पालक, मेथी एवं धनिया पालक, मेथी एवं धनिया की पत्तियों की कटाई कर बाजार भेजें। यदि इनसे बीज लेना हो, तो पत्तियां काटना बन्द कर दें। फसल में 25 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हैक्टर की दर से टॉप ड्रेसिंग करें। हर 17-20 दिनों बाद कटाई करके पालक में 20 कि.ग्रा. तथा मेथी में 10 कि.ग्रा. यूरिया छिड़क कर हल्की सिंचाई करें तथा खरपतवार निकाल दें। कीट नियंत्रण के लिए बहुत अधिक आक्रमण होने पर कटाई करके खेत में 2 मि.ली. मैलाथियान 70 ई.सी. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कदूवर्गीय सब्जियां कदूवर्गीय सब्जियों के लिए खेत की तैयारी के समय 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद या 7-8 टन नाडेप कम्पोस्ट प्रति हैक्टर की दर से मृदा में मिला दें। बुआई से पूर्व प्रति हैक्टर 15-20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 25 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 25 कि.ग्रा. पोटाश आपस में मिलाकर बोने वाली नालियों या थावले बनाकर मृदा में अच्छी तरह मिला दें। इसके बाद एक स्थान पर 2-3 बीजों की बुआई करें। चप्पन कद्दू की ऑस्ट्रेलियाई ग्रीन और पूसा अलंकार किस्मों की इस माह में बुआई कर सकते हैं। पूसा अलंकार . की पैदावार 45 टन/हैक्टर तक होती है। वाक् इन टनल में चप्पन कद्दू तथा अन्य कद्दूवर्गीय फसलों जैसे-लौकी आदि बेमौसमी फसलें लगाकर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। खीरावर्गीय बेमौसमी फसल खीरावर्गीय बेमौसमी फसलों के लिए पॉलीहाउस में कैप्टॉन 0.10-20 ग्राम/लीटर की दर से बीज को उपचार कर 1-2 बीजों की पॉलीथीन थैलियों में बुआई कर दी जाती है। मिर्च, कद्दूवर्गीय, भिंडी, फ्रेंचबीन, लोबिया एवं बैंगन इस माह के अन्त में जायद में मिर्च, कद्वर्गीय, भिंडी, फ्रेंचबीन, लोबिया एवं बैंगन फसलों के लिए खेत की तैयारी अभी से शुरु कर दें। इस माह में बेबी मक्का की बुआई भी की जा सकती है। बैंगन की शरद फसल लगा रखी है . तो समय पर फलों की तुड़ाई करें। बैंगन में फल तब तोड़े जाने चाहिए, जब वे मुलायम हों और उनमें ज्यादा बीज न बने हों। मिर्च की नवंबर में लगाई गई नर्सरी जनवरी में रोपी जा सकती है। पंक्तियों व पौधों में 18 इंच का फासला रखें। फैलने वाली प्रजातियों में फासला 24 इंच तक बढ़ा दें। रोपाई से पहले खेत में लगभग 10 टन गोबर की सड़ी खाद, 1 बोरा यूरिया (1/2 नाइट्रोजन की दूसरी किश्त) 1.7 बोरा सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 1 बोरा पोटाश का प्रयोग करें। सर्दियों में 10-17 दिनों बाद हल्की सिंचाई से फूल व फल गिरते नहीं हैं व फसल पाले से भी बची रहती है। लोबिया लोबिया की बुआई के लिए यह समय उपयुक्त है। इसके लिए खेत की तैयारी करें और इसकी अच्छी किस्मों का चयन करें। इसकी उन्नत प्रजातियों में पूसा कोमल, अर्का गरिमा व पूसा दा फेसली किस्मों का चयन किया जा सकता है। इसमें पूसा कोमल लोबिया की ऐसी किस्म है, जो बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी है। राजमा राजमा की बुआई भी इस महीने की जा सकती है। इसके लिए इसकी उन्नत व अधिक पैदावार देने वाली किस्मों का चयन किया जा सकता है। राजमा की उन्नत प्रजातिया जैसे-पी.डी.आर.-14, मालवीय-15, मालवीय-137, वीएल-63, अंबर, उत्कर्ष हैं। यह प्रजाति कम समय में तैयार हो जाती है। राजमा की खेती के लिए 120 से लेकर 140 कि.ग्रा.बीज की प्रति हैक्टर जरूरत होती है। राजमा की बुआई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-40 सें.मी. होनी चाहिए। बीज को 8-10 सें.मी. गहराई में थीरम से उपचार करने के बाद डालना चाहिए, ताकि पर्याप्त नमी मिल सके। स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर,सस्य विज्ञान, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012; और अमन सिंह,आनुवंशिकी विभाग, आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या-224229 (यूपी)।