अनाज भंडारण अनाज की मात्र एवं गुणवत्ता को सुरक्षित करने के लिए सर्वप्रथम अनाज को साफ करके इतना सुखाना चाहिए कि दांत से काटने पर कट्ट की आवाज के साथ टूट जाए। अर्थात अनाज भंडारण के समय नमी 8-10 प्रतिशत या इससे कम कर देने पर खपरा बीटल को छोड़कर किसी भी अन्य कीट का आक्रमण नहीं होता। खपरा बीटल (टोगोडरमा ग्रेरनेरियम) कीट 2 प्रतिशत नमी तक भी जिन्दा रहता है। बड़े गोदामों में नमीरोधी संयंत्र लगाने चाहिए, जिससे वर्षा में भी नमी नहीं बढ़े। इस प्रकार के अनाज को एक गोदाम में ही रखना चाहिए। इसके अलावा अनाज ढोने वाली गाड़ी की सफाई फिनायल आदि से कर दें। बोरी में भंडारण भंडारण यदि बोरी में करना हो, तो नये बोरों का ही उपयोग करना चाहिए और यदि पुराने बोरों का उपयोग करना हो, तो 2 मि.ली. मैलाथियॉन कीटनाशक दवा/लीटर गर्म पानी के घोल में धोकर बोरों को 6 घंटे अच्छी तरह सुखा लें। वैज्ञानिक तरीके से बीज व अनाज का भंडारण वैज्ञानिक तरीके से बीज व अनाज का भंडारण करने पर रोगों एवं कीटों का प्रकोप कम होता है। इससे बीज व अनाज लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं। बीज व अनाज को भंडारण से पहले ठीक प्रकार से सुखा लेना चाहिए, क्योंकि भंडारण के समय क्षति पहुंचाने वाले प्रमुख कीट जैसे-घुन या छोटा छिद्रक (राइजोपरथा डोमिनिका), खपरा बीटल (ट्रोगोडरमा ग्रेरनेरियम), सूंडवाली सुरसुरी (साइटोफिलस ओरायजी), चावल का पतंगा (कोरसायरा सिफेलोनिकी), अनाज का पतंगा (साइटोट्रोगा सिरियलेला), दाल का ढोरा (कैलोसोब्रूकस मैकूलेटस) व आटे का कीट (ट्राइबोलियम कैस्टेनियम) आदि का प्रकोप होता है। नमी की अधिकता से कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। धान्य फसलों में नमी की मात्र 8-10 प्रतिशत, दलहनी एवं तिलहनी फसलों में 6-8 प्रतिशत तक होने पर ही भंडारण करना चाहिए। ऐसा पाया गया है कि भंडारण के समय धान्य फसलों के बीज में 10-12 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर कीट-मकोड़ों का प्रकोप, 14-15 प्रतिशत से अधिक होने पर फफूंदीजनित और 15 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर अच्छी तरह अंकुरण नहीं हो पाता है। गोदामगृह भंडारण भंडार यदि गोदामगृह में करना है, तो उसे अच्छी तरह से साफ-सफाई करना चाहिए। पुराने अवशेषों तथा मकड़ी के जाले को निकालकर साफ कर देना चाहिए। दीवारों या फर्श पर पड़ी दरारों को गीली मिट्टी या सीमेंट से बंद कर देना चाहिए। कीटों से बचाव के लिए मैलाथियॉन 50 ई.सी. या डी.डी.वी.पी. को 100 लीटर पानी में (40 मि.ली. कीटनाशी प्रति लीटर पानी में) घोलकर भंडारण या गोदाम के कमरे में अच्छी तरह से छिड़काव करें। इस कमरे को कम से कम एक सप्ताह तक बंद रखने पर इसमें छिपे हुए कीट-मकोड़े आदि मर जाते हैं। यदि कीटों का छिड़काव से नियंत्रण न हो सके और दो कीट प्रति कि.