गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी के उद्देश्य से कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इस दिशा में लंबे समय से अनुसंधान एवं शोध कार्य किए जा रहे हैं। इस क्रम में किसानोपयोगी गन्ना उत्पादन तकनीकों का क्षेत्र एवं जलवायु तथा संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार विकास किया गया है। प्रस्तुत लेख में ऐसी ही महत्वपूर्ण तकनीकों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। पंक्ति से पंक्ति की दूरी रोपण सामग्री और पादप ज्यामिति गन्ना फसल की स्थापना में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जिससे यह रोपण हमें आने वाले 3 से 4 वर्षों तक खेत में पौधा फसल और पेड़ी फसल प्रणाली द्वारा उत्पादन दे सके। उपयुक्त रोपण सामग्री और रोपण की ठीक ज्यामिति द्वारा हम स्थान और प्रकाश का अनुकूलतम उपयोग कर संसाधनों से सर्वोत्तम उत्पादन प्राप्त कर पायेंगे। गन्ने की कम उत्पादकता का एक कारण शायद पौधों के बीच अपर्याप्त दूरी हो सकती है। आमतौर पर पंक्तियों के बीच की दूरी प्रजातियों के कल्ले निकलने की क्षमता, रोपण समय, मृदा का उर्वरा स्तर और सूखे जैसे तनाव में उत्पादकता निर्भर करती है। पंक्तियों के बीच की कम दूरी का उपयोग मृदा के निम्न उर्वरा स्तर, कम कल्लों के उत्पादन क्षमता वाली प्रजातियों, देर से किये गये रोपण, ठंड व धीमी वृद्धि और सूखे की स्थितियों में किया जाता है। अतः 75 सें.मी. की दूरी मृदा की निम्न उर्वरा क्षमता, देर से रोपण और सूखे के हालातों में, 90 सें.मी. की दूरी का उपयोग अच्छी उर्वरा शक्ति वाली मृदाओं और वसंत ऋतु में रोपण की स्थिति में किया जाता है। शरद ऋतु में रोपण की स्थिति में 120 सें.मी. की दूरी का उपयोग अंतर पफसलीकरण के साथ किया जाता है। रोपण का समय वसंत ऋतु मध्य फरवरी से मार्च के अंत तक शरदकालीन ऋतु सितम्बर के आखिरी पखवाड़े से अक्तूबर के प्रथम पखवाड़े तक गन्ना बीज दर विभिन्न प्रजातियों के गन्ना बीज दर का प्रयोग क्षेत्रा के साथ बदलता रहता है। पंक्ति से पंक्ति की 90 सें.मी. की दूरी पर 12 गन्ना बीज टुकड़ों को प्रति मीटर की दर से रखने पर 35 से 45 क्विंटल प्रति एकड़ गन्ना बीज की आवश्यकता होती है। एकल कलिका वाले 12 गन्ना बीज टुकड़ों को प्रति मीटर की दर से रोपण करने पर 53,000 से 53,500 टुकड़ों का प्रति एकड़, जबकि इन्हें एक दूसरेे को अंत से अंत मिलाकर रखने पर 31,000 से 31,500 टुकड़ों की आवश्यकता होती है। इससे 40 से 50 प्रतिशत गन्ना बीज की बचत हो जाती है। दो कलिका वाले गन्ना बीज टुकड़ों को अंत से अंत मिलाकर रखने पर 26,500 से 27,000 बीज टुकड़ों की आवश्यकता होती है, जबकि तीन कलिका वाले गन्ना बीज टुकड़ों को अंत से अंत मिलाकर रखने पर 17,500 से 18,000 बीज टुकड़ों की आवश्यकता होती है। बीजोपचार गन्ना फसल वानस्पतिक रूप से प्रसारित की जाती है। अतः मृदा में रोपण के बाद इन पर कीटों, रोगों व हानिकारक जीवों के हमले का खतरा बना रहता है। इसके कारण फुटाव में कमी आ जाती है। बीज उपचार का उद्देश्य गन्ना बीज टुकड़ों को कीटों, रोगों के हमले से बचाकर उच्च फुटाव प्राप्त करना है। रोपण के लिये रोग से स्वतंत्र बीज का ही उपयोग सदा करना चाहिये। रोपण से पहले बीज टुकड़ों का कार्बेन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत (100 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी में) घोल से 5 मिनट तक उपचार किया जाना चाहिये। बीज फसल बीज फसल के लिये गन्ना टुकड़ों को नम गर्म वातित उपचार इकाई में 54 डिग्री सेल्सियस पर 1 घंटे के लिये उपचारित कर ही रोपण किया जाना चाहिये। स्त्राेत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) अर्जुन तायडे, पी. गीता, एस. अनुशा, ए. वेण्णिला, सी. पलणिसामी और बक्शी राम,’फसल उत्पादन विभाग, भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर।