<p style="text-align: justify;">फल और सब्जियां जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद हैं। इनमें 80-90 प्रतिशत तक पानी होता है। ताजे फल और सब्जियों की गुणवत्ता व मात्रा में अधिक नुकसान उपज तथा उपयोग के दौरान होता है। उपज के बाद, फलों में ऑक्सीजन की खपत और कार्बनडाइऑक्साइड उत्पादन के बीच गैसीय संतुलन बदल जाता है। गैस हस्तांतरण दरों में वृद्धि से मेटबॉलिज्म दर की हानि होती है और अंततः फल परिपक्व होते हैं। गैस अंतरण दर प्रजाति, परिपक्वता जैसे-आतरिक कारक और वायुमंडलीय रचना (ऑक्सीजन, कार्बनडाइऑक्साइड और एथिलीन अनुपात), तापमान तथा अन्य बाहरी कारकों पर निर्भर करती है। बागवानी फसलों का कटाई उपरान्त का शेल्फ जीवन उनकी शुष्कता, परिपक्वता और जीर्णता की दर में कमी के साथ-साथ सूक्ष्मजीव वृद्धि पर निर्भर करता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">नियंत्रित वातावरण भंडारण और संशोधित</h3> <p style="text-align: justify;">वातावरण भंडारण जैसी तकनीकों का उपयोग गुणवत्ता परिवर्तन तथा नुकसान को कम करके फलों को संरक्षित करने के लिए किया जाता है। खाद्य कोटिंग, प्राकृतिक सुरक्षात्मक कोटिंग के लिए या इसके प्रतिस्थापन के रूप में उत्पाद की सतह पर निहित खाद्य सामग्री की पतली परतें हैं, जिन्हें डुबोकर, छिड़काव या ब्रश करके फल की सतह पर लगाया जाता है। खाद्य कोटिंग नमी और विलेय प्रवास, गैस विनिमय, श्वसन दर तथा ऑक्सीडेटिव प्रतिक्रिया दर को कम करने शारीरिक विकारों को कम करके फल और सब्जियों के शेल्फ जीवन का विस्तार करते हैं। T खाद्य कोटिंग एंटीब्राउनिंग एजेंट, रंग, स्वाद, ए पोषक तत्व और रोगाणुरोधी यौगिकों जैसे हैं सक्रिय अवयवों के संभावित वाहक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इससे शेल्फ जीवन को बढ़ाया जा सकता है और उत्पाद की सतह प पर माइक्रोबियल विकास को कम किया जा ए सकता है। इसके अलावा खाद्य कोटिंग एक प्राथमिक पैकेजिंग सामग्री के रूप में कार्य करता है और बायोडिग्रेडेबल होने के साथ, सिंथेटिक पैकेजिंग से होने वाले अपशिष्ट को कम करता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">खाद्य कोटिंग संरचना</h3> <p style="text-align: justify;">खाद्य कोटिंग निर्माण के लिए फिल्म बनाने की गुणवत्ता वाले घटकों को पानी या एल्कोहल के एक विलायक में घोल दिया जाता है और कम मात्रा में प्लास्टिसाइजर मिलाया जाता है। सक्रिय तत्व खनिज विटामिन, रोगाणुरोधी एजेंट, रंग, स्वाद, एंटीऑक्सीडेंट आदि भी मिश्रित किया जाता है और पी-एच को समायोजित करके या गर्म करके एक समान फैलाव तैयार किया जाता है। कोटिंग का प्राथमिक घटक आमतौर पर पॉलीसेकेराइड, प्रोटीन, लिपिड या इनमें से एक संयोजन होता है। पॉलीसेकेराइड प्राकृतिक पॉलीमर है, जो फल खराब होने से बचाती है खाद्य कोटिंज्यादातर पशुओं, पौधों और मरीन से निकाले जाते हैं तथा कोटिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं। इनमें उत्कृष्ट गैस अवरोधक क्षमता है। हाइड्रोफिलिक प्रकृति के कारण, इनमें नमी अवरोधक गुण नहीं होते हैं। कोटिंग के लिए प्रमुख पॉलीसेकेराइड में सेल्यूलोज, स्टार्च, पेक्टिन, चिटोसन, एल्गिनेट्स आदि शामिल हैं। प्रोटीन आधारित खाद्य कोटिंग आमतौर पर हाइड्रोफिलिक होते हैं। ये नमी को अवशोषित करते हैं और तापमान तथा सापेक्षिक आर्द्रता द्वारा प्रभावित होते हैं। अमीनो अम्ल के पॉलीमर होने के नाते, प्रोटीन में साइड चेन रासायनिक संशोधन के लिए ये उपयुक्त हैं, जिससे पैकेजिंग सामग्री को आवश्यक गुण प्रदान करने में सुविधा होती है। प्रोटीन आधारित फिल्मों को एसिड, बेस, ऊष्मा द्वारा प्रोटीन के विकृतीकरण द्वारा विस्तारित संरचना के रूप में निर्मित किया जाता है। आयोनिक और हाइड्रोजन बॉन्ड आधारित फिल्मों में उत्कृष्ट गैस अवरोधक