फूलगाेभी की फसल की देखभाल मिट्टी फूलगोभी की अगेती फसल के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट मृदा तथा पछेती के लिए दोमट या चिकनी मृदा अच्छी होती है। खेत की तैयारी भलीभांति जुताई करके एवं पाटा चलाकर कर लेनी चाहिए। पछेती फूलगोभी किस्में पछेती फूलगोभी किस्में जैसे-पूसा स्नोबॉल के.-1, पूसा स्नोबॉल-2, पूसा स्नोबॉल के.टी.-25, स्नोबॉल-16व पूसा हाइब्रिड-2, पूसा स्नोबॉल के-2,पूसा मेघना, पूसा सिंथेटिक, विश्व भारती एवं ब्रोकली की प्रजाति पूसा के.टी.एस.-1, एन.एस.-50, ब्रोकली संकर-1, टी.डी.सी.-6 के बीज की बुआई पौधशाला में कर दें। पूसा स्नोबॉल-2 की रोपाई 15 अक्टूबर के बाद कर सकते हैं। खाद एवं उर्वरक अगेती फसल की अपेक्षा पछेती फसल फूलगोभी में खाद एवं उर्वरकों की अधिक आवश्यकता होती है। फूलगोभी की अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए प्रति हैक्टर 300 क्विंटल गोबर की खाद, 120 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 60 कि.ग्रा. पोटाश की आवश्यकता होती है। गोबर की खाद को रोपाई से पूर्व खेत में डालकर भलीभांति मिला देना चाहिए। रोपाई के 25-30 दिनों बाद प्रति हैक्टर मध्यवर्गीय फूलगोभी में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की पहली टॉप ड्रेसिंग कर दें। खरपतवार का नियंत्रण फूलगोभी के खेत की उथली गुड़़ाई करते रहना चाहिए, ताकि खरपतवार नष्ट हो जाएं। गहरी गुड़़ाई न करें, क्योंकि इससे जड़ों के कटने का भय रहता है। पहली गुड़़ाई, पौधे जैसे ही मृदा में जम जायें, करनी चाहिए। पौध लगाने के 6 सप्ताह बाद इन पर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए। जीवांश की मात्रा पत्तागोभी की अच्छी पैदावार के लिए खेत में पर्याप्त मात्रा में जीवांश का होना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए खेत में 200 से 250 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट तथा 150 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 60 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से आवश्यकता होती है। नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा, फॉस्फोरस तथा पोटाश की पूरी मात्रा अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देनी चाहिए। शेष नाइट्रोजन की मात्रा को दो बराबर भागों में बांट कर खड़ी फसल में 30 एवं 45 दिनों पर देनी चाहिए। मैदानी क्षेत्रों में गाेभी बुआई का समय मैदानी क्षेत्रों में गांठगोभी की बुआई अगस्त से अक्टूबर में उपयुक्त होती है। अगर बात करें मध्य क्षेत्रों की तो उसके लिए जुलाई से अक्टूबर माह उपयुक्त माना गया है। किस्में गांठगोभी की पूसा विराट, किंग ऑपफ नॉर्थ, लार्ज ग्रीन, व्हाइट वियेना और परपल वियना प्रमुख प्रजातियां हैं। इसकी रोपाई पूरे माह 30×20 सें.मी. के अंतराल पर करें। उर्वरक एवं खाद गांठगोभी की फसल में उर्वरकों का इस्तेमाल मृदा परीक्षण के आधार पर करना सही रहता है। इस फसल की अच्छी पैदावार के लिए 20 से 25 टन गोबर या कम्पोस्ट की खाद, 100 से 120 कि.ग्रा., नाइट्रोजन, 80 कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 80 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से पर्याप्त किया जाता है। इसकी अंतिम जुताई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा एवं फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा को अच्छे से भूमि में मिला दें। पत्तागोभी पत्तागोभी को फूलगोभी की अपेक्षा अधिक ठंड की आवश्यकता होती है और 600 फारेनहाइट पर अच्छी उपज प्राप्त होती है। शीघ्र तैयार होने वाली पत्तागोभी अनेक प्रकार की मृदाओं में उगाई जा सकती है। शीघ्र तैयार होने वाली किस्मों के लिए बलुई दोमट तथा देर से तैयार होने वाली प्रजातियों के लिए कछारी दोमट मृदा सर्वोत्तम होती है। इसका पी-एच मान 5.8 से 6.8 होना चाहिए। बन्दगोभी की मध्यावधि व पछेती किस्में पूसा मुक्ता, गोल्डन एकड़, पूसा ड्रम हैड, पूसा बन्दगोभी संकर-1 की नर्सरी में बुआई पूरे अक्टूबर तक कर सकते हैं तथा इनकी रोपाई मध्य अक्टूबर से प्रारम्भ की जा सकती है। खाद और उर्वरक खेत की जुताई के समय खेत में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद 15 से 30 टन प्रति हैक्टर की दर से मिला देनी चाहिए। रासायनिक खादों का इस्तेमाल भूमि की उर्वरा शक्ति, फसलचक्र और प्रजाति पर निर्भर करता है। खेत की जुताई के समय खेत में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद 15 से 30 टन प्रति हैक्टर की दर से मिला देनी चाहिए। रासायनिक खादों का इस्तेमाल भूमि की उर्वरा शक्ति, फसलचक्र और प्रजाति पर निर्भर करता है। स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और बिपिन कुमार ’सस्य विज्ञान संभाग एवं जल प्रौद्योगिकी केन्द्र, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001