<h3 style="text-align: justify;">नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः चूहों को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?</p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः नियंत्रण के लिये सबसे पहले निश्चित किया जाये कि चूहे उसी खेत में निवास करते हैं या बाहर से आते हैं। आमतौर पर अगर वह बाहर से आते हैं, तब उनका आक्रमण खेत के किनारों से प्रारम्भ होता है। अगर उनके बिल खेत के अन्दर हैं, तब उनका आक्रमण टुकड़ों में खेत के अन्दर देखा जाता है। गन्ने की कटाई के बाद गन्ने के खेत के अन्दर और आसपास जीवंत बिलों की पहचान आवश्यक है। इसके लिये सभी बिलों के मुंह मिट्टी से बंद कर अगले दिन फिर से खुली बिलों को देखकर जीवंत बिलों की पहचान होती है। इन क्रियाशील बिलों में सल्फॉस की आधी गोली डालकर इनके मुंहों को मिट्टी से फिर बंद कर दिया जाता है। क्योंकि सल्फॉस एक गंधरहित गैस उत्पन्न करने वाला ध्रूमक है। इसका प्रयोग दो अनुभवी कर्मियों द्वारा किया जाना चाहिये। इसके अलावा नरम छिलके वाली प्रजातियों जैसे कि को.-86032, को चूहों से ग्रसित इलाकों में नहीं लगाना चाहिये जबकि सख्त छिलके वाली प्रजातियां वहां लगाई जा सकती हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">सर्वोत्तम रसायन </h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः चूहों के लिए विषाक्त प्रलोभन खाने में मिलाने के लिये कौन सा रसायन सर्वोत्तम है?</p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः सामान्यतः खेतों में अन्य जीव-जन्तुओं की उपलब्ध्ता के कारण विषाक्त प्रलोभन देना कोई विशेष फायदेमंद नहीं होगा। अगर जिंक फॉस्फाइड से खाने को विषाक्त बनाया जाता है, तब कुछ बार खाने के बाद चूहों में प्रलोभन खाने के प्रति संकोच विकसित हो जायेगा। इस प्रकार प्रलोभन खाने प्रभावी नहीं रहेंगे। इसके अलावा प्रलोभन खाने पक्षियों, जैसे कि तोता, पैटरिज, कोयल, इत्यादि को भी मार देंगे।</p> <h3 style="text-align: justify;">चूहों के शत्रु</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः क्या चूहों के शत्रु भी उपलब्ध हैं?</p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः चूहों के शत्रु उपलब्ध तो हैं मगर प्रयोगात्मक दृष्टि से काम के नहीं। जंगली बिल्लियां, सांप, उल्लू, नेवले, भेड़िये इत्यादि प्रभावी तो हैं मगर उन्हें खेतों तक लाना सम्भव नहीं है। घरेलू बिल्लियां इतनी प्रभावी नहीं होने के बावजूद ये दूसरे आसान आहार की तरफ, जैसे कि छिपकलियों की ओर आकर्षित होंगी बजाए के चूहों के, जिनके लिये इन्हें छोड़ा गया है।</p> <h3 style="text-align: justify;">बिल्ली, सांप व उल्लू का प्रयाेग </h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः क्या हम बिल्ली, सांप व उल्लू को चूहों के नियंत्रण के लिये प्रयोग कर सकते हैं?</p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः ये सभी चूहों के प्राकृतिक शत्रु हैं लेकिन इन्हें गन्ने के खेतों तक लाना मुश्किल काम है। अगर इनको किसी प्रकार से लाया भी गया, तो सांप के काटने का खतरा बना रहता है और उल्लुओं की बोली को अशुभ माना जाता है। जंगली बिल्लियों को छोड़कर, पालतू बिल्लियां खेतों में न केवल बहुत कम प्रभावी होती हैं, बल्कि ये पालतू पक्षियों के लिये भी खतरनाक हो सकती हैं। इसके अलावा शत्रु जीवों का सामान्यतः क्षेत्राीय आचरण रहता है, जिसके कारण कई शत्रु जीवों को किसी एक क्षेत्र में इकट्ठा रख पाना सम्भव नहीं होता। इसके कारण से अपेक्षित परिणाम, एक निश्चित समय में, प्राप्त नहीं हो पाते। यह भी सम्भव है कि अगर चूहों की समस्या हल हो भी गई तो ये शत्रु जीव कहीं हमारे लिये दूसरे खतरे का कारण न बन जायें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), पूसा राेड, नई दिल्ली। </p>