जैव उर्वरक का लाभ जैविक खाद लाभकारी जीवाणुओं का ऐसा जीवंत समूह है, जिनको बीज, जड़ों या मिट्टी में प्रयोग करने पर पौधे को अधिक मात्राा में पोषक तत्व मिलने लगते हैं। इसके साथ ही साथ मृदा की जीवाणु क्रियाशीलता एवं सामान्य स्वास्थ्य में भी वृद्धि होती है। विभिन्न जैव उर्वरक नाइट्रोजन के लिए ये जीवाणु वातावरण में उपस्थित नाइट्रोजन (78 प्रतिशत) का परिवर्तन कर, उसे पौधों के योग्य (अमोनियाकल) बना देते हैं। साथ ही ये पौधे हेतु वृद्धि हार्मोन बनाते हैं। इनमें प्रमुख हैं एसीटोबैक्टर एजोटोबैक्टर एजोस्पाइरिलम एजोटोबैक्टर जैविक खाद यह जैविक खाद 'एजोटोबैक्टर क्रोकोकम' से बनी है। यह जीवाणु मिट्टी में कहीं भी पाया जाता है। कुछ कीटनाशक पदार्थ छोड़ता है,जिससे जड़ों की रोगों से रक्षा होती है। यह पौधे की वृद्धि एवं उत्पादकता में 25प्रतिशत तक बढ़ोतरी करता है। यह नाइट्रोजन परिवर्तन करता है एवं वृद्धि हार्मोन बनाता है, जिससे जड़ों की वृद्धि होती है। एजोस्पाइरिलम जैविक खाद यह जैविक खाद 'एजोस्पाइरिलम ब्रैजिलैंस या लिपोपैफरम' से बनी है। यह जीवाणु जड़ों के समीप पाया जाता है। यह 30-35 प्रतिशत रासायनिक नाइट्रोजन खाद की बचत कर सकता है तथा साथ में वृद्धि तत्व भी देता है। यह पौधे के जमाव एवं बढ़ने में मदद कर, उत्पादकता में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकता है। फॉस्पफोरस घुलनशील जैविक खाद ये जीवाणु पौधों की जड़ों के पास रहकर अनुपलब्ध फॉस्पफोरस को घुलनशील कर उपलब्ध करवाते हैं। ये पौधे की वृद्धि को बढ़ाते हैं तथा उत्पादकता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाते हैं। यह जैविक खाद बैसिलस एवं/या एस्पर्जिलस आवामोरी से बनी है। जैविक खाद के प्रभावहीन होने के कारण प्रभावहीन जीवाणु का उपयोग। जीवाणु संख्या कम होना। अनचाहे जीवाणुओं का ज्यादा होना। जीवाणु खाद को उच्च तापमान या सूर्य की किरणों में रखना। अनुशंसित विधि का ठीक से प्रयोग न करना। जीवाणु खाद को रसायनों के साथ प्रयोग करना। प्रयोग के समय मृदा में तेज तापमान अथवा कम पानी का होना। मृदा का अति क्षारीय और अम्लीय होना। फॉस्पफोरस और मॉलिब्डिनम की अनुपलब्धता। मृदा में जीवाणुओं एवं वायरस का अधिक होना। जीवाणु को किसी भी कैरियर जैसे कि लिग्नाइट, गोबर-खाद, वर्मिकुलाइट, पीट एवं चारकोल में रखा जा सकता है। गन्ने में जीवाणु खाद की मात्रा एवं प्रयोग विधि · मात्रा: 5 कि.ग्रा. जीवाणु खाद (एक एकड़ के लिए पर्याप्त) का 100 लीटर पानी में घोल बनायें तथा गन्ने के टुकड़ों को इस घोल में भिगोकर कूंड़ों में लगायें। इसके बाद कूंड़ों को ढक दें। जैविक-खाद से लाभ फसल उत्पादन को 10-30 प्रतिशत बढ़ाता है। कृत्रिम रसायनों का 25 प्रतिशत उपयोग कम करता है। पौधों की वृद्धि में सहायक है। मृदा की क्रियाशीलता को बढ़ाता है। मृदा की उत्पादकता को बढ़ाता है। ·पौधों को कीटाणुओं के प्रकोप से भी बचाता है। जीवाणु खाद के प्रयोग में सावधानियां जीवाणु खाद को ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें और सूर्य की किरणों एवं गर्मी से बचायें। जीवाणु खाद और रासायनिक खाद को एक साथ मिलाकर प्रयोग न करें। जैविक खाद के थैले पर जीवाणु खाद एवं फसल का नाम, बनने एवं अंतिम प्रयोग तिथि, बनने की नंबर संख्या, प्रयोग विधि एवं बनाने वाले का नाम-पता देखकर ही खरीदें जैविक खाद को उसकी अंतिम-तिथि से पहले ही उपयोग में लें। जैविक-खाद और रासायनिक खाद को उचित मात्रा एवं तरीके से उपयोग करना चाहिए। यह सही है कि जैविक खाद, रासायनिक उर्वरक का स्थान नहीं ले सकती। किंतु किसान यदि दोनों का उचित मात्रा में उपयोग करें तो आर्थिक लाभ के साथ में वातावरण भी दूषित नहीं होगा। जैविक खाद की विशेषताएं एसीटोबैक्टर जैविक खाद यह जैविक खाद जीवाणु एसीटोबैक्टर डाइएजोट्राफिकस से बनी है। यह जीवाणु गन्ने के अंदर रहता है और इसके सभी भागों (जड़, तना और पत्ते) में पाया जाता है। यह सामान्य फसल उत्पादन में 5-20 टन/हैक्टर और चीनी परता में 5-10 प्रतिशत की वृद्धि करता है। इसके प्रयोग के 5-6 सप्ताह बाद इसका प्रभाव दिखाई देता है। यह मुख्यतः गन्ने की लंबाई एवं मोटाई को बढ़ाता है। स्त्रोत: खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, गन्ना विकास निदेशालय लखनऊ (उ.प्र.)