क्षमता होती है, लेकिन नमी की आशंका होती है। कम सापेक्ष आर्द्रता की स्थिति में, ऐसी फिल्में अच्छे ऑक्सीजन अवरोध के रूप में कार्य करती हैं और उपज की गुणवत्ता को संरक्षित करने में मदद करती हैं। खाद्य कोटिंग और फिल्मों में प्रयुक्त प्रोटीन, दोनों पशु आधारित (जिलेटिन, मट्ठा, कैसिइन, कोलेजन) और वनस्पति आधारित (सोया प्रोटीन, जीन, लस) हैं। लिपिड, कोटिंग में सबसे मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ है, जिसका उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है। इनका उपयोग फलों और कन्फेक्शनरी उत्पादों के लेप के लिए किया जाता है। लिपिड आधारित कोटिंग हाइड्रोफोबिसिटी और कम श्वसन के कारण अच्छी नमी अवरोधक है। इससे उत्पाद का शेल्फ जीवन बढ़ता है। वे फल को चमक प्रदान करते हैं। कोटिंग के रूप में उपयोग किए जाने वाले लिपिड में वैक्स (पैराफिन, कार्नुबा, कैंडेलिला और मधुमक्खी मोम), फैटी एसिड, मोनोग्लिसराइड्स, रेजिन आदि शामिल हैं।</p> <p style="text-align: justify;">कोटिंग की प्रभावकारिता को बढ़ाने ब न के लिए इसमें नैनोटेक्नोलॉजी के उपयोग कि ज से आवश्यक तेल, विटामिन, पॉलीफेनोल्स, प नी फ्लेवोनोइड्स, एंजाइम, एंटी-ब्राउनिंग एजेंट ए त जैसे सक्रिय एजेंट शामिल किए जा सकते व 7, हैं। छोटे आकार के कारण, ज्यादा सतह का स त क्षेत्र नैनो पार्टिकल्स को सक्रिय और स्थिर में ग बनाता है। इससे उनके पास बेहतर अवरोधक, पै ने यांत्रिक, ऑप्टीकल गुण हैं। इनका उपयोग में य नैनो इमल्शन, नैनोट्यूब, नैनोकॉम्पोसिट, ल गों सॉलिड लिपिड नैनोपार्टिकल्स या नैनोफाइबर से ए के रूप में कोटिंग मैट्रिक्स में किया जा प ग सकता है। ग खाद्य कोटिंग के उपयोग से फल श का की सतह पर चमक आती है और ये फलों क को ठोस रखते हैं। भंडारण के दौरान इनके ग वजन में कमी नहीं होती। श्वसन दर और स, एथिलीन उत्पादन दर धीमी हो जाती है। इसलिए उत्पाद के पकने और खराब होने दे में देरी होती है। यह ठंड से लगने वाली बचाता है। इसके अलावा, गैस परिवहन के खिलाफ अवरोधक के रूप में और विटामिन, पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीऑक्सीडेंट एजेंट, एंटीमाइक्रोबियल आदि के वाहक के रूप में कार्य करता है। यह फलों और सब्जियों के लिए प्राथमिक पैकेजिंग के रूप में काम करता है। इसके अलावा सिंथेटिक पैकेजिंग सामग्री के उपयोग को कम करने में मदद करता है। खाद्य कोटिंग का मुख्य लाभ यह है कि इनका भोजन के साथ-साथ सेवन किया जा सकता है और ये अतिरिक्त पोषक तत्व प्रदान कर सकते हैं। इसमें एंटीमाइक्रोबियल को बढ़ाने वाली गुणवत्ता शामिल हो सकती है।</p> <p style="text-align: justify;">विकासशील देशों में फलों और सब्जियों की कटाई के उपरान्त लगभग 40 प्रतिशत उपज का नुकसान होता है। यह नुकसान प्रत्येक क्षेत्र और उसके आर्थिक संसाधनों में मौजूद प्रबंधन की स्थितियों पर निर्भर करता है। फिल्म और कोटिंग खाद्य गुणवत्ता, शेल्फ जीवन, सुरक्षा और कार्यक्षमता में सुधार के लिए एक आशाजनक प्रणाली है। उनका उपयोग व्यक्तिगत पैकेजिंग सामग्री, खाद्य कोटिंग सामग्री और सक्रिय संघटक वाहक के रूप में और खाद्य पदार्थों के भीतर विषम अवयवों को अलग करने के लिए किया जा सकता है। फिल्म और कोटिंग की दक्षता और कार्यात्मक गुण फिल्म बनाने वाली सामग्री की अंतर्निहित विशेषताओं पर अत्यधिक निर्भर हैं। इन तकनीकों का व्यावसायिक अनुकूलन देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक और व्यवहार्य तरीके के रूप में कार्य कर सकता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : फल-फूल पत्रिका(आईसीएआर),अर्चना महापात्र, मनोज कुमार महावर, ज्योति ढाकणे-लाड, शर्मिला पाटिल और अशोक कुमार भारीमलभाकृअनुप-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, मुंबई-400019 (महाराष्ट्र)।</p>