कई सामग्रियों का उपयोग पलवार के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग मृदा की नमी को बनाए रखने, मृदा के तापमान को विनियमित करने तथा विभिन्न प्रकार के खरपतवारों की वृद्धि को दबाने के लिए किया जाता है। इसे मृदा की सतह, पेड़ों, रास्तों, फूलों की क्यारियों के आसपास, ढलानों पर मृदा के कटाव को रोकने और फूलों तथा सब्जियों की फसलों के उत्पादन के लिए प्रयोग करते हैं। पलवार की परतें बिछाते समय सामान्य रूप से 2 इंच (5.1 सें.मी.) या अधिक मोटी होती हैं। पलवार (मल्च) एक नम मृदा की सतह पर प्रयुक्त सामग्री की एक परत है। इसको लगाने से मृदा में नमी का संरक्षण, उर्वरता और स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ । खरपतवार के प्रकोप में कमी आती है। पलवार स्थायी (जैसे-प्लास्टिक की परत) या अस्थायी (जैसे पौध अवशेष) हो सकता है। इसे नग्न मृदा या मौजूद पौधों के आसपास उपयोग में लाया जा सकता है। पलवार के लाभ यह मृदा में नमी को संरक्षित करता है। प्रति बूद अधिक उपज की अवधारणा सम्भव हो पाती है। खरपतवार की समस्या कम होती है। मृदा के कटाव को रोकता है। मदा पोषक तत्व को बनाये रखता है। मृदा में केंचुओं की गतिविधि को तेज बनाता है। मृदा की रासायनिक, भौतिक एवं जैविक गुणों में सुधार होता है। उद्देश्य उद्देश्य के अनुसार समय-समय पर पलवार का प्रयोग करते हैं। फसल उगाने के लिए मौसम की शुरुआत में पलवार प्रारम्भ में मृदा को गर्म करने और गर्मी को बनाए रखने में मदद करता है। यह कुछ फसलों की अगेती बुआई और रोपाई में भी सहायक है और यह पौधों के तीव्र विकास को प्रोत्साहित करता है। जैसे-जैसे मौसम में प्रगति होती है, पलवार मृदा के तापमान और नमी को स्थिर करता है एवं खरपतवारों को बढ़ने से रोकता है। मृदा की नमी पलवार सामग्री का प्रभाव जटिल होता है। यह मृदा और वायुमंडल के बीच एक परत बनाती है, जो धूप को मृदा की सतह तक पहुंचने से रोकती है। इस प्रकार यह वाष्पीकरण को कम करती है। हालांकि हल्की बारिश से पानी को मृदा तक पहुंचने से भी रोकती है। पलवार के रूप में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक की परत को रखा जाता है। मेड़ों पर प्लास्टिक की पतली चादर को बिछाया जाता है। इसके साथ उचित दूरी पर पौधों का प्रत्यारोपण किया जाता है। प्लास्टिक परत पानी के लिए अभेद्य होती है इसका उपयोग करने पर ड्रिप सिंचाई की आवश्यकता अक्सर होती है। इसमें प्लास्टिक परत के नीचे ड्रिप नल लगाया जाता है, जिससे पानी बूंद-बूंद करके पौधों की जड़ों में पहुंचता रहे। विभिन्न प्रकार की सामग्रियों का उपयोग पलवार के रूप में किया जाता है। कार्बनिक पलवार कार्बनिक पलवार समय के साथ सड़ जाते हैं और अस्थायी होते हैं। कार्बनिक पलवार प्रायः बारिश एवं ओस से गीला हो जाता है। यह स्थितियां उसकी उपयोगिता को प्रभावित करती हैं। ये नीचे मृदा और वायुमंडल के बीच पानी और वायु प्रवाह को अवरुद्ध करने वाले अवरोधक का निर्माण कर सकते हैं। आमतौर पर उपलब्ध