<h3>गोभी</h3> <h4>सिंचाई</h4> <p style="text-align: justify;">गोभी की बढ़वार और फूल के बनने एवं विकास के लिए वांछित तापमान पर आधारित फूलगोभी की किस्मों के विकास से अब लगभग पूरे वर्ष फूलगोभी उगाना संभव हो गया है। गोभीवर्गीय सब्जियों की फसल में सिंचाई, गुड़ाई तथा सफेद मिट्‌टी चढ़ाने का कार्य करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">फूलगोभी के फूल</h4> <p style="text-align: justify;">फूलगोभी के फूल उस समय काटने चाहिये, जब वे ठोस, सफेद व धब्बेरहित बिलकुल साफ हों और फूल के साथ पत्तियों के कम से कम दो चक्र भी हों। पत्तियों के ऊपरी चक्र में काफी पोषक तत्व होते हैं। अतः उनको भी फूल के साथ उपयोग करना चाहिये।</p> <p style="text-align: justify;">तैयार फूलगोभी, पत्तागोभी एवं गाठगोभी की कटाई छटाई के एवं बाजार भेजने की व्यवस्था करें। गोभीवर्गीय फसलों को तब काटें जब वह बंधी और कोमल हों। यदि कटाई में देर हो गई तो गांठें फट सकती हैं। कटाई करते समय दो-तीन बाहरी पत्तियां रखें, जिससे बाजार ले जाते समय गांठे खराब न हों। बीज वाली फसल से अवांछित पौधों को निकालें।</p> <h3 style="text-align: justify;"><a href="../../../../../../../../agriculture/crop-production/91593f93893e92894b902-915947-93293f90f-92e94c93892e-90692793e93093f924-91594393793f-93893293e939/92e93e93993593e930-91594393793f-91593e93094d92f/दिसंबर-माह-के-कृषि-कार्य/सब्जी-वाली-फसलें/टमाटर-की-फसल">टमाटर की फसल</a></h3> <h4>निराई-गुड़ाई, सिंचाई</h4> <p style="text-align: justify;">पहले रोपी गयी टमाटर की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई, सिंचाई व पौधों को सहारा देने का कार्य करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">यूरिया की प्रथम टॉप ड्रेसिंग</h4> <p style="text-align: justify;">नवम्बर में रोपी गई टमाटर की उन्नत किस्मों में प्रति हैक्टर 88 कि.ग्रा. यूरिया व संकर किस्मों के लिए 130 कि.ग्रा. यूरिया की प्रथम टॉप ड्रेसिंग के20-25 दिनों बाद दूसरी टॉप ड्रेसिंग करें। </p> <h4 style="text-align: justify;">टमाटर की फसल की रोपाई</h4> <p style="text-align: justify;">इस माह के अंत में ग्रीष्मकालीन टमाटर की फसल की रोपाई करें। टमाटर की रोपाई के समय उन्नत प्रजातियों के लिए प्रति हैक्टर 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फॉस्फोरस, 60 कि.ग्रा. पोटाश, 20-25 कि.ग्रा. जिंक एवं 10-12 कि.ग्रा. बोरेक्स व संकर किस्मों में उर्वरक की अन्य मात्रा के साथ नाइट्रोजन की 60 कि.ग्रा. मात्रा का प्रयोग प्रति हैक्टर की दर से करना चाहिए। टमाटर की रोपाई 60×45 या 60×60 सें.मी. की दूरी पर करें। टमाटर में <a href="../../../../../../../../agriculture/91594393793f-906917924/90591c94893593f915-90692693e928/91693092a92493593e930-92893f92f90292494d930923">खरपतवार नियंत्रण</a> के लिए प्रति हैक्टर 1.0 कि.ग्रा. स्टाम्प का रोपाई के दो दिनों बाद प्रयोग करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">सब्जियों में आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई</h3> <p style="text-align: justify;">सब्जियों में आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई करते रहें। आलू, टमाटर तथा मिर्च में पछेती झुलसा तथा माहूं से बचाव हेतु मैंकोजेब 0.2 प्रतिशत (2 ग्राम/लीटर पानी) के साथ मोनोक्रोटोफॉस 0.04 प्रतिशत (4 मिली. 10 लीटर पानी में) के घोल का छिड़काव करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">मटर</h3> <h4>सिंचाई</h4> <p style="text-align: justify;">सब्जी मटर में फूल आते समय हल्की नमी होनी चाहिए अन्यथा आवश्यकता होने पर हल्की सिंचाई करें। आवश्यकतानुसार दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय करनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">सेम (फ्रेंचबीन)</h3> <h4>बुआई</h4> <p style="text-align: justify;">सेम (फ्रेंचबीन) सभी प्रकार की मृदा में उगाया जा सकता है। मैदानी क्षेत्रों में 20 से 30 जनवरी तक इसकी बुआई की जा सकती है।</p> <h4 style="text-align: justify;">किस्में</h4> <p style="text-align: justify;">झाड़ीनुमा किस्मों कोनटनडर व पूसा सरवती के 37 कि.ग्रा. बीज को 2 फुट पंक्तियों में तथा 8 इंच की दूरी पर पौधों को लगाएं। लम्बी ऊंची किस्में कैन्टुकी व हेमलता के 17 कि.ग्रा. बीज को 3 फुट पंक्तियों में तथा 1 फुट पौधे में दूरी पर लगाएं। बेलें चढ़ाने के लिए लकड़ी या लोहे के खम्बे लगाएं।