तापमान यह गर्म ऋतु की फसल है तथा अच्छी उपज के लिए 21-30 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है। मृदा अच्छी जल निकास वाली बलुई दोमट मृदा बैंगन की खेती के लिए उपयुक्त है। मृदा का पी.एच. मान 6-7 के बीच हो। बुआई का समय बैंगन की बुआई के समय मई-जून बीज बुआई तथा जून से मध्य जुलाई में रोपाई की जाती है। बुआई के बाद नर्सरी क्यारी को पुआल/घास से ढ़ककर रखने से बीज अंकुरण में वृद्धि होती है। नर्सरी में बीज बुआई के तुरन्त बाद हजारे से सिंचाई करनी चाहिए। उन्नत प्रजातियां बैंगन की लंबे आकार की उन्नत प्रजातियां जैसे-पूसा श्यामला, पूसा संकर-5, पूसा संकर-20, पूसा कौशल, पूसा क्रांति व गोल आकार की उन्नत प्रजातियां जैसे-पूसा उत्तम, पूसा उपकार, पूसा संकर-6, पूसा संकर-9 एवं गोल व छोटे आकार के बैंगन की उन्नत प्रजाति जैसे-पूसा अंकुर व पूसा बिंदु आदि प्रमुख हैं। बीज अच्छी जमाव क्षमता वाला 400 ग्राम तथा 250-300 ग्राम संकर किस्मों का बीज/हैक्टर की दर से पर्याप्त होता है। खेत की तैयारी खेत की तैयारी के समय 25 टन/हैक्टर की दर से अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर या कम्पोस्ट की खाद मृदा में मिला दें। रोपाई से पहले लगभग 150 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 60 कि.ग्रा. पोटाश तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा अंतिम जुताई के समय मृदा में मिला दें। बाकी आधी नाइट्रोजन की मात्रा को फूल आने के समय प्रयोग करें। खरपतवार नियंत्रण खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमेथेलिन 3 लीटर प्रति हैक्टर की दर से पौध रोपाई से पहले प्रयोग करें। इस बात का ध्यान रखें कि छिड़काव से पहले जमीन में नमी होनी चाहिए। निराई व गुड़ाई के द्वारा भी खेत में खरपतवार नियंत्रण करना संभव है। रोपाई से पहले पौधे की जड़ों को कॉन्फीडाेर कीटनाशी द्वारा 1 लीटर पानी में घोलकर उपचारित करना चाहिए। बैंगन में तना और फलभेदक कीट बैंगन में तना और फलभेदक एक गंभीर कीट है, इसके नियंत्रण के लिए 10 मीटर के अंतराल पर 100 फेरोमोन ट्रैप प्रति हैक्टर लगाकर वयस्क नर को पकड़कर नष्ट कर देना चाहिए। रैटून फसल न लें क्योंकि इसमें फलछेदक का प्रकोप अधिक होता है। ग्रसित प्ररोहों व फलों को निकालकर मृदा में दबा दें। नीम बीज अर्क (5 प्रतिशत) या बी.टी. 1 ग्राम/लीटर या स्पिनोसेड 45 एस.सी. 1 मि.ली./4 लीटर या कार्बोरिल 50 डब्ल्यू.पी. 2 ग्राम/लीटर या डेल्टामेथ्रिन 1 मि.ली./लीटर का फूल आने से पहले इस्तेमाल करें। स्त्राेत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर ’सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-११००१२।