शरदकालीन गन्ना प्रमुख बिंदु गन्ने की बुआई 15 नवंबर से पहले अवश्य पूरी कर लें। इसके बाद तापमान गिरने से बोये गये गन्ने का अंकुरण अच्छा नहीं होता। फसल की अच्छी बढ़वार के लिये 12-15 दिनों के अन्तराल पर सिंचाई करें और बुआई के 25-30 दिनों बाद निराई-गुड़ाई अवश्य कर लें। संवर्धित ट्राइकोडर्मा 20 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से 200 कि.ग्रा. गोबर की खाद या प्रेसमड के साथ मिलाकर नालियों में प्रयोग करें या संवर्धित ट्राइकोडर्मा मिलाकर प्रेसमड केक 10 टन/हैक्टर की दर से गन्ना पंक्तियों में डालने से पेड़ी का फुटाव अच्छा होता है। अच्छी पेड़ी लेने के लिये गन्ने की कटाई सतह से करें ताकि फुटाव अच्छा हो। गन्ना (पेड़ी) पंक्तियों से सटाकर गहरी जुताई कर संस्तुत उर्वरक (200:130:100 कि.ग्रा. यूरिया, डीएपी एवं पोटाश/हैक्टर) का प्रयोग करें। कटाई के बाद जल्द फुटाव के लिए ठूंठों पर इथ्रेल (12 मि.ली./100 लीटर पानी) का छिड़काव करें। कटाई के एक सप्ताह बाद खेत में सिंचाई करें। शरदकालीन मक्का प्रमुख बिंदु पहली निराई-गुड़ाई, बुआई के 20-25 दिनों बाद करें, जिससे खते मे खरपतवार न रहें। सिंचाई की सुनिश्चित व्यवस्था होने पर रबी मक्का की बुआई इस माह के मध्य तक पूरी कर लें। बुआई के लगभग 25-30 दिनों बाद पहली सिंचाई कर दें। मृदा परीक्षण न होने पर बुआई के समय सामान्यतः प्रति हैक्टर 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फेट व 40 कि.ग्रा. पोटाश दें। यदि भूमि में जिंक की कमी हो तो बुआई के पहले 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट भूमि में अवश्य मिलाना चाहिए। पौधे के लगभग घुटने तक की ऊंचाई के होने या बुआई के लगभग 30-35 दिनों बाद प्रति हैक्टर 87 कि.ग्रा. यूरिया की टॉप ड्रैसिंग कर दें। जई और बरसीम बरसीम की बुआई के 45 दिनों बाद पहली कटाई करें तथा पफसल कटाई के बाद पिफर से सिंचाई करें। बुआई के बाद 2-3 सिंचाईयां एक-एक हफ्ते पर और फिर आवश्यकतानुसार 20-25 दिनों पर करते रहें। जई की केन्ट, यू.पी.ओ.-94, यू.पी.ओ-212, क्लेमिंग गोल्ड किस्में अच्छी हैं। एक हैक्टर क्षेत्र में 80-100 कि.ग्रा. बीज की जरूरत होगी। नवंबर का पूरा महीना चारे हेतु जई बोने के लिए अच्छा है। जई के बीजों को ट्राइकोडर्मा 5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. से उपचारित कर बुआई करें। स्त्राेत : राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर,सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012 (खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर))।