<h3 style="text-align: justify;">जनवरी महीना</h3> <p style="text-align: justify;">जनवरी, जिसे पौष-माघ भी कहते हैं, सबसे ठंडा महीना होता है। परंतु लोहड़ी और मकर संक्राति के त्यौहार के साथ जनवरी का महीना विभिन्न कृषि कार्यों को लेकर आता है। इस अवधि में मौसम में परिवर्तन भी होता है। भारतीय कृषि में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोग से न केवल खाद्यान्न उत्पादन में बल्कि सब्जियों और औद्यानिकी उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस विकास के बावजूद, वर्तमान में कृषि पर निरन्तर बढ़ रही जनसंख्या की निर्भरता, जलवायु परिवर्तन और इससे जुड़े खतरे, प्राकृतिक संसाधनों की क्षीण होती उपलब्धता, श्रमिकों की समस्या, उत्पादन की बढ़ रही लागत, बाजार की अनिश्चितताएं, भोजन की खपत का बदल रहा स्वरूप और आय में अत्यधिक असमानता जैसे दबाव बढ़ गए हैं। देश की कृषि क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों को बनाए रखने के लिए न केवल नई तकनीकियों को विकसित करने की आवश्यकता है बल्कि इन तकनीकियों को कृषक समुदाय में स्थानांतरित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</p> <h3 style="text-align: justify;">रबी मौसम में अधिक पैदावार</h3> <p style="text-align: justify;">जनवरी का महीना रबी मौसम में अधिक पैदावार लेने के लिए आवश्यक कृषि कार्यों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है। कृषि एवं इससे जुड़ी सभी नई तकनीकियों के विकास ने मानव सभ्यता तथा देश की विकास गति की वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाई है। अतः हमें सुरक्षित खाद्य भविष्य बनाने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्र में अधिक आय एवं रोजगार सृजन के लिए किसानों को अत्याधुनिक कृषि की तकनीकियों, फसलों की उच्च उत्पादन देने वाली उन्नतशील प्रजातियों, समन्वित खरपतवार एवं सिंचाई प्रबंधन, कृषि उपकरणों, समन्वित कीट व रोग-व्याधियों का प्रबंधन तथा कृषि आधारित व्यवसायों को अपनाने की अति आवश्यकता है। सब्जी एवं फल उत्पादन से भी किसान भाई प्रति इकाई क्षेत्रफल व लागत से कम समय में अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय की मांग यही है कि समुचित तकनीकियों का प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि किसान जीवन निर्वाह के लिए तकनीकियों को लाभकारी एवं न्यायोचित रूप से अपनाकर आमदनी सुनिश्चित कर सकें और इस प्रकार राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा एवं समृद्धि में अपना योगदान करें। कृषि विज्ञान की तमाम उपलब्धियों एवं समसामयिक कृषि जानकारियों को उनके खेत-खलिहान तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाया जाये।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह, 'सस्य विज्ञान संभाग एवं संरक्षित खेती और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012<br /><br /></p>