<h3 style="text-align: justify;">मृदा</h3> <p style="text-align: justify;">मसूर की खेती के लिए दोमट से भारी मृदा अधिक उपयुक्त है। धान के बाद खाली खेतों में मसूर को विशेषकर उगाया जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">बीजजनित रोगों से बचाव</h3> <p style="text-align: justify;">बीजजनित रोगों से बचाव के लिए थीरम 2.5 ग्राम या जिंक मैग्नीज कार्बोनेट 30 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीज को बोने से पूर्व शोधित कर लेना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC1.jpg" width="173" height="151" /></p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई का उचित समय </h3> <p style="text-align: justify;">उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र व मध्य क्षेत्र में नवंबर का दूसरा पखवाड़ा बुआई का उचित समय है।</p> <h3 style="text-align: justify;">उन्नत प्रजातियां </h3> <p style="text-align: justify;">इसके लिए उन्नत प्रजातियां जैसे नरेन्द्र मसूर 1, एच.यू.एल. 57, पंत मसूर 4, पंत मसूर 5, पंत मसूर 406, पंत मसूर 639, के.एल.एस. 218, शेरी, मल्लिका, आशा, रंजन, अरुण, नूरी, वी.एल.मसूर 507, जवाहर मसूर 3, शेखर 2, शेखर 3 आदि उपयुक्त है।</p> <h3 style="text-align: justify;">बीज की मात्रा</h3> <p style="text-align: justify;">मसूर के बड़े दाने वाली प्रजातियों के लिए बीज दर 5560 कि.ग्रा./हैक्टर तथा छोटे दानों वाली प्रजातियों के लिए बीज दर 40 45 कि.ग्रा./हैक्टर उचित है। मसूर की बुआई पंक्तियों में 20-25 सें.मी. की दूरी पर करनी चाहिए। पछेती बुआई के लिए यह दूरी घटाकर 15 सें.मी. कर देनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">निराई-गुड़ाई</h3> <p style="text-align: justify;">बुआई के 25-30 दिनों बाद एक निराई-गुड़ाई अवश्य कर दें।</p> <h3 style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए 20 लीटर फ्लूक्लोरोलिन 45 ई.सी. प्रति हैक्टर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर बोने से पूर्व अथवा 3.3 लीटर पेन्डीमेथिलिन 30 ई.सी. का बुआई के 2 3 दिनों के अन्दर अंकुरण से पूर्व ही प्रयोग करें। 15 20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन एवं 50-60 कि.ग्रा. फॉस्फेट कुंड में डालना चाहिए। यदि डी.ए.पी. उपलब्ध है, तो 100 कि.ग्रा. मात्रा/हैक्टर की दर से प्रयोग करें। गंधक की भी आवश्यकता होती है, जिसकी आपूर्ति के लिए 20 कि.ग्रा. गंधक/हैक्टर तत्व का प्रयोग करें। यदि जिंक की कमी हो, तो प्रति हैक्टर 25 कि.ग्रा. की दर से जिंक सल्फेट खेत की अंतिम तैयारी के पहले जमीन में अच्छी तरह मिला दें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत*, प्रवीण कुमार उपाध्याय एस.एस. राठौर, और अमन सिंह सस्य विज्ञान, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012 एवं आनुवंशिकी विभाग, नितिन कुमार शुक्ला-आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंब, अयोध्या-224229; श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, पौड़ी गढ़वाल।</p>