</p> <h4 style="text-align: justify;">उर्वरक</h4> <p style="text-align: justify;">बीजाई से पहले खेत में 100 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद, 4 बोरे सिंगल सुपर फॉस्फेट, 1 बोरा म्यूरेट ऑफ पोटाश तथा 1 बोरा लाल यूरिया का प्रयोग करें। पहली सिंचाई, बीजाई के 17 दिनों बाद करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">प्याज</h3> <h4>रोपाई </h4> <p style="text-align: justify;">जिस खेत में प्याज की रोपाई करना चाहते हों, उसे 2-3 बार जुताई करके पाटा चलाकर समतल कर लें। यदि मिट्‌टी की जांच उपलब्ध न हो, तो रोपाई से 15-20 दिनों पहले 20-25 टन गोबर की सड़ी हुई खाद डालें और रोपाई के समय 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फॉस्फोरस एवं 80-100 कि.ग्रा. पोटाश मृदा में मिलाएं। तैयार खेत में पंक्ति से पंक्ति एवं पौधों से पौधों के बीच की दूरी 15×10 सें.मी. रखते हुये 2 सें.मी. की गहराई पर रोपाई कर दें। रोपाई के समय खेत में नमी बनाये रखें एवं 3-4 बार हल्की सिंचाई करें। प्याज की रोपाई का काम भी किसान भाई इस माह के प्रथम सप्ताह तक पूरा कर लें। </p> <h3 style="text-align: justify;">लहसुन</h3> <p style="text-align: justify;">लहसुन की फसल में आवश्यकतानुसार समय पर सिंचाई तथा गुड़ाई करते रहें। लहसुन में नाइट्रोजन की दूसरी टॉप ड्रेसिंग के लिए बुआई के 50-60 दिनों बाद 74 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">शिमला मिर्च </h3> <p style="text-align: justify;">इस माह में बोई गयी शिमला मिर्च मई में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। </p> <h3 style="text-align: justify;">पालक, मेथी एवं धनिया</h3> <p style="text-align: justify;">पालक, मेथी एवं धनिया की पत्तियों की कटाई कर बाजार भेजें। यदि इनसे बीज लेना हो तो पत्तियां काटना बन्द कर दें तथा फसल में 25 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हैक्टर की दर से टॉप ड्रेसिंग करें। हर 17-20 दिनों बाद कटाई करके पालक में 20 कि.ग्रा. तथा मेथी में 10 कि.ग्रा. यूरिया छिड़क कर हल्की सिंचाई करें तथा खरपतवार निकाल दें।</p> <h4 style="text-align: justify;">कीट नियंत्रण </h4> <p style="text-align: justify;">कीट नियंत्रण के लिए रसायनों का प्रयोग न करें परंतु बहुत अधिक आक्रमण होने पर कटाई करके खेत में 2 मि.ली. मैलाथियान 70 ई.सी. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">कद्‌दूवर्गीय सब्जियां</h3> <p style="text-align: justify;">कद्‌दूवर्गीय सब्जियों के लिए खेत की तैयारी के समय 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद या 7-8 टन नाडेप कम्पोस्ट प्रति हैक्टर की दर से मृदा में मिला दें तथा बुआई से पूर्व प्रति हैक्टर 15-20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 25 कि.ग्रा. फास्फोरस व 25 कि.ग्रा. पाेटाश आपस में मिलाकर बोने वाली नालियों या थाले बनाकर मिट्‌टी में अच्छी तरह मिला दें। तत्पश्चात एक स्थान पर 2-3 बीज की बुआई करें।</p> <p style="text-align: justify;">इस माह के अन्त में जायद में मिर्च, कद्‌दूवर्गीय सब्जियां, भिन्डी, प्रेंफचबीन, लोबिया एवं बैंगन की फसलों के लिए खेत की तैयारी अभी से शुरु कर दें। </p> <h3 style="text-align: justify;">गाजर </h3> <p style="text-align: justify;">गाजर की पूसा रुधिर और पूसा आसिता किस्में सही समय पर बुआई करने पर इस माह में उपलब्ध होने लगती हैं। </p> <h3 style="text-align: justify;">खीरावर्गीय बेमौसमी फसल</h3> <p style="text-align: justify;">खीरावर्गीय बेमौसमी फसलों को पॉलीहाउस में कैप्टान 0.10-2.0 ग्राम/लीटर की दर से <a href="../../../../../../../../agriculture/91594393793f-906917924/92c94091c/91693094092b-915940-92b938932/92c94091c94b902-91593e-90992a91a93e930">बीज उपचार </a>कर 1-2 बीजों को 16 सें.मी. आकार की पॉलीथीन थैलियों में बो दिया जाता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">बेबी मक्का</h3> <p style="text-align: justify;">इस माह में बेबी मक्का की बुआई भी की जा सकती है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह, 'सस्य विज्ञान संभाग एवं<a href="../../../../../../../../agriculture/crop-production/93892c94d91c93f92f94b902-915940-92a94c927-92494892f93e930940-90f935902-90991793e928947-915940-93593f92793f92f93e902/संरक्षित-खेती-null-1"> संरक्षित खेती</a> और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>