<p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">सोयाबीन</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">इक्कीसवीं सदी की एक चमत्कारिक फसल है। इसमें पाये जाने वाले विविध लाभकारी गुणों के कारण यह भारत की ग्रामीण जनता में व्याप्त प्रोटीन के कुपोषण की समस्या को कम करने का सामर्थ्य रखती है। यह एक तेलयुक्त फसल है। इसमें प्रोटीन की मात्र औसतन </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">40 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">प्रतिशत तथा तेल की मात्र लगभग </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">20 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">प्रतिशत होती है। देश में इसकी व्यावसायिक खेती </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">1970 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">के दशक के प्रारंभ में शुरू हुई थी। विगत </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">40-45 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">वर्षों में देश में सोयाबीन के क्षेत्रफल तथा उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है तथा सोयाबीन देश में प्रमुख तिलहनी फसल के रूप में स्थापित हो गई है। वर्तमान में सोयाबीन की फसल देश में करीब </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">110 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">लाख हैक्टर क्षेत्र में बोयी जाती है। </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">देश में सोयाबीन के कुल क्षेत्रफल का लगभग </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">53 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">प्रतिशत मध्य प्रदेश में होने से इसको </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">'</span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">सोया-राज्य</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">' </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">कहा जाता है। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और राजस्थान</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">क्षेत्रफल व उत्पादन के आधार पर क्रमशः दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं। किसानों</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">अनुसंधानकर्ताओं एवं विस्तारकर्ताओं के अथक प्रयासों के कारण देश के अन्य राज्यों में भी सोयाबीन की खेती के क्षेत्रफल में वृद्धि हो रही है। इन राज्यों में कर्नाटक</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">तेलंगाना एवं गुजरात प्रमुख हैं। सोयाबीन अन्य खरीफ फसलों की तुलना में भी अधिक लाभदायक है।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;"><img src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cImage11.jpg" width="230" height="180" /></span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">किसान अपनी फसल की बिक्री के समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान नहीं रखते हैं</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">जिससे उनको अपने कृषि उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। किसानों की अक्सर शिकायत रहती है कि उनको अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। बाजार में व्यापारी उनको फसल का उचित मूल्य नहीं देते हैं</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">जबकि दूसरी ओर व्यापारियों से बात करने पर पता चलता है कि किसान अपने कृषि उत्पाद को बेचने से पूर्व की तैयारी नहीं करते हैं या कहें कि खलिहान से सीधा बाजार में विपणन के लिए ले आते हैं। कृषि उत्पाद की बिक्री से पूर्व की तैयारी जैसे उत्पाद छनाई व सफाई</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">अनाज व तिलहन की सुखाई आदि कार्य व्यापारियों को करने पड़ते हैं और उनका लाभ भी व्यापारियों को ही मिलता है। </span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">सोयाबीन की फसल सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुछ समय बाद पकने की स्थिति में होगी तथा किसान अपनी फसल को बेचने की तैयारी करेंगे। किसान अपनी </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">3-4 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">महीनों की अथक मेहनत से तैयार फसल को उचित तरीके से बेचकर अधिक आमदनी कमा सकते हैं। इस फसल को उचित तरीके से बेचने के लिए किसानों को निम्नलिखित बिन्दुओं का ध्यान रखना चाहिएः</span></p> <h3 class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">फसल की सही समय पर कटाई </span></h3> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">अधिकतर देखने में आता है कि किसान सोयाबीन को फसल के पकने की सही अवस्था पर नहीं काटते हैं। इससे उनको उपज का तो नुकसान होता ही है</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">फसल की गुणवत्ता भी खराब होती है। पकने के बाद फसल खेत में </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">2-3 </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">दिनों तक भी ज्यादा खड़ी रह जाती है तो उसकी फलियां छिटकने लग जाती हैं। खासकर जब फलियां सूख गयी हों। इससे सोयाबीन के दाने खेत में बिखरने लग जाते हैं तथा किसान को उत्पादन कम मिलता है। इस हानि से बचने के लिए किसानों को सोयाबीन की फसल सही अवस्था में काट लेनी चाहिए। सोयाबीन की फसल को काटने की अवस्था होती है</span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;">जब पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगें तथा फलियां पीली या भूरी हो जायें। फलियों को </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">90-95</span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;"> प्रतिशत तक सूखने से पहले ही फसल काट लेना चाहिए। फसल काटने के समय नमी </span><span style="font-family: 'Mangal',serif;">15-16</span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal',serif; mso-bidi-language: HI;"> प्रतिशत होनी चाहिए।