<h3 style="text-align: justify;">गुलाब</h3> <h4 style="text-align: justify;">काट-छांट तथा गुड़ाई</h4> <p style="text-align: justify;">गुलाब के पौधों में काट-छांट तथा गुड़ाई के लिए यह उपयुक्त समय है। गुड़ाई के बाद गुलाब के तनों व जड़ों को धूप लगाने तथा कम्पोस्ट देने से बसंत ऋतु में अच्छे फूल आते हैं। इस माह गुलाब के पौधों के तनों की कलम भी आसानी से लग जाती है। बाकी फूलों में जरूरत के अनुसार देसी खाद, पानी व गुड़ाई देते रहें। पाले से पौधों का बचाव रखें। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccDownload2.jpg" width="192" height="172" /></p> <h4 style="text-align: justify;">उन्नत किस्मों का चयन</h4> <p style="text-align: justify;">बाजार मांग के आधार पर लम्बी पुष्प दण्डिका या उच्च क्वालिटी गुणवत्ता के पुष्पों का उत्पादन करके अधिक आय बढ़ाई जा सकती है। आमदनी बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों का चयन बहुत ही आवश्यक है।</p> <h4 style="text-align: justify;">बीजारोपण का समय</h4> <p style="text-align: justify;">सर्दियों में उगने वाले पुष्पीय पौधों के लिए सितंबर-अक्टूबर में बीजारोपण करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">देसी गुलाब</h4> <p style="text-align: justify;">देसी गुलाब में आंख बडिंग और सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">ग्लैडियोलस</h3> <h4 style="text-align: justify;">सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई </h4> <p style="text-align: justify;">ग्लैडियोलस में आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई करें। मुरझाई टहनियों को निकालते रहें और बीज न बनने दें।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccDownload.jpg" width="189" height="168" /></p> <h4 style="text-align: justify;">काला धब्बा रोग</h4> <p style="text-align: justify;">ग्लैडियालेस की पत्तियों पर काले धब्बे रोग की रोकथाम के लिए 0.2 प्रतिशत कैप्टान का घोल बनाकर छिड़काव करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">चौफर कीट</h4> <p style="text-align: justify;">चौफर कीट से बचाव के लिए खेत की तैयारी के समय 20-25 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर थिमेट-10 जी या कार्बोफ्यूरॉन के ग्रेन्युल्स मिला लें।</p> <h4 style="text-align: justify;">चेंपा एवं थ्रिप्स</h4> <p style="text-align: justify;">यदि चेंपा एवं थ्रिप्स का प्रकोप है तो उससे बचाव के लिए 0.2 प्रतिशत मेटासिड-50 दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">नर्गिस</h3> <p style="text-align: justify;">नर्गिस का फूल सर्दियों में उगने वाला खुशबूदार कंदीय फूल है। </p> <h3 style="text-align: justify;">रजनीगंधा</h3> <p style="text-align: justify;">रजनीगंधा की अंतिम बहार की कटाई-छंटाई, पैकिंग एवं विपणन करें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अजय कुमार सिंह,सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>