</h3> <p style="text-align: justify;">इस समय सिंचाई 10-12 दिनों के अंतराल पर की जाती है। </p> <h3 style="text-align: justify;">मोजैक तथा पर्ण कुंचन (लीफ कर्ल) रोग</h3> <p style="text-align: justify;">भिंडी की फसल में लगने वाले मोजैक तथा पर्ण कुंचन (लीफ कर्ल) रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलते हैं। मोजैक में पत्तियों पर छोटे-छोटे पीले रंग के चितकबरे धब्बे बनते हैं। पत्तियों की शिराओं का रंग पीला पड़ जाता है। लीफ कर्ल में पत्तियों का हरा भाग छिछले गड्‌ढों का रूप ले लेता है। इसके नियंत्रण के लिए एसिटामाइपिड्र 3 ग्राम/10 लीटर पानी या कन्फीडारे-200 एस.एल. (0.3-0.5 मि.ली./लीटर पानी की दर से) बुआई के 20 दिनों बाद तथा आवश्यकतानुसार 15 दिनों के अंतराल पर प्रयोग करें। स्पाइरोमसीफेन दवा की 2 ग्राम/लीटर मात्रा को पानी में घोल बनाकर दूसरा छिड़काव करें। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccpic.jpg" width="167" height="146" /></p> <h3 style="text-align: justify;">फली तथा तनाछेदक कीट</h3> <p style="text-align: justify;">यह फलियों में छेद कर अंदर बीज को हानि पहुंचाता है तथा फली खाने योग्य नहीं होती है। ये पौधे की अंतिम कोमल शाखाओं में छेद कर देते हैं। इससे पौधे का ऊपरी हिस्सा मुरझा जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;"> नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">इस कीट के नियंत्रण के लिए एमामेक्टिन बेन्जोएट (2 ग्राम/10 लीटर) या स्पिनोसैड 1 मि.ली./3 लीटर को पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अंडा परजीवी ट्राइकोग्रामा को 50,000 कार्ड की मदद से खेत में छोड़ने से इस कीट का प्रकोप काफी कम हो जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">पत्ती को काटने वाले कीट </h3> <p style="text-align: justify;">भिंडी की पत्ती को काटने वाले कीट को मारने के लिए साइपरमेथ्रिन 0.5 मि.ली./ लीटर पानी में घोलकर 15 दिनों के अंतराल पर छिड़कना चाहिए। </p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.), राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर ’सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-११००१२।</p>