कम सिंचाई की आवश्यकता इस विधि से बुआई करने पर कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। यदि किसी कारण सिंचाई में विलंब भी हो जाए तो गन्ने की पफसल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गन्ना गहराई में बोया जाता है और उसकी जड़ें उस क्षेत्रा में होती हैं जहां कि स्वाभाविक रूप से हमेशा नमी मौजूद रहती है। इस कारण न केवल कुल सिंचाई के पानी में कमी होती है, बल्कि प्रति सिंचाई कम जल का उपयोग होता है। पूर्ण विकास रिंग-पिट विधि से केवल मुख्य पौधों का ही पूर्ण विकास किया जाता है। इससे सभी गन्ने एक उम्र के स्वस्थ तथा मोटी पोरी वाले होते हैं एवं उन्हें बढ़ने व पकने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। अन्य कल्ले या तो थोड़ा बढ़कर स्वयं मर जाते हैं या काट दिये जाते हैं। अतः उनका विकास नहीं हो पाता है तथा उनके द्वारा नष्ट होने वाली खुराक भी बच जाती है, जिसका उपयोग मुख्य पौधे द्वारा किया जाता है। खर्चे में बचत खेत की जुताई एवं गुड़ाई की आवश्यकता कम होती है। इस विधि में सीधे ही गड्ढों की खुदाई कर गन्ने की बुआई कर ली जाती है, जिसके कारण जुताई एवं गुड़ाई में होने वाले खर्चे में बचत होती है। 30 से 35 प्रतिशत क्षेत्र का ही उपयोग रिंग-पिट विधि में पूरे खेत का मात्रा 30 से 35 प्रतिशत क्षेत्र ही उपयोग में लाया जाता है। सिंचाई साधनों का उचित और पूर्ण उपयोग गड्ढों में जो खाद या दवाइयां प्रयोग की जाती हैं, उनका गन्ने की फसल द्वारा ही उपयोग किया जाता है तथा ये अनावश्यक रूप से व्यर्थ नहीं होती हैं। इसी प्रकार सिंचाई में प्रयोग किया जाने वाला पानी मात्रा 30 से 35 प्रतिशत क्षेत्र में लगाया जाता है। दूसरे शब्दों में सिंचाई साधनों का उचित और पूर्ण उपयोग होता है। अवरोध के बिना खड़ी फसल में पंक्तियों तथा पौधों के बीच में इतना अधिक खाली स्थान होता है कि कोई भी क्रिया जैसे-कीटनाशकों का छिड़काव, गन्ने को बांधना, इत्यादि बिना किसी अवरोध के की जा सकती हैं। अधिक चीनी की मात्रा प्रत्येक गन्ने को वांछित सूर्य का प्रकाश और हवा बिना किसी रुकावट के प्राप्त होती रहती है। प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि रिंग विधि से बोये हुए गन्ने में पारंपरिक तरीके से बोये गये गन्ने की अपेक्षा अधिक चीनी की मात्रा प्राप्त होती है। मृदा की संरचना में सुधार काफी गहराई तक गड्ढे खोदने से जमीन की निचली सतह को प्रकाश, हवा और जीवांश मिलने के कारण मृदा की संरचना में सुधार होता है। गन्ने का बचाव गन्ने की बुआई गहराई में करने और पंक्तियों के बीच में पर्याप्त स्थान होने के कारण तेज हवा या आंधी आने पर भी गन्ना गिरने से बच जाता है। छोटे किसानों को अधिक लाभ छोटे किसान, रिंग-पिट विधि से खेती कर अधिक लाभ उठा सकते हैं। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), राम निवास- पौध रोग विज्ञान विभाग, दीपक मौर्या-सब्जी विज्ञान विभाग और अंकित कुमार पाण्डेय -फल विज्ञान विभाग, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)