कार्बनिक पलवार निम्नलिखित हैं। कार्बनिक अवशेष घास की कतरनें, पत्तियां, सूखी घास, पुआल, रसोई के अवशेष, कटी छाल, चूरा,गोले, लकड़ी के टुकड़े, कटा-फटा अखबार, कार्डबोर्ड, ऊन, पशु खाद आदि इनमें शामिल हैं। इन सामग्रियों में से कई एक प्रत्यक्ष रूप में कम्पोस्टिंग सिस्टम की तरह कार्य करती हैं। जैसे कि लॉन घास काटने की मशीन की कतरन या अन्य जैविक पदार्थों का खाद के रूप में प्रयोग। सड़ी खाद पूरी तरह से सड़कर तैयार सामग्री का उपयोग संभावित पादप विषाक्तता जैसी समस्याओं से बचने के लिए किया जाता है। खरपतवार की समस्या दूर करने के लिए घासफूस के बीज से मुक्त सामग्री को आदर्श रूप से उपयोग किया जाता है। पत्ते ये पर्णपाती पेडों से शरद ऋतु में गिरते हैं। हवा में सूखते हैं और चारों ओर उड़ते हैं, इसलिए अक्सर प्रयोग से पहले कटे हुए होते हैं। ये विघटित होते हैं तथा एक-दूसरे से चिपक जाते हैं। पानी और नमी को भी मृदा की सतह तक रिसने देते हैं। सर्दियों में ठंड से पौधों को बचाने के लिए सूखी पत्तियों का उपयोग किया जाता है। वे आमतौर पर वसंत के दौरान हटा दिए जाते हैं। घास की कतरनें लॉन से घास की कतरनों को कभी-कभी एकत्र किया जाता है और कहीं और पलवार के रूप में उपयोग किया जाता है। घास की कतरनें घनी होती हैं और नीचे की ओर जाती हैं। इसलिए पेड़ के पत्तों या खुरदरी खाद के साथ मिलाया जाता है, ताकि भूमि में वातन प्रदान किया जा सके और दुर्गंध के बिना उनके अपघटन को सुविधाजनक बनाया जा सके। ताजा घास की कतरनों के सड़ने से पौधों को नुकसान हो सकता है। उनके सड़ने से अक्सर हानिकारक गर्मी का निर्माण होता है। घास की कतरनों को अक्सर प्रयोग से पहले अच्छी तरह से सुखाया जाता है। इससे वे तेजी से सड़ें और अत्यधिक गर्मी उत्पादन न हो। ताजी हरी घास की कतरनों में नाइट्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है और जब एक पलवार के रूप में उपयोग किया जाता है, तो नाइट्रेट का अधिकांश हिस्सा मृदा में वापस आ जाता है। नियमित रूप से लॉन से घास की कतरनों को हटाने से लॉन में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। लकड़ी के छोटे टुकड़े मल्च बनाने एवं लकड़ी के कचरे को नेपटाने के लिए इसका उपयोग अक्सर पेड़ों, झाड़ियों या बड़े रोपण क्षेत्रों के लिए किया जाता है। यह पेड़ों के पलवार की तुलना में अधिक समय तक रह सकता है। भूमि आवरण ऐसे पौधे, जो मुख्य फसल के नीचे जमीन के करीब बढ़ते हैं और जिनसे खरपतवारों का विकास धीमा हो जाता है, आमतौर पर तेजी से बढ़ने वाले पौधे हैं और मुख्य फसलों के साथ बढ़ते रहते हैं। इसके वपरीत, आवरण फसलों को मृदा में शामिल केया जाता है या खरपतवारनाशी के साथ मार दिया जाता है। मुख्य फसल के साथ प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए जीवित पलवार को भी यंत्रवत् या रासायनिक रूप से मारना पड़ सकता है। पुआल या खेत की घास पुआल पलवार या खेत के घास हल्के होते हैं और सामान्य रूप से संपीड़ित गट्ठरों में बेचे