<h3>मेंथा की फसल</h3> <h4>टॉप ड्रेसिंग</h4> <p style="text-align: justify;">मेंथा की फसल में 40-50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की तीसरी व अंतिम टॉप ड्रेसिंग अवश्य करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">कटाई </h4> <p style="text-align: justify;">मेंथा फसल की कटाई प्रायः दो बार की जाती है। पहली कटाई 100-120 दिनों पर, जब पौधों में कलियां आने लगें, तब की जाती है। दूसरी कटाई, पहली कटाई के लगभग 70-80 दिनों पर करें। पौधों की कटाई मृदा की सतह से 4-5 सें.मी. ऊंचाई पर करनी चाहिए। कटाई के बाद पौधों को 2-3 घन्टे तक खुली धूप में छोड़ दें।</p> <h4 style="text-align: justify;">आसवन विधि </h4> <p style="text-align: justify;">इसके बाद कटी फसल को छाया में हल्का सुखाकर जल्दी आसवन विधि द्वारा यंत्र से तेल निकाल लें।</p> <h3 style="text-align: justify;">सर्पगंधा </h3> <p style="text-align: justify;">सर्पगंधा की मई में ही नर्सरी भी डाली जा सकती है। प्रति हैक्टर खेत की रोपाई के लिए 6-7 कि.ग्रा. बीज की आवश्यकता होती है। </p> <h3 style="text-align: justify;">सफेद मूसली</h3> <p style="text-align: justify;">सफेद मूसली की बुआई भी इसी माह में कर सकते हैं, जो एक फायदेमंद औषधीय फसल है। </p> <h3 style="text-align: justify;">तुलसी </h3> <h4 style="text-align: justify;">बुआई </h4> <p style="text-align: justify;">तुलसी की बुआई भी इसी माह में कर सकते हैं, जो एक फायदेमंद औषधी फसल है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="279" height="120" /></p> <h4 style="text-align: justify;">रोपाई एवं सिंचाई </h4> <p style="text-align: justify;">सूखे मौसम में रोपाई हमेशा दोपहर के बाद करनी चाहिए। रोपाई के बाद खेत में तुरंत सिंचाई कर देनी चाहिए। बादल या हल्की वर्षा वाले दिन में इसकी रोपाई के लिए बहुत उपयुक्त हैं। इसकी रोपाई पंक्ति से पंक्ति एवं पौधे से पौधे की दूरी 60×30 सें.मी. की दूरी पर करनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">बीज की मात्रा</h3> <p style="text-align: justify;"><strong>एक हैक्टर क्षेत्रफल के लिए 750 ग्राम से 1 कि.ग्रा. बीज</strong> पर्याप्त होता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर ’सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-११००१२।</p>