<h3 style="text-align: justify;">खास माह</h3> <p style="text-align: justify;">दिसंबर का महीना खेती के लिहाज से खासा अहम है। कृषि और किसानों के आर्थिक तथा सामाजिक उत्थान के लिए आवश्यक है कि खेती-किसानी की विज्ञान सम्मत समसामयिक जानकारियां खेत-किसान तक उनकी अपनी मातृ भाषा में पहुंचाई जाएं। इस समय तापमान में गिरावट के कारण खड़ी फसल में सस्य क्रियाएं करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिये किसानों को अत्याधुनिक कृषि उन्नत प्रौद्योगिकियों, फसलों की उच्च उत्पादन वाली नवीनतम प्रजातियों, समन्वित कीट व व्याधियों की नियंत्रण विधियों तथा कृषि आधारित व्यवसायों को अपनाने की अति आवश्यकता है। फल एवं सब्जी उत्पादन से भी किसान प्रति इकाई क्षेत्रफल व लागत से कम समय में अधिक आमदनी ले सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों पद्धतियों के कारण कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्तमान समय की मांग यही है कि समुचित प्रौद्योगिकियों का प्रसार किया जाए, ताकि किसान जीवन निर्वाह के लिए प्रौद्योगिकियों का लाभकारी एवं न्यायोचित रूप अपनाकर आमदनी सुनिश्चित कर सकें।</p> <h3 style="text-align: justify;">क्रांतिक बढ़वार की अवस्था</h3> <p style="text-align: justify;">इस महीने में अधिकतर फसलें अपनी क्रांतिक बढ़वार की अवस्था में होती हैं। समय पर बोया गया गेहूं इस माह में क्रांतिक चंदेरी जड़ अवस्था में होता है। इस कारण सिंचाई के लिए प्रबंधन बेहद आवश्यक हो जाता है। चना, मटर, मसूर, राई-सरसों और तोरिया, शीतकालीन मक्का, गन्ना और सब्जी वाली फसलों में भी जल-मांग के अनुसार सिंचाई प्रबंधन करने से अच्छी वृद्धि तथा उपज में बढ़ोतरी होती है। अजैविक तनावों, खासकर कम तापमान के कारण पाला पड़ने की पूरी आशंका होती है। सरसों, मटर और अन्य सब्जी वाली फसलों में इससे बचने के लिए उपयुक्त प्रबंधन आवश्यक है।</p> <p style="text-align: justify;">खेत में पर्याप्त नमी होने पर फसल बढ़वार के साथ-साथ पौधों में पाले से बचने की क्षमता भी बढ़ जाती है। सिंचाई प्रबंधन के साथ-साथ पोषक तत्वों पर भी विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। दिसंबर के अंत तक तोरिया की फसल भी पककर तैयार हो जाती है। तोरिया की कटाई के उपरांत दूसरी फसल की बुआई में देरी नहीं करनी चाहिए। चारे वाली फसलें जैसे-बरसीम, रिजका और जई इत्यादि कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। दिसंबर माह में रबी फसलों के लिए उपयुक्त सस्य संबंधी खास कार्यों पर ध्यान दें। </p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>