ग्रा. बीज या अनाज में उपस्थित हों, तो धुंआ देने वाले विषैले रसायन से कीट मर जाते हैं, क्योंकि इनके धुएं में विषैली गैसें निकलती हैं। प्रायः एल्यूमिनियम फॉस्फेट की 2 गोली/टन की दर से विभिन्न ऊंचाइयों पर रख दी जाती है। छल्ली को गैस अवरोधी चादर से ढक दिया जाता है। गोलियों से हवा की नमी शोषित होती है और गैस निकलती है जो कीटों को मार देती है। जब मिथाइल ब्रोमाइड का प्रयोग करना हो तो ढेर में 3 से 5 मि.ली. मिथाइल ब्रोमाइड प्रति 100 कि.ग्रा. अनाज रखने के बाद बर्तन बंद कर दिया जाता है। इस प्रकार बर्तन में गैस निकलने से कीट मर जाते हैं। यदि अनाज को नीम के बीज के पाउडर के साथ मिलाकर रखें, तो कीटों का प्रकोप नहीं होगा। गोदाम में बीज भंडारण के लिए हमेशा एक लकड़ी का प्लेटफार्म बनायें, जो कि लगभग एक फीट फर्श से ऊंचा हो। इसके साथ ही यह दीवारों से भी लगभग एक फीट की दूरी पर हो। बोरों को गोदाम की दीवारों से सटाकर कभी भी नहीं रखना चाहिए। भंडारण प्रायः जूट के बोरों में करना चाहिए। नए बोरों का प्रयोग करें, तो ज्यादा अच्छा है। पुराने बोरे होने पर उनको भली प्रकार सुखाना चाहिए आरै 3-4 दिनों तक तेज धूप में सूखने देना चाहिए। पुराने बोरों को उपयोग में लेने के लिए उन्हें या तो गरम पानी से धो लें या फिर 0.1 प्रतिशत मैलाथियॉन घोल में 15-20 मिनट तक डुबोकर रखें। फिर उसे अच्छी तरह धूप में सुखाकर उपयोग करना चाहिए। सुरक्षित भंडारण चना, मटर एवं मसूर के दानों पर सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, तिल, नारियल का तेल लगभग 6-7 मि.ली. एवं हल्दी पाउडर 2 ग्राम/ कि.ग्रा. की दर से अच्छी तरह से उपचारित कर स्टील के बर्तन में भंडारण कर सकते हैं। वैज्ञानिक विधि द्वारा निर्मित पात्र जैसे-पूसा बिन, पंतनगर कुठला, हापुड़ बिन आदि का प्रयोग करना चाहिए। दाने/बीज को जूट के थैलों में भरकर लकड़ी के पटरों पर रखना चाहिए। भंडारगृह को कीटमुक्त करने के लिए मैलाथियान नामक दवा का 3 लीटर/100 वर्ग मीटर की दर से छिड़काव कर भंडारगृह को अच्छी तरह बंद करके सात दिनों के लिए छोड़ दें। उसके बाद चना, मटर एवं मसूर भंडारण करने पर घुन या ब्रुचिड का प्रकोप कम होता है। भंडारण के लिए एल्यूमीनियम फॉस्फाइड 1-3 गोली या टिकिया का प्रयोग करें या ई.डी.बी. की 30 मि.ली. मात्र प्रति 10 क्विंटल बीज की दर से ध्रूमीकरण करने से घुन कीट के प्रकोप को रोका जा सकता है। दाने/बीज को जूट के थैलों में भरकर लकड़ी के पटरों पर रखना चाहिए। चना, मटर और मसूर की फसल में कटाई उपरांत प्रबंधन भंडारण से पूर्व दानों को फैलाकर सुखाना चाहिये। भंडारण के लिए दानों में नमी का स्तर लगभग 10-12 प्रतिशत या इससे भी कम हो। चना, मटर एवं मसूर के दानों की भंडारण के दौरान कीटों से सुरक्षा के लिए एल्यूमिनियम फॉस्फाइड का उपयोग करें। चना, मटर एवं मसूर में भंडारण के दौरान मुख्य रूप से घुन कीट द्वारा सबसे अधिक नुकसान होता है। ज्यादातर दलहनी फसलों में घुन या बु्रिचड का प्रकोप खेत में फलियां पकते ही शुरु हो जाता है और कटाई उपरांत दानों का उचित उपचार नहीं होने पर भंडारण में निरंतर बढ़ता ही जाता है। चना में घुन का संक्रमण भंडारण से शुरु होता है।