<h3 style="text-align: justify;">दूसरी फसलाें के मुकाबले अधिक प्रभाव</h3> <p style="text-align: justify;">गन्ने के खेत में खरपतवारों का प्रकोप गन्ने में खरपतवारों का फसल के साथ मुकाबला, दूसरी कम अवधि की फसलों की तुलना में अधिक रहता है। इसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी अधिक होने के साथ-साथ इस फसल की शुरूआत में धीमी संवर्द्धनगति शामिल है।</p> <h3 style="text-align: justify;">200 से भी अधिक खरपतवार प्रजातियां</h3> <p style="text-align: justify;">गन्ने के खेतों से 200 से भी अधिक खरपतवार प्रजातियों की पहचान की गई है, जिनमें से 30 आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। गन्ने के खेत में पाई जाने वाली खरपतवार प्रजातियां जलवायु की स्थिति, मृदा प्रकार, अपनाई गई फसलीकरण-प्रणालियों और खरपतवार नियंत्रण तथा फसल की खेती के लिये अपनाई जाने वाली प्रबंधन पद्धतियों पर निर्भर करती हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="218" height="191" /></p> <h3 style="text-align: justify;">शुरुआती अवस्था में नियंत्रण जरुरी</h3> <p style="text-align: justify;">अध्ययनों में पाया गया है कि फसल की शुरुआती अवस्था में अगर खरपतवार नियंत्रण प्रभावी रूप से नहीं किया गया तो 17.2 से 35.4 टन/हैक्टर गन्ना उत्पादन में कमी आ सकती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">उपयाेगी रसायन एवं मात्रा</h3> <p style="text-align: justify;">गन्ने की फसल में खरपतवारों के उगने से पहले खरपतवारों के नियंत्रण के लिये एट्राजिन-2.0 से 2.5 कि.ग्रा. क्रियाशील तत्व/हैक्टर, मेट्रीब्यूजिन-1.० से 2.0 कि.ग्रा. क्रियाशील तत्व/हैक्टर पेन्डीमिथालिन-1.0 कि.ग्रा. क्रियाशील तत्व/हैक्टर | को लाभकारी पाया गया है। इनमें से एट्राजिन, जो कम कीमत में आसानी से उपलब्ध है, को विभिन्न स्थितियों में अति प्रभावी पाया गया है। इ</p> <h3 style="text-align: justify;">डालने की अवधि</h3> <p style="text-align: justify;">से गन्ने में रोपण के 3 से 4 दिनों बाद, झुकाने वाली नोक की मदद से मृदा के तल पर अच्छी तरह से स्प्रे, (2.0 से 2.5 कि.ग्रा. क्रियाशील तत्व/हैक्टर-जो मात्रा मृदा के प्रकार पर निर्भर करती |है) किया जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;"> अंतरफसलीकरण की स्थिति में </h3> <p style="text-align: justify;">यदि गन्ने में अंतरफसलीकरण करना हो तो एट्राजिन का प्रयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि कई अंतर फसलें एट्राजिन के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं। अंतर फसलों वाली गन्ने की फसल में पेंडीमिथलिन-1.0 कि.ग्रा. क्रियाशील तत्व/हैक्टर को लाभकारी पाया गया है।</p> <h3 style="text-align: justify;">गुड़ाई और निराई </h3> <p style="text-align: justify;">रोपण के 30, 60 और 90 दिनों बाद गुड़ाई और निराई तीन बार हाथ से करने से गन्ने में खरपतवारों के निकलने के बाद उनका नियंत्रण सबसे प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">यंत्रों की मदद</h3> <p style="text-align: justify;">खेती में प्रयोग किये जाने वाले यंत्रों की मदद से खरपतवार नियंत्रण सस्ता तो है, लेकिन कम प्रभावी है क्योंकि इससे गन्ने के साथ पंक्ति में उग रहे खरपतवार नहीं निकाले जा सकते है।</p> <h3 style="text-align: justify;">24-डी. खरपतवारनाशी एवं मात्रा</h3> <p style="text-align: justify;">खरपतवारों के निकलने के बाद उनके नियंत्रण के लिये 24-डी. खरपतवारनाशी को आमतौर पर प्रयोग किया जाता है। इसकी सिफारिश की गई मात्रा 1.0 से 2.0 कि.ग्रा. क्रियाशील तत्व/हैक्टर के बीच रहती है, जो खरपतवारों की अधिकता पर निर्भर करती है। लेकिन इससे केवल चौड़े पत्तों वाले खरपतवारों का ही नाश होता है, घासीय पौधे इससे प्रभावित नहीं होते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) अर्जुन तायडे, पी. गीता, एस. अनुशा, ए. वेण्णिला, सी. पलणिसामी और बक्शी राम,’फसल उत्पादन विभाग, भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर।</p>