अरहर , मूंग एवं उड़द की बुआई अरहर की खेती अगेती व पछेती फसल के रूप में करते हैं। सिंचित क्षेत्रों में अगेती अरहर की बुआई मध्य जून में पलेवा करके अवश्य करें। मूंग एवं उड़द की बुआई का उपयुक्त समय जुलाई का द्वितीय पखवाड़ा है। मेड़ों पर बोने से अच्छी उपज मिलती है। मूंग की फसल को मध्य जुलाई से अगस्त के दूसरे सप्ताह तक बोना चाहिए। बोने के लिए सीडड्रिल का प्रयोग किया जा सकता है। उड़द की बुआई का उचित समय जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक अच्छा माना जाता है। देर से बुआई करने पर उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भूमि का चयन भूमि का चयन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि खेत ऊंचा एवं समतल हो तथा उसमें जल निकास अच्छा हो। इनको अधिकांश मृदाओं में उगाया जा सकता है। उत्तर भारत में अरहर, मूंग एवं उड़द को मटियार दोमट मिट्टी से लेकर रेतीली दोमट मिट्टी में उगाया जाता है। अरहर, उड़द एवं मूंग की फसल के लिए बलुई-दोमट अथवा दोमट मिट्टी, जिसका पी-एच मान 6.5 से 7.5 के बीच हो, सर्वोत्तम रहती है। यदि मृदा में दीमक की समस्या हो तो इसके प्रकोप से बचने के लिए 20-25 कि.ग्रा./हैक्टर कार्बोरियल (59 प्रतिशत) धूल मिट्टी में उस समय मिलानी चाहिए जब खेत की तैयारी अंतिम चरण में हो। 10 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से एल्डीकार्ब या फोरेट का प्रयोग भी लाभदायक रहता है। किस्में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए अरहर की उन्नत प्रजातियां पूसा 16, पूसा 33, पूसा 991, पूसा 992, पूसा 2001, पूसा 2002, पूसा 855, उपास 120, मानक, ए.एल.-15, ए.एल.-201,आई.सी.पी.एलू-151, एच. 82-1, पी.वी.एच. (हाइब्रिड), उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए पूसा 9, नरेन्द्र अरहर 1, पंत अरहर 291, अमर, नरेन्द्र अरहर 2, मालवीय विकल्प 3, मालवीय विकल्प 6, मालवीय चमत्कार 13, बहार, उपास 120, आजाद के 21, टाइप-17, टाइप-7, बी.-511, श्वेता (बी.-७), डी.ए.-11, बिरसा अरहर-1, उत्तर-पहाड़ी क्षेत्र के लिए पूसा अगेती, टाइप-1, उपास 120, आई.सीपी.एलू-151 व मूंग की पूसा विशाल, पूसा 9531, पूसा रत्ना, पूसा 672, सम्राट, पी.डी.एम. 54 पी.डी.एम. 11, आईपीएम-02-3, आईपीएम-02-14, एसएमएल-668, पंत मूंग 1, पंत मूंग 2, पंत मूंग 3, पंत मूंग 4, पंत मूंग 5 एवं उड़द की शेखर 1, के.यू.जी.-479 नरेन्द्र उड़द-1, आजाद उड़द 1, आजाद उड़द 2, आजाद उड़द 3, शेखर 1, शेखर 2, शेखर 3, डब्ल्यूबीयू-108 आदि प्रमुख हैं। उर्वरकों का प्रयोग उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के आधार पर किया जाना चाहिए। भरपूर उत्पादन के लिए संतुलित उवर्रक का प्रयोग करें, जिसका विवरण सारणी में दिया गया है। सारणी : अरहर, उड़द और मूंग में उर्वरकों की संस्तुत मात्रा फसलें बीज की मात्रा (कि.ग्रा./ हैक्टर) पंक्ति से पंक्ति की दूरी (से.मी.) पौधे से पौधे की दूरी (सें.मी.) नाइट्रोजन,फास्फाेरस, पाेटाश (कि.ग्रा./ हैक्टर) सल्फर व जस्ता (कि.ग्रा./हैक्टर) अगेती अरहर