उत्तर भारत के राज्यों में गेहूं एक सिंचित फसल के रूप में उगाई जाती है, जबकि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ज्यादातर क्षेत्रों में गेहूं, वर्षा द्वारा सिंचित फसलों में उगाई जाती है। कुल उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत गेहूं केवल तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से ही प्राप्त होता है। देश भर में फसलों की सिंचाई के लिए सतही जल स्रोतों का अभाव होता चला जा रहा है। इसके फलस्वरूप कृषि सिंचाई के लिए भूजल ही एक मात्र उपलब्ध संसाधन है। पिछले कुछ दशकों से भूजल के अधिक उपयोग और पर्याप्त मात्रा में वर्षा न होने के कारण, भूजल के स्तर में निरन्तर गिरावट होती जा रही है। भूजल के स्तर में यह गिरावट गेहूं के सिंचित बुआई क्षेत्र मुख्य तौर पर उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा राज्यों में भी दर्ज की गयी है। ऐसी स्थिति में किसान भाइयों को अपने भविष्य के बारे में सोचना होगा और पानी की बचत के तरीके खोजने होंगे, जिससे पैदावार भी बढ़े और पानी की भी बचत हो और गेहूं की फसल से उन्नत पैदावार प्राप्त कर सके। सिंचाई गेहूं फसल की संम्पूर्ण अवधि में लगभग 35-40 सें.मी. जल की आवश्यकता होती है। इसके क्राउन (छत्रक), जड़ों तथा बालियों के निकलने की अवस्था में सिंचाई अति आवश्यक होती है, अन्यथा उपज पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। गेहूं के लिए सामान्यतः 4-6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। भारी भूमि में 4 तथा हल्की भूमि में 6 सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं। गेहूं में 6 अवस्थायें ऐसी हैं, जिनमें सिंचाईयां करना लाभप्रद रहता है लेकिन सिंचाइयों की उपलब्धता के अनुसार सारणी-1 की अवस्थाओं के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए। सारणी 1. सिंचाई का सही समय एवं अवस्था सिंचाई संख्या सिंचाई का समय (बुआई के बाद दिन में) सिंचाई की अवस्था पहली सिंचाई 20-25 ताजमूल (क्रॉउन रूट) अवस्था दूसरी सिंचाई 20-25 एवं 80-85 कल्ले निकलते समय तीसरी सिंचाई 20-25, 60-65 एवं 100-105 दीर्घ सन्धि अथवा गांठें बनते समय चौथी सिंचाई 20-25, 40-45, 60-65 एवं 100-105 पुष्पावस्था के समय पांचवीं सिंचाई 20-25, 40-45, 60-65, 80-85 एवं 100-105 दुग्धावस्था के समय छठी सिंचाई 20-25, 40-45, 60-65, 80-85, 100-105 एवं 115-120 दाना भरते समय गेहूं की सीमित सिंचाई साधन की दशा में यदि गेहूं की सिंचाई एक ही उपलब्ध हो तो ताजमूल अवस्था पर अवश्य करें। यदि गेहूं की सिंचाई के लिए दो ही सिंचाइयां उपलब्ध हों तो ताजमूल अवस्था और पुष्पावस्था पर करें। यदि तीन गेहूं की सिंचाइयों की सुविधा ही उपलब्ध हो तो ताजमूल अवस्था, बाली निकलने के पूर्व तथा दुग्धावस्था पर करें। देर से बोये गये गेहूं में पहली सिंचाई बुआई के 18-20 दिनों बाद करे तथा बाद की सिंचाइयां 15-20 दिनों के अन्तराल पर करते रहें। वहां भी सिंचाई के बाद एक तिहाई नाइट्रोजन का छिड़काव करना होगा। सारणी 2. विभिन्न खरपतवारों के नियंत्रण के लिए रसायन एवं उपयोग की मात्रा खरपतवार शाकनाशी रसायन मात्रा ग्रा./हैक्टर प्रयोग का समय संकरी पत्ती वाली घास के लिये सल्फोसल्फ्यूरॉन (लीडर 75 डब्ल्यूजी) 25 (33.3) बुआई के 30-35 दिनों बाद क्लोडिनोफॉप(टोपिक 15 डब्ल्यूपी) 60 (400) बुआई के 30-35 दिनों बाद पेन्डीमेंथिलीन(स्टाम्प 30 ई.सी.) 1000-1500 (3333-4950) बुआई के 1-3 दिनों के अन्दर पीनाक्साडेन(एक्सिल 5 ई.सी.) 35-40 (700-