नई उन्नतशील प्रजाति मेंथा की नई उन्नतशील प्रजाति सिम क्रांति विकसित की गई है। इससे किसान अब सर्दी के मौसम में भी मेंथा की बुआई कर सकते हैं। आमतौर पर फरवरी-मार्च में इसकी खेती होती है, लेकिन इस प्रजाति के विकसित होने से जनवरी में भी बुआई संभव हो पाई है। इसके अलावा अर्ली मिंट तकनीक के आने से किसानों को कापफी लाभ हुआ है। लागत में भारी कमी इस कृषि तकनीक से किसानों की लागत में भारी कमी आई है। आमतौर पर एक कि.ग्रा. मेंथा ऑयल के उत्पादन पर किसानों को 500 रुपये की लागत आती थी। इस तकनीक के आने से लागत में करीब 200 रुपये प्रति कि.ग्रा. की कमी आई है। इससे किसानों ने मेंथा की खेती की ओर रुख किया है। रोपाई मेंथा की रोपाई 45-60 सें.मी. की दूरी पर पंक्तियों में 2-3 सें.मी. की गहराई में करें। उर्वरक मेंथा रोपाई के लिए खेत की तैयारी करते समय अन्तिम जुताई पर प्रति हैक्टर 10 टन सड़ी गोबर की खाद, 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस एवं 45 कि.ग्रा. पोटाश खेत में अच्छी तरह मिला दें। मेंथा के एक हैक्टर क्षेत्र में रोपाई के लिए 2.5-5.0 क्विंटल सकर्स पर्याप्त होते हैं। उन्नत प्रजातियां मेंथा की उन्नत प्रजातियां कोसी, एच.वाई.-77 एवं गोमती प्रमुख हैं। स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह, 'सस्य विज्ञान संभाग एवं संरक्षित खेती और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012