संरक्षी भोज्य प्रकृति ने हमें तोहफे के रूप में कई फल प्राकृतिक तौर पर प्रदान किए हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें जलवायु-विशेष में उगाए जाने की प्रवृति के अनुसार शीतोष्ण(जैसे-सेब, नाशपाती, खुबानी, आलूबुखारा, आडू आदि), उपोष्ण(अनार, लीची, लोकाट, नीबूवर्गीय फल आदि) एवं ग्रीष्म कटिबंधीय(आम, केला, अमरूद, नारियल आदि) फलों में वर्गीकृत किया है। फल-विशेष में अपने-अपने गुण होते हैं। कइयों को आकर्षक रंग, स्वाद आदि के लिए तथा शेष को उनमें मौजूद औषधीय गुणों के लिए उगाया जाता है। फलों में मौजूद कई संघटक जैसे-एंथोसायनिन, कैरोटिनॉएड, फ्लेवोनॉयड, विटामिन ‘सी’ आदि मनुष्य के शरीर को कई घातक रोगों जैसे-हृदयघात, मधुमेह आदि से बचाते हैं। अतः फलों को ‘संरक्षी भोज्य’ की श्रेणी में रखा गया है। आहार वैज्ञानिकों ने संतुलित आहार में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कम से कम 120 ग्राम फलों को सम्मलित करने की सलाह दी है। हाइब्रिड(संकर) विदेशी फल विश्व में प्राकृतिक तौर पर प्राप्त फलों में सुधार के लिए कई शोध संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में शोध कार्य चल रहे हैं। शोध कार्यों का मुख्य उद्देश्य फलों के आकार, रंग, गुणवत्ता आदि में सुधार करना होता है। इसके लिए वैज्ञानिक कई विधियों जैसे-चयन एवं संकरण आदि का उपयोग करते हैं। संकरण में मुख्यतः दो या अधिक जनकों का संकरीकरण करते हैं। इससे जो संतति पैदा होती है, वह गुणों में पैत्रिक जनकों से बेहतर होती है। इसी संतति को ‘संकर’ कहते हैं। संकरण द्वारा वैज्ञानिकों ने विभिन्न फलों की हजारों ‘संकर’ किस्में विकसित की हैं। विश्व में कुछ फल ऐसे भी हैं, जो प्राकृतिक तौर पर थे ही नहीं। परंतु वैज्ञानिकों ने उन्हें संकरण द्वारा तैयार कर विकसित किया है। इस लेख में इन्हीं कुछ हाइब्रिड(संकर) विदेशी फलों के बारे में चर्चा की गई है। टेबेरी टेबेरी का विकास स्कॉटलैंड बागवानी अनुसंधान संस्थान के डा. डेरेक जेनिंग्स द्वारा किया गया था एवं इसे वर्ष 1979 में जारी किया गया। टेबेरी, ब्लैकबेरी एवं रसभरी के संकरण से विकसित संकर फल है। इसका नाम स्कॉटलैंड की प्रसिद्ध नदी ‘टे’ पर रखा गया है। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन इसके फल लोगनबेरी से मीठे, बड़े एवं सुगंधमय होते हैं। इन फलों को मुख्यतः ताजा ही खाया जाता है एवं इनकी तुड़ाइ हाथों से की जा सकती है। यही कारण है कि इसका व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन नहीं हो पा रहा है। जैम, जेली एवं मदिरा तैयार करने में सहायक टेबेरी के फल ‘कोन’ की तरह एवं लाल-बैंगनी रंग के होते हैं। ब्लकैबेरी की तरह तुड़ाई के बाद धानी फल से लगी रहती है। ये फल लोगनबेरी से कम अम्लीय परंतु प्रबल सुवास वाले होते हैं। इसके फल कम कैलोरी परंतु उच्च खाद्य रेशे एवं प्रतिऑक्सीकारकों से भरपूर होते हैं। टेबेरी के फलों को जैम, जेली एवं मदिरा तैयार करने के लिए प्रयोग करते हैं। जोस्टाबेरी जोस्टाबेरी यह एक जटिल संकर फल है, जो राईबस वंश की तीन मूल प्रजातियों ब्लैक करंट, उत्तरी अमेरिकन ब्लैक गूजबेरी एवं यूरोपियन गूजबेरी के संकरण से वर्ष 1977 में विकसित हुआ है। कई रोगों के लिए रोधिता जोस्टाबेरी का पौधा लगभग ब्लैकबेरी जैसा होता है, जो लगभग 2 मीटर ऊंचा होता है। इसमें पुष्पण बसंत के मध्य में शुरू होता है एवं फलन का समय ब्लैक करंट से मिलता है। जोस्टाबेरी में कई रोगों के लिए रोधिता है, जो राईबस वंश के अन्य फलों में नहीं होती है। उदाहरणार्थ यह फल मिल्ड्यू, पर्ण चित्ती, रस्ट रोगों एवं कलि पिटिका माइट के लिए रोधी है। प्रवर्धन कलम द्वारा इसका प्रवर्धन मुख्यतः कलम द्वारा होता है। फलों का स्वाद इसके फल ब्लैकबेरी जैसे परंतु गूजबेरी से छोटे व ब्लैक करंट से कुछ बड़े होते हैं। इसे ताजा एवं पकाकर खाया जा सकता है। फलों का स्वाद गूजबेरी एवं ब्लैक करंट के बीच का होता है। इसके पके फल कई दिनों तक पौधों पर बने रहते हैं, परंतु पक्षियों में लोकप्रिय होने के कारण बहुत क्षतिग्रस्त भी होते हैं। विटामिन ‘सी’ का उच्च स्रोत जोस्टाबेरी विटामिन ‘सी’ का उच्च स्रोत है। इसका व्यावसायिक उत्पादन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि यह यांत्रिक तुड़ाई के लिए उपयुक्त फल नहीं है। अन्य फलों की अपेक्षा जोस्टाबेरी के फलों की तुड़ाई श्रमकारी है। इसके फल ब्लैक करंट की अपेक्षा पौधे से दृढ़ता से लगे होते हैं। स्त्राेत : फल-फूल पत्रिका(आईसीएआर), राम रोशन शर्मा’’खाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012