</span></p> <h3 class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">उचित तरीके से गहाई (थ्रेशिंग)</span></h3> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">अक्सर देखा जाता है कि फसल को बेचने की जल्दी में किसान उचित समय पर व सही तरीके से थ्रेशिंग नहीं करते हैं। थ्रेशर के ड्रम की गति ज्यादा रखने से सोयाबीन के दाने टूटने लगते हैं। इससे उपज की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इसका असर उपज के मूल्य पर पड़ता है तथा किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिलता है। सोयाबीन उत्पाद को यदि बीज के रूप में उपयोग में लाना है तो सोयाबीन की गहाई के लिए थ्रेशर में ड्रम की गति (स्पीड) 350-400 आर.पी.एम. पर ही रखें जिससे कि बीज की अंकुरण क्षमता पर विपरीत प्रभाव न पड़े।</span></p> <h3 class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">तैयार फसल को सुखाना </span></h3> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">अधिकतर किसान सोयाबीन की उपज को खलिहान से निकालने के तुरन्त बाद ही बाजार में बेचने के लिए ले जाते हैं। इसके पीछे उनकी सोच होती है कि गीली सोयाबीन बाजार में बेचने से उनको अधिक तौल का लाभ मिल जायेगा। हालांकि कुछ छोटे व गरीब किसानों को कर्ज चुकाने की मजबूरी के कारण भी ऐसा करना पड़ता है। गीली सोयाबीन बाजार में ले जाने से लाभ की बजाय हानि ज्यादा होने की आशंका रहती है। गीली सोयाबीन का ज्यादा दिनों तक भंडारण भी नहीं किया जा सकता है, क्योंकि नमी ज्यादा होने के कारण फफूंद/कीट लगकर जल्दी खराब हो जाती है। खरीददार/व्यापारी सोयाबीन खरीदते समय उसमें नमी की मात्रा की जांच करते हैं। फसल में नमी की मात्रा की दर से ही उसका मूल्य तय होता है। अगर किसान की लायी हुई फसल में नमी की मात्रा ज्यादा है तो खरीददार ज्यादा नमी का 'काटा' काटते हैं अथवा उसका भाव कम देते हैं। इससे बचने के लिए किसानों को चाहिए कि अपनी सोयाबीन की उपज को 2-3 दिनों तक खलिहान में सुखाकर ही बाजार में ले जायें। ध्यान रहे उस समय उपज में नमी की मात्रा 10-12 प्रतिशत हो।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;"><img src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccImage3.jpg" width="210" height="190" /></span></p> <h3 class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">उत्पाद की सफाई </span></h3> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">किसान सोयाबीन की उपज को बेचने के लिए मंडी ले जाने से पहले उसकी छनाई/ सफाई भी नहीं करते हैं। थ्रेशर से निकली सोयाबीन को ऐसे ही बाजार ले जाते हैं। ऐसी उपज में कई प्रकार की अशुद्धियां जैसे डंठल, मिट्‌टी और कंकड़ आदि होते हैं। उपज की सफाई नहीं होने से अशुद्धियां भी उपज के साथ मंडी पहुंच पाती हैं, जिससे परिवहन लागत भी बढ़ जाती है। फसल को इस तरह से मंडी ले जाने पर खरीददार उसका कम मूल्य भी देते हैं। अतः किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य लेने के लिए उसको साफ करके ही बाजार ले जाना चाहिए। साफ सोयाबीन अधिक मूल्य पर बिकती है, क्योंकि उसकी सफाई नहीं करनी पड़ती और समय एवं मेहनत की बचत होती है।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;"><img src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccImage2.jpg" width="220" height="190" /></span></p> <h3 class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">समूह में बेचना</span></h3> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">देश में सोयाबीन उगाने वाले ज्यादातर किसान छोटे एवं सीमांत श्रेणी के हैं तथा उनकी विपणन के लिए उपज भी कम ही होती है। प्रत्येक किसान अपनी-अपनी उपज को अपने हिसाब से बाजार ले जाते हैं। इससे सभी किसानों का समय व्यर्थ होता है तथा उनको परिवहन का खर्चा भी ज्यादा लगता है। फसल की बेचने योग्य मात्रा कम होने के कारण उपज का मूल्य भी कम मिलता है। </span></p> <h3 class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">बाजार का चयन </span></h3> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">अधिकतर यह देखा जाता है कि किसान अपनी उपज को बेचने के लिए नजदीक की मंडी में ले जाते हैं। उपज का अधिक मूल्य पाने के लिए किसानों को सबसे पहले अपने आसपास की सभी मंडियों में सोयाबीन के प्रचलित मूल्य का पता करना चाहिए। आजकल सभी प्रमुख समाचारपत्रों, दूरदर्शन के किसान चैनल एवं स्थानीय टीवी चैनलों पर फसल के प्रचलित मूल्य बताये जाते हैं। इसके अलावा मंडी बोर्ड/परिषद की वेबसाइट पर भी आसपास की सभी मंडियों में फसल का क्या दाम चल रहा है, देखे जा सकते हैं। इसके बाद किसानों के आसपास की मंडियों के लिए लगने वाले परिवहन खर्च की गणना कर लेनी चाहिए। जिस मंडी में परिवहन खर्च काटकर, सोयाबीन का ज्यादा दाम मिल रहा हो वहां अपने उत्पाद को बेचने के लिए ले जाना चाहिए।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-family: Mangal, serif;">किसान जब स्थानीय स्तर पर अपनी कृषि उपज बेचने के लिए मंडी (ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ी) में लाते हैं तो उन्हें स्थानीय व्यापारियों के साथ-साथ इंटरनेट के माध्यम से देश के अन्य राज्यों में कार्यरत व्यापारियों को भी अपनी उपज बेचने का विकल्प एवं व्यवस्था रहती है। जहां अच्छे मूल्य मिल रहे हों, किसान वहां बेचने के लिए स्वतंत्र है। किसान अपनी उपज को ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार के जरिये बेचने के लिए इसकी वेबसाइट पर पंजीकृत करें। यह एक बहुत आसान प्रक्रिया है। इसके माध्यम से बेचे गए उत्पाद की कीमत का भुगतान किसानों को तुरन्त कर दिया जाता है। इस प्रकार सोयाबीन उत्पादक किसान उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर अपनी फसल को उचित तरीके से तथा अन्य विकल्पों के माध्यम से विक्रय कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।</span></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><img src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccImage4.jpg" width="186" height="169" /></p> <p class="MsoNormal" style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), <span lang="HI" style="font-family: Mangal, serif;">पुरुषोत्तम शर्मा भाकृअनुप-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान</span><span style="font-family: Mangal, serif;">, </span><span lang="HI" style="font-family: Mangal, serif;">इन्दौर </span><span style="font-family: Mangal, serif;">(</span><span lang="HI" style="font-family: Mangal, serif;">मध्य प्रदेश)।</span></p>