<h3 style="text-align: justify;">आलू</h3> <h4 style="text-align: justify;">पछेती किस्में</h4> <p style="text-align: justify;">आलू को पछेती किस्मों में कुफरी सतलज, कुफरी आनन्द, कुफरी अशोक, कुफरी बादशाह, कुफरी बहार</p> <h4 style="text-align: justify;">लाल छिलके वाली किस्में</h4> <p style="text-align: justify;">आलू की लाल छिलके वाली किस्में-कुफरी लालिमा, कुफरी सिन्दूरौ तथा प्रसंस्करण के लिए आलू की कुफरी चिपसोना-1, कुफरी चिपसोना-2 और कुफरी चिपसोना-3 उपयुक्त प्रजातियों की बुआई अवश्य करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">आलू की सिंचाई </h4> <p style="text-align: justify;">बुआई यदि अक्टूबर में नहो पाई हो, तो अब जल्दी पूरी कर लें। अक्टूबर में बोये गए आलू की सिंचाई करें। बुआई के 25-30 दिनों बाद 90-100 कि.ग्रा. यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करके मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए।</p> <h4 style="text-align: justify;">अगेती तथा पछेती झुलसा रोग</h4> <p style="text-align: justify;">अगेती तथा पछेती झुलसा रोग से बचाव के लिए इंटोफिल एम-45 या रिटोमिल एमजेड दवा के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 2-3 बार अवश्य करें। बीज के लिए लगाए गए आलू के खेत में दोबारा मिट्टी चढ़ायें तथा लगावी गई फसल में बार-बार न जाएं अन्यथा सम्पर्क से विषाणु रोग फैलने का डर रहता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">टमाटर में उर्वरक प्रयोग</h3> <h4 style="text-align: justify;">अच्छी पैदावार</h4> <p style="text-align: justify;">टमाटर की अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 कि.ग्रा. नाइट्रोजन के साथ 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस एवं 60 कि.ग्रा. पोटाश एवं संकर प्रजातियों के लिए 213 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 240 कि.ग्रा. फॉस्फोरस एवं 250 कि.ग्रा. पोयश प्रति हैक्य प्रयोग करना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC1.jpg" width="131" height="114" /></p> <h4 style="text-align: justify;">उर्वरक</h4> <p style="text-align: justify;">इस फसल को खाद देते समय ध्यान रहे कि रोपाई के समय नाइट्रोजन देने के लिए यूरिया की जगह आप दूसरी मिश्रित खाद या अमोनियम सल्फेट का प्रयोग कर सकते हैं या फिर टॉप इंसिंग के लिए भी यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं।</p> <h4 style="text-align: justify;">मृदा</h4> <p style="text-align: justify;">टमाटर की खेती के लिए रेतीली दोमट से चिकनी काली कपासीय मृदा और लाल मृदा उचित मात्रा में जल निकास वाली होनी चाहिए। हालांकि, रेतीली दोमट मृदा में जैविक पदार्थ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इस वजह से यह इस फसल की पैदावार के लिए अच्छी मानी जाती है।</p> <h4 style="text-align: justify;">बुआई व रोपाई </h4> <p style="text-align: justify;">रबी टमाटर की अक्टूबर से नवंबर के अंत तक बुआई व रोपाई की जा सकती है। टमाटर गर्म मौसम की फसल है। इसलिए यह फसल पाला सहन नहीं कर सकती है। इसके लिए तापमान 18 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच उपयुक्त है।</p> <h4 style="text-align: justify;">उन्नत प्रजातियां</h4> <p style="text-align: justify;">टमाटर को उन्नत प्रजातियों जैसे-पूसा दिव्या, पूसा गौरव, पूसा संकर 1, पूसा संकर 2. पूसा संकर 4. पूसा संकर 8. पूसा रूबी, पूसा शीतल, पूसा उपहार, पूसा 120. अर्का सौरभ, अर्का विकास, ए आर टी एच 3. ए आर टो एच 4, अविनाश 2, बी एस एस 90. को. 3. एच एस 101, एच एम 102. एच एस 110. सिलेक्शन 12. हिसार अनमोल. हिसार अरुण, हिसार लालिमा, हिसार लालिमा, हिसार ललित, कृष्णा, के एस 2. एम.टी एच 6. एन ए 601, नवीन, पंजाब छुहारा, पंत बहार. रजनी, रश्मी, रत्न, रोमा और रुपाली आदि को रोपाई करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">बीज की मात्रा</h4> <p style="text-align: justify;">एक हैक्टर खेत को रोपाई के लिए उन्नत किस्मों को 350-400 ग्राम और संकर किस्मों की 200-250 ग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। पौध की रोपाई 60 सें.मी. की दूरी पर बनी पक्तियों में व पौधे से पौधे की दूरी 45 से 60 सें.मी. रखते हुए शाम के समय करें। </p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत*, प्रवीण कुमार उपाध्याय एस.एस. राठौर, और अमन सिंह सस्य विज्ञान, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012 एवं आनुवंशिकी विभाग, नितिन कुमार शुक्ला-आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंब, अयोध्या-224229; श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, पौड़ी गढ़वाल।</p>