जाते हैं। इसका उपयोग वनस्पति उद्यानों और सर्दियों के आवरण के रूप में किया जाता है। वे पी-एच में उदासीन और जैव अपघटनशील होते हैं। उनके पास अच्छी नमी बनाए रखने और खरपतवार नियंत्रण के गुण होते हैं। खरपतवार के बीज के दूषित होने की भी अधिक आशंका होती है। अकार्बनिक पलवार प्लास्टिक पलवार इससे भूमि को पूरी तरह से ढक देते हैं तथा फसलें पतली प्लास्टिक की चादर में छेद के माध्यम से बढ़ती हैं। आजकल यह विधि बड़े पैमाने पर सब्जी उगाने के लिए अपनाई जा रही है। दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष प्लास्टिक पलवार के तहत लाखों एकड़ भूमि पर खेती की जाती है। रॉक और बजरी इसका इस्तेमाल पलवार के रूप में भी किया जा सकता है। ठंडी जलवायु में चट्टानों द्वारा बरकरार रखी गई गर्मी फसली मौसम का विस्तार कर सकती है। पीट मॉस या स्फैगनम पीट यह लंबे समय तक चलने वाला और पैक किया हुआ पलवार होता है, जो इसे सुविधाजनक और लोकप्रिय बनाता है। जब यह गीला होकर सूख जाता है, तो एक पपड़ी का निर्माण कर सकता है, जो पानी को सोखने की अनुमति नहीं देता है। जब यह सूख जाता है, तो यह सुलगने वाली आग पैदा कर सकता है। यह कभी-कभी देवदार की पत्तियों के साथ मिश्रित किया जाता है जो कि भुरभुरा होता है। यह मृदा की सतह के पी-एच को भी कम कर सकता है, जिससे अम्लीयता चाहने वाले पौधों के लिए एक पलवार के रूप में उपयोगी हो सकता है। पॉलीप्रोपाइलीन एवं पॉलीइथाइलीन पलवार पॉलीप्रोपाइलीन पलवार. पॉलीप्रोपाइलीन के बहुलक से बना होता है। वहीं दूसरी ओर पॉलीइथाइलीन पलवार, पॉलीइथिलीन बहुलक से बना होता है। ये पलवार आमतौर पर कई कई तरह से उपयोग की जाती हैं। पॉलीइथिलीन का उपयोग मुख्य रूप से खरपतवार कम करने के लिए किया जाता है, जबकि पॉलीप्रोपाइलीन मुख्य रूप से बहुवर्षीय पौधों पर प्रयोग किया जाता है। यह मृदा के कटाव को रोकता है, निराई के अतिरिक्त खर्च को कम करता है, मृदा की नमी को संरक्षित करता है और तापमान बढाता है। काले और स्पष्ट पारदर्शी पलवार सूरज की रोशनी को अवशोषित करते हैं और विकास दर को बढ़ाते हुए मृदा को गर्म रखते हैं। सफेद और अन्य पारदर्शी रंग के पलवार मृदा को गर्म करते हैं, लेकिन वे खरपतवार को नहीं रोक पाते हैं। इस पलवार का उपयोग करने पर सिंचाई के लिए विशेष प्रणाली की आवश्यकता होती है जैसे-ड्रिप सिंचाई, क्योंकि यह मृदा तक पहुंचने वाले पानी की मात्रा को कम करता है। इस पलवार को फसली मौसम के अंत में हाथ से हटाने की आवश्यकता होती है, जब यह टूटना शुरू होता है, तो यह छोटे टुकड़ों में टूट जाता है और मृदा में प्रदूषक का कार्य करता है। स्त्राेत : निशाकांत मौर्य शोध छात्र, सब्जी विज्ञान विभाग); डी.राम- प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, औषधीय एवं सगंध फसल, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या (उत्तर प्रदेश); पवन कुमार मौर्या- शोध छात्र, फल विज्ञान विभाग, च.शे. आ.कृ. एवं प्रौ.वि.वि. कानपुर (उत्तर प्